
ब्यावर. प्रस्तावित बांगड़ ग्राम जंक्शन (ब्यावर) आने वाले वक्त में मारवाड़ से मेवाड़ तक कम दूरी पर बड़ी रेल लाइन बिछाने में अहम विकल्प बना है। इस दिशा मे रेलवे ने काम करना भी शुरू कर दिया है। इससे जहां आमजन की सुविधा बढ़ेगी, वहीं साथ ही यह क्षेत्र सीमेंट व मिनरल का हब होने से रेलवे की राजस्व आय का मोटा जरिया भी बनेगा। इसके अलावा रेलवे की सुविधा बढ़ने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
ब्यावर का अजमेर-जयपुर से रेल लाइन का सीधा जुड़ाव है। पर्यटन के लिहाज से वर्तमान में मेवाड़ क्षेत्र के उदयपुर तक बड़ी लाइन की सीधी रेल सेवा नहीं है। रेल सेवा वाया मारवाड़ जंक्शन, खामली घाट व मावली जंक्शन है। उसमें लंबी दूरी होने के साथ सीधा जुड़ाव भी नहीं है। यहां मारवाड़ जं. से नाथद्वारा तक मीटर गेज का ट्रेक भी मुख्य बाधा है। ऐसे में मारवाड़ से मेवाड़ क्षेत्र को सीधे ब्रॉडगेज लाइन के जरिए जोड़नेे की लंबे समय से उठ रही मांग के अब पूरे होने के आसार बने हैं।
जानकारों का मानना है कि रेलवे की ओर से ब्यावर से देवगढ़ तक ब्रॉडगेज की नई लाइन बिछा दी जाए तो न केवल अजमेर बल्कि पूरा पश्चिमी राजस्थान यानी जोधपुर, जैसलमेर, नागौर, बीकानेर से उदयपुर तक सीधी रेल सेवा सुगम हो जाएगी। गौरतलब है कि डीएफसी ट्रेक शुरू हो चुका है। इस पर प्रतिदिन कई मालवाहक गाड़ियां दौड़ रही हैं।
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नए सर्वे के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी
बर रेलवे देवगढ़ को एक वैकल्पिक मार्ग के तौर पर देखा जा रहा है। 85 किमी सर्वे के लिए 42.50 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी गई है। मावली-मारवाड़ रेलवे लाइन के दोहरीकरण में वन विभाग के कारण आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में रेलवे द्वारा लाइन से बर रेलवे देवगढ़ को जोड़ने के लिए नया पीईटी सर्वे कराने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस रेलवे लाईन के मध्य तीन अभयारण्य आने के कारण इसके आमान परिवर्तन में काफी दिक्कत आ रही थी। इसको देखते हुए रेलवे के इंजीनियरों के सुझाव पर बर को जोड़ने के लिए एक नया सर्वे कराया जाएगा। 85 किमी की इस नवीन रेलवे लाइन के सर्वे के लिए 42.50 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी गई है।
रास-मेड़ता नई रेल लाइन की उठ रही मांग
उत्तर पश्चिम रेलवे मंडल की अनुशंसा पर रेलवे बोर्ड द्वारा मेड़ता सिटी से रास तक 48.60 किमी लाइन बिछाने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। वर्तमान में पाली जिला नागौर जिले से सीधा रेल लाइन से नहीं जुड़ा हुआ है। भविष्य में रेल लाइन बन जाए तो पाली जिला नागौर से रेल लाइन से जुड़ सकेगा। रास में सीमेंट बनाने वाली अम्बुजा, श्रीसीमेंट, अल्ट्राटेक सहित अन्य की रेल के प्लांट हैं।
जहां पर सैकड़ों की संख्या में कम्पनियों कार्यरत हैं। कोयला सहित अन्य कच्ची सामग्री सीमेंट बनने के लिए पहुंचती है। सीमेंट बनने के बाद वह बाहर अन्य राज्यों में जाता है। इसलिए व्यावसायिक दृष्टि से रास से मेड़ता सिटी तक रेल लाइन बिछाना रेलवे के लिए उपयोगी साबित होगा। सांसद श्रमिक ने भी रेल मंत्री से बर-बिलाड़ा और पुष्कर-मेड़ता नई रेल लाइन की भी मांग कर रखी है।
इसलिए बढ़ेगा ब्यावर का महत्व
ब्यावर से रास तक ब्रॉडगेज के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसी तरह रास की मेड़ता रोड तथा बर को वाया बिलाड़ा, पीपाड़ रोड होते हुए सीधे जोधपुर से जोडऩे की कवायद चल रही है। ऐसे में यदि बर को देवगढ़ से जोड़ा जाता है तो मेवाड़ व मारवाड़ क्षेत्र के बीच बड़ी रेल लाइन से सम्पर्क हो जाएगा। रेलवे के विशेषज्ञों के अनुसार मारवाड़ जंक्शन से देवगढ़ की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। इतना ही ट्रेक ब्यावर से देवगढ़ तक नया बिछाना होगा।
इसमें रेलवे को नया रूट मिलने से राजस्व बढ़ेगा। इसके आगे देवगढ़ से नाथद्वारा तक करीब 90 किलोमीटर मीटर गेज को ब्रॉडगेज में बदलना होगा। गौरतलब है कि ब्यावर-खामलीघाट रेल संघ समिति लम्बे समय से नया ट्रेक बिछाने की मांग कर रही है। अब सांसद की ओर से बर तक सर्वे की अनुमति मिलने से यह सपना साकार होने की आशा जगी है।
Published on:
16 Apr 2023 12:59 pm
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