
ब्यावर का बिचड़ली तालाब खो रहा सौंदर्य,विकास के प्रति सरकार लापरवाह
ब्यावर (अजमेर). बिचड़ली तालाब ब्यावर शहर की शान है। इसका ऐतिहासिक महत्व इतिहास को जीवंत बना रहा है। ब्यावर शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में पहचान दिलाने में इस तालाब का योगदान हो सकता है, लेकिन इसके विकास व रख-रखाव की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। बिचड़ली तालाब में गंदगी बढ़ रही है। तालाब में आने वाले गंदे पानी व कीचड़ में इजाफा हो रहा है। ऐसे में बरसात में आने वाला पानी बहकर निकल जाता है। तालाब में पानी साफ नहीं हो पा रहा है। यह तालाब अतिक्रमण की चपेट में है।
पानी भराव क्षमता प्रभवित
तालाब के पेटे व आव क्षेत्र में मनमर्जी से निर्माण हो रहे हैं। इसके चलते तालाब मूल स्वरूप को खोता जा रहा है। शहर के एकमात्र तालाब को बचाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इस कारण से तालाब की भराव क्षमता दिनोंदिन कम होती जा रही है। बारिश के पानी की आवक थमीसेदरिया तालाब से जुडऩे वाले बिचड़ली तालाब का आव क्षेत्र पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। बरसाती पानी की आवक की जगह अब शहर की नालियों का पानी तालाब में पहुंच रहा है। इससे सिमटते तालाब में समाहित हो रही गंदगी से पानी मटमैला व कचरा बढ़ता जा रहा है।
इतिहास गवाह है कि मेवाड़ी गेट से शुुरू होने वाले परकोटे के सहारे.सहारे बिचड़ली तालाब था। परकोटे को जगह-जगह से धराशायी कर दिया गया है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
अमृत योजना में बिचड़ली तालाब को शामिल किए जाने से इसकी स्थिति सुधरने की आशा जगी थी, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते इसको बचाने के लिए कोई जतन नहीं किए गए।
निर्माण कार्य पर नहीं रोक
राजपूताना पब्लिक वक्र्स डिपार्टमेंट, माउंट आबू डिवीजन की 1916 की रिपोर्ट में बिचड़ली तालाब में 3.45 वर्ग मील एवं सेदरिया तालाब में 1.15 वर्ग मील जल आवक क्षेत्र बताया गया है। जबकि हाल में इन दोनों तालाबों पर नजर डालें तो स्थिति उलट है। आबादी बढऩे के साथ ही बिचड़ली तालाब के चारों ओर निर्माण हो गए।
इससे नालों का गंदा पानी भी इसमें ही समाहित होने लगा है। इसके चलते कई कॉलोनियों में पानी भरने की समस्या खड़ी हो गई है। 3.45 वर्ग मील जल आवक क्षेत्र राजपूताना पब्लिक वक्र्स डिपार्टमेंट माउंट आबू डिवीजन की 1916 की रिपोर्ट के मुताबिक बिचड़ली तालाब के निर्माण में नौ हजार एक सौ चौदह रुपए की लागत आई।
सर्वे ऑफ इंडिया विभाग की ओर से 196 9.70 में किए गए सर्वे में 3.45 वर्ग मील जल आवक क्षेत्र बताया गया। अब जल आवक क्षेत्र सिमट गया है। इस तालाब में आने वाले अधिकतर नाले खुर्द.बुर्द हो गए है।
यह है प्रावधान
सिंचाई विभाग के अनुसार तालाब के पेटे में काश्त की जा सकती है। उसमें पक्का निर्माण नहीं बनाया जा सकता। इसके अलावा नाले व नदी में पानी को बाधित करने वाले निर्माण नहीं किए जा सकते।
Published on:
11 Jun 2019 01:46 am
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