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कभी ब्यावर कहलाता था मेनचेस्टर….अब यह हाल हो गया इस कॉटन मिल का

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cotton mills

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सुनिल जैन/ब्यावर.

एतिहासिक महालक्ष्मी मिल के आधुनिकीकरण का सपना दिखाकर पांच साल पहले केन्द्र सरकार ने 167 करोड़ की कार्ययोजना को मंजूरी दी। पहले चरण में यहां लगी मशीनें भी हटाई और चिमनी भी ध्वस्त कर दी गई। लेकिन लम्बा समय बीतने के बाद भी इस योजना के नेशनल टेक्सटाइल कारर्पोरेशन की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल नहीं होने से सपना धूमिल होने लगा है।

ब्यावर की अलग पहचान

शहर में लक्ष्मी, महालक्ष्मी एवं एडवर्ड मिल से देश व प्रदेश के औद्योगिक नक्शे में ब्यावर की अलग पहचान थी। तीनों ही मिलों में हजारों लोग काम करते थे। महालक्ष्मी मिल व एडवर्ड मिल में 1200-1200 लोग काम करते थे। इससे व्यापार भी चरम पर था। धीरे-धीरे यहां की तीनों ही मिल बन्द हो गई। समृद्धि की गवाह रही चिमनियां भी ध्वस्त कर दी गई। नेशनल टेक्सटाइल कारपोरेशन ने महालक्ष्मी मिल के नवीनीकरण की योजना तैयार की।

पहले चरण का काम पूरा

इसके तहत पहले चरण में पुरानी मशीनों की नीलामी व नए भवन के लिए समतलीकरण का काम किया जाना था। पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में भवन निर्माण का काम शुरू होना था, लेकिन पिछले पांच साल से यह काम आगे नहीं बढ़ पाया है। इस दिशा में अब तक किसी राजनैतिक दल या संगठन ने काम शुरू करवाने के लिए दबाव बनाने की पहल नहीं की है।

अतीत पर एक नजर

महालक्ष्मी मिल की स्थापना 1935
एनटीसी ने किया अधिग्रहण 1962

वीआरएस शुरू हुई 1992 से
तब श्रमिक व कार्मिक थे 1200

अब रह गए- 11

महालक्ष्मी मिल के नवीनीकरण सम्बन्धी कार्रवाई मुख्यालय से हो रही है। फिलहाल यहां पर ग्यारह कर्मचारी कार्यरत हैं।

कैलाश गहलोत, श्रम कल्याण अधिकारी, महालक्ष्मी मिल ब्यावर