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मंत्री के सामने बरसे सरपंच, कहा मनरेगा का भगवान ही मालिक

बैठक में सरपंचों ने एक स्वर में ग्रामीण यांत्रिकी विभाग की शिकायत की।
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बेमेतरा

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Dakshi Sahu

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Updated: 16 Dec 2017, 12:37 PM IST

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बेमेतरा/नवागढ़. नवागढ़ विधानसभा के तहत आने वाले ग्राम पंचायतों के सरपंच व सचिवों की बैठक शुक्रवार को नवागढ़ में सहकारिता मंत्री डीडी बघेल ने जिला पंचायत सीईओ एस आलोक की उपस्थिति में ली। बैठक में सरपंचों ने एक स्वर में ग्रामीण यांत्रिकी विभाग की शिकायत की।

सरपंचों ने कहा कि विभागीय इंजीनियर महीनों तक कार्य का ले-आउट नहीं बनाते। निर्माण कार्यों का मूल्यांकन नहीं करते, नवागढ़ कार्यालय में मुलाकात करते नहीं। सरपंचों ने अपनी पीड़ा मंत्री से व्यक्त करते हुए कहा कि हम शौचालय बनाकर फंस गए हैं। भुगतान संकट के कारण स्थिति चिंताजनक है।

बाजार में देनदारी बढ़ गई है। जिन अधिकारियों ने हमें कार्य को बाध्य किया वे अब इंतजार करने की बात कह रहे हैं। सरपंचों का पक्ष रखने के बाद जिला पंचायत सीईओ एस आलोक ने लगातार हो रहे भुगतान की जानकारी देते हुए गंभीर समस्याओं पर निराकरण करने का भरोसा दिया।

बैठक में शासन के विभिन्न योजनाओं के तहत ग्राम पंचायतों में जारी कार्यों की प्रगति कार्य करने में हो रही समस्या व भुगतान संबंधी जानकारी लेकर मंत्री बघेल ने सरपंचों से कहा कि सभी योजनाओं के कार्य समय पर पूर्ण करें। किसी भी प्रकार की समस्या हो रही है तो उसका निराकरण किया जाएगा। मंत्री बघेल ने बैठक में सरपंचों को हर समस्या में साथ देने का भरोसा दिया।

घासीदास जयंती का न्यौता
नवागढ़ में 27 से 29 दिसंबर तक तीन दिवसीय गुरू घासीदास जयंती समारोह एवं पंथी प्रतियोगिता का आयोजन होना है। इसमें सतनामी समाज के प्रतिनिधि मंडल को 29 दिसंबर को नवागढ़ आने की सहमति मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह दे चुके हैं। मुख्यमंत्री के आगमन के पूर्व सरपंच व सचिवों की यह बैठक उनकी पीड़ा को जानने के लिए रखी गई थी, जिसमें प्रशासनिक अव्यवस्था उजागर हो गई।

ग्राम पंचायत छिरहा में शौचालय निर्माण का प्रोत्साहन राशि दो हजार रुपए तो हितग्राहियों को मिलता है वह पूरे दो वर्ष बाद शुक्रवार को पंचायत को मिला। इस राशि के आने के बाद गांव में उत्साह नहीं है। गांव के लोग कह रहे हैं कि शौचालय मरम्मत के लायक हो गया तब यह राशि मिली है। पंचायत को इससे कोई लाभ नहीं है।

नहीं सुधर रही व्यवस्था
गत वर्ष दिसंबर में सूखा प्रभावित किसानों को मध्यकालीन बीमा सहायता के प्रकरण तैयार कर लिए गए थे। लेकिन जनवरी से चेक का वितरण शुरू हुआ। इस बार अभी तक स्थिति यह कि गत वर्ष की राशि का भुगतान जारी है।
मनरेगा के कार्य करने का तो दबाव बनाया जाता है पर भुगतान के लिए मजदूरों को चक्कर लगाना पड़ता है। गत दो वर्षों में रोजगार मूलक कार्य नहीं होने से पलायन चरम पर है।
लगभग 80 प्रतिशत निराश्रितों को तकनीकी समस्या के चलते 5-7 माह में पेंशन मिल रहा है। इससे व्यापक आक्रोश है।
नल-जल योजना के कार्य समय पर पूर्ण नहीं हो सका। आरओ सिस्टम फेल है। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। सभी निर्माण कार्य निम्न गुणवत्ता के है। जो कितने कारगर होंगे नहीं कहा जा सकता।
महिला एवं बाल विकास के फर्जी बिलों का मामला, मनरेगा के मजदूरों का बकाया, अधूरे निर्माण कार्य सहित कई समस्या है, जिस पर लोग मुख्यमंत्री के सामने गुस्से का इजहार कर सकते हैं।