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बेमेतरा डीईओ का कारनामा – कोरबा में की थी भृत्य पदोन्नति में गड़बड़ी

वर्तमान में बेमेतरा जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ एके भार्गव ने कोरबा जिले में पदस्थापना के दौरान प्रमोशन में गड़बड़ी की थी।

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Korba DEO Officer

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बेमेतरा / कोरबा . वर्तमान में बेमेतरा जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ एके भार्गव कोरबा जिले में पदस्थापना के दौरान भृत्य प्रमोशन को लेकर गड़बड़ी को अंजाम दिया था। कोरबा डीईओ के तौर पर एके भार्गव और आरएन हीराधर ने ९ की जगह २४ भृत्य को सहायक ग्रेड तीन पर पदोन्नत किया था। इस मामले की जांच के लिए गठित टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट कोरबा कलक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा सामने आया है।

सहायक ग्रेड के लिए 36 पद स्वीकृत

कोरबा जिले में शिक्षा विभाग के समस्त संस्थाओं को मिलाकर राज्य शासन द्वारा सहायक ग्रेड तीन के कुल 36 पद स्वीकृत किया गया था। इस दौरान जिले में डीईओ के पद पर एके भार्गव और आरएन हीराधर पदस्थ थे। दोनों ही डीईओ द्वारा अलग-अलग वर्ष में कुल 24 भृत्य को सहायक ग्रेड तीन के पद पर पदोन्नत कर दिया गया जबकि शासन के नियम के मुताबिक उक्त स्वीकृत पद के 25 फीसदी पदों पर केवल नौ लोगों को ही पदोन्नति से भरा जाना था। जबकि 25 फीसदी पद अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आरक्षित रखा जाना था। वहीं शेष 50 फीसदी सीटों पर सीधी भर्ती से पदोन्नति होनी थी।

तीन अधिकारियों ने की जांच

इस मामले की शिकायत के बाद प्रशासन ने शिक्षा विभाग के तीन अधिकारियों की टीम बनाकर जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में १५ सहायक ग्रेड तीन का प्रमोशन नियम विरूद्ध पाया गया है। सुराज की वजह से फिलहाल कार्रवाई नहीं हो सकी है। जल्द इसमें डिमोशन और वसूली की कार्रवाई होगी।

एक बाबू से 6 से 8 लाख होगी वसूली

नियम विरूद्ध प्रमोशन पाने वाले हर एक बाबू से ६ से आठ लाख रूपए की वसूली होगी। १५ बाबुओं से लगभग सवा करोड़ रूपए तक की वसूली होगी। बताया जा रहा है कि इसमें से तीन बाबू रिटायर तक हो चुके हैं। जांच के दौरान सभी बाबुओं में हडक़ंप मच गया है। ज्यादातर बाबू डीईओ कार्यालय में पदस्थ हैं, इसलिए इस मामले की जांच शुरू करने में काफी देरी की गई। प्रशासनिक गलियारे में यह मामला पिछले साल सितंबर में पहुंच चुका था। कलक्टर ने जल्द से जल्द जांच कर प्रतिवेदन मांगा था। लेकिन जांच टीम बनाने में भी देरी की गई। अब जाकर रिपोर्ट सौंपी गई है।

चेहरा देख-देखकर दिया प्रमोशन

दोनों ही पूर्व डीईओ ने प्रमोशन के मामले में अपने चेहते भृत्त को प्राथमिकता दी। इसकेे लिए चार बार सूची जारी की गई। नियम मुताबिक सभी का प्रमोशन एक साथ किया जाना था। लेकिन इसे 22 दिसंबर 2005 को जारी सूची के मुताबिक 4 लोगों को पदोन्नति दी गई थी। इसके बाद दूसरी सूची 27 जनवरी 2006 को सिर्फ एक को प्रमोशन दिया गया। इसके बाद 4 सितंबर 2009 को चार लोगों को पदोन्नति दी गई। 25 जनवरी 2012 को 11 लोगों को पदोन्नति दी गई थी।

केवल 11 लोगों का रिकार्ड बाकी गायब

पिछले साल डीईओ कार्यालय में आरटीआई के तहत सभी २४ लोगों के दस्तावेज की मांग की गई थी। इसमें विभाग ने जानकारी दी कि ११ चतुर्थ श्रेणी कर्मी को सहायक ग्रेड तीन पर पदोन्नति दी गई थी। इसके अलावा अन्य कर्मचारियों की सूची विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। दस्तावेज कहीं गुम हो चुकेे हैं। अब ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए काफी रिकार्ड खंगालना होगा। कोरबा डिप्टी कलक्टर सिम्मी नाहिद ने बताया कि पदोन्नति में गड़बड़ी की शिकायत पर जांच करवाई गई थी। जांच रिपोर्ट मिल गई है। जिलाधीश को रिपोर्ट सौंपी गई है। अब आगे जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई होगी।