
इस गांव में है देवतुल्य जटाधारी बरगद, सबसे उम्रदराज वटवृक्ष की चमत्कारी शक्तियों के गवाह हैं ग्रामीण
बेमेतरा. गांगपुर में तालाब किनारे पर दशकों पुराना बरगद का एक वृ़क्ष है। वृक्ष को तालाब निर्माण के दौरान 1935 में ही लगाया गया था। आज पेड़ में पूरी तरह जटाएं निकली चुकी हंै। जटाधारी बरगद गंागपुर के रहवासियों के अलावा आसपास के गांव के लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। 85 वर्ष से अधिक आयु वाले इस पेड़ को ग्रामीण देवरूप मानने लगे हैं। वे इस वटवृक्ष को किसी चमत्कारिक शक्तियों से पूर्ण देवता मानकर पूजा करते हैं। (national tree of india)
सबसे उम्रदराज पेड़
ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव की कई पीढिय़ों ने इस पेड़ के नीचे बैठकर जीवन गुजारा है। जिस पर हमारे पूर्वजों की यादें जुड़ी हुई हैं। ऐसे में यहां बरगद हमारे लिए देवतुुल्य है। जिसकी वजह से हम पेड़ को संरक्षित व सुरक्षित करते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने उत्साह के साथ बताया कि आसपास के गांवों में सबसे उम्रदराज पेड़ उनके गांव मे हंै।
इन औषधीय गुणों से भरा है बरगद वृक्ष(national tree of india)
आपने अब तक न जाने कितनी जड़ी बुटियों के फायदों के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपने सामान्य से दिखने बाले बरगद (banyan tree) के पेड़ के फायदे सुने हैं। अगर आप इसे सामान्य सा पेड़ मानते हैं तो अपनी भूल को सुधार लें यह सामान्य वृक्ष नहीं है बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
दस्त और पेचिश में फायदेमंद
भारत में बरगद (banyan tree) को पूज्यनीय स्थान प्राप्त है। बरगद का वैज्ञानिक नाम फाइकस वेनगैलेंसिस और अंग्रेज़ी का नाम 'बनियन ट्रीÓ है। बरगद के पेड़ के फायदे दस्त, पेचिश और बवासीर के उपचार के लिए होते हैं। इसका उपयोग दांतों और मसूड़ों के उपचार के लिए भी किया जाता है।
महिलाओं की बांझपन होती है दूर
इस दुनिया में कोई अमर हो या न हो लेकिन ऐसा लगता है कि बरगद के पेड़ों ने अमरता प्राप्त कर ली है। ये वृक्ष दशकों और शतकों से कहीं अधिक समय तक जीवित खड़े रहते हैं। बरगद के फायदे महिला बांझपन को दूर करने मे भी होते हैं। साथ ही ये कान के दर्द का प्रभावी रूप से उपचार करते हैं। (banyan tree)
Published on:
11 Jun 2019 12:23 pm
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