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यहां रातों रात सूखने लगी 3 हजार हेक्टेयर में लगी टमाटर की फसल, कृषि विशेषज्ञ परेशान

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की पांच सदस्यीय टीम ने सोमवार को साजा ब्लॉक के ग्राम पथरीखुर्द और पथरीकला का दौरा कर टमाटर फसल का सैम्पल लिया।

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बेमेतरा. धान और सोयाबीन से नुकसान झेल रहे कई किसानों को टमाटर की खेती से उम्मीद थी, लेकिन अबूझ बीमारी से रातों रात चौपट हो रही फसल ने किसानों की रही-सही उम्मीद को भी तोड़ दिया है। ऐसे में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की पांच सदस्यीय टीम ने सोमवार को साजा ब्लॉक के ग्राम पथरीखुर्द और पथरीकला का दौरा कर टमाटर फसल का सैम्पल लिया। जांच के बाद मिली रिपोर्ट आने के आधार पर बीमा सहित फसल को बचाने के लिए उपाय बताए जाएंगे।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की पांच सदस्यीय टीम में शामिल डॉ. धनजय शर्मा, डॉ. कोशवानी, डॉ, अवधिया, डॉ. वीके दुबे व डॉ. खर्रे ने ज्यादा प्रभावित साजा ब्लॉक के गांवों का दौरा कर टमाटर की लगी फसल का विश्लेषण करते हुए सैम्पल लिया। बताया जा रहा है कि सैम्पल की जांच के बाद मिले रिपोर्ट के आधार पर किसानों को फसल बचाने के लिए उपचार व उपाय की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा नुकसान उठाने वाले बीमित किसानों को बीमा के लिए कार्रवाई की जाएगी।

दो साल पहले भी हुई थी बीमारी
बताना होगा कि करीब 24 महीने पहले इसी तरह टमाटर उत्पादक किसानों को सूखने की बीमारी से नुकसान उठाना पड़ा था। अब फिर किसानों की उसी तरह बीमारी का सामना करना पड़ रहा है। जिले के साजा ब्लॉक में टमाटर की फसल ज्यादा प्रभावित हुई है। ब्लॉक के ग्राम टुरा सेमरिया, घिवरी, हेड़सपुर, गिधवा, डंगनिया, हरदास, खैरझिटी, कारेसरा, कंदई, कातलबोड़, मोतेसरा सहित कई अनेक गांवों में टमाटर के फसल काफी खराब हो गई है।

फसल की स्थिति ऐसी है कि किसानों का उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल है। उपसंचालक उद्यानिकी विभाग बेमेतरा नरेंद्र सिंह लावत्रे ने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विवि के दल निरीक्षण किया है। अर्ली ब्लास्ट की बात कही जा रही है, लेकिन लेब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ स्पष्ट कहा जा सकता है।

3 हजार हेक्टेयर में टमाटर की खेती
जानकारी के अनुसार, जिले में लगभग 3 हजार हेक्टेयर में टमाटर की खेती की जाती है। इसमें से जिले में करीब 1200 एकड़ में लगाए गए टमाटर की फसल को सूखे ने घेर लिया है। जिले के साजा, बेमतरा व बेरला में किसानों ने टमाटर की फसल सूखने की शिकायत की है। लेकिन उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को अब तक बीमारी समझ में नहीं आई है। ऐसी स्थिति में स्थिति का सही आंकलन करने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की टीम पहुंची है।