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संजीवनी एंबुलेंस के इंतजार में तड़पता रहा अधेड़, टोल फ्री नंबर 108 पर घुमाते रहे कर्मचारी, तोड़ा दम

संजीवनी एंबुलेंस की सेवा नहीं मिलने से ईलाज के अभाव में 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। सिटी पुलिस मामले में मर्ग कायम कर विवेचना में जुट गई है।

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बेमेतरा. एक बार फिर संजीवनी एंबुलेंस की सेवा नहीं मिलने से ईलाज के अभाव में 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। सिटी पुलिस मामले में मर्ग कायम कर विवेचना में जुट गई है। जानकारी के अनुसार ग्राम सावंतपुर निवासी संतराम पिता पंचराम चक्रधारी (45) अपने ससुर के दशगात्र कार्यक्रम में शामिल होने रविवार को ग्राम धनगांव आया था।

दशगात्र कार्यक्रम के पश्चात मृतक मंगलवार को अपने रिश्तेदार से मिलने दोपहर करीब 1 बजे ग्राम झाल आया हुआ था। जहां रिश्तेदारों के साथ खाना खाने के पश्चात मृतक संतराम आराम कर रहा था। इस दरमियान दोपहर करीब 2:15 बजे मृतक के सीने मे दर्द उठने के साथ तबीयत बिगडऩे लगी। इसकी जानकारी होने पर मृतक के रिश्तेदार भुवन चक्रधारी ने संजीवनी एंबुलेंस की सेवा के लिए दोपहर 2:26 बजे 108 नंबर डायल किया।

जहां कॉलर को कुछ देर में एंबुलेंस भेजने की बात कही गई। लेकिन करीब घंटेभर इंतजार करने के बावजूद एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर रिश्तेदारों ने प्राइवेट वाहन से संतराम को उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने पर ड्यूटीरत चिकित्सक निधि मेश्राम ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना सिटी पुलिस को दी गई। सूचना पर अस्पताल पहुंचकर पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

आपातकालीन वाहन संजीवनी एंबुलेंस की सेवा नहीं मिलने से इलाज के अभाव में जिले में मौत का यह दूसरा मामला है। पहले मामले में साजा ब्लॉक के ग्राम संबलपुर से कई बार 108 नंबर डायल करने के बावजूद संजीवनी एंबुलेंस की सेवा नहीं मिलने से इलाज के अभाव में एक महिला की मौत हो गई थी। वहीं पत्नी की मौत के वियोग में व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए पति ने भी जहर खाकर जान दे दी थी।

मामला उजागर होने के बाद संचालन कंपनी जीवीके ने जांच के नाम पर खानापूर्ति कर इस मिस मैनेजमेंट के लिए अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं की है। ताजा मामला ग्राम झाल का है। जहां अपने रिश्तेदार के यहां घूमने आए सावंतपुर निवासी संतराम की तबीयत बिगडऩे पर संजीवनी एंबुलेंस की सेवा नहीं मिलने पर इलाज के अभाव में मौत हो गई। मृतक के रिश्तेदार भुवन चक्रधारी ने बताया कि संजीवनी एंबुलेंस के लिए 108 नंबर पर दो बार फोन लगाने के बावजूद उसकी सेवा नहीं मिल पाई।

पीएम को लेकर डॉक्टर व पुलिस में हुआ विवाद
घटना की सूचना मिलने पर शाम करीब 5 बजे सिटी पुलिस के जवान जिला अस्पताल पहुंचे। जहां चिकित्सक द्वारा अंधेरा होने से पहले पोस्टमार्टम करने को लेकर आरक्षक अश्वनी चन्द्राकर से पंचनामा रिपोर्ट तैयार करने की बात कही। इस पर आरक्षक ने समय लगने की बात कही। इसी बात को लेकर डॉक्टर व आरक्षक के बीच तीखी बहस हो गई, दोनों ने इसकी शिकायत अपने उच्च अधिकारियों से करने की बात कही।

विवाद की वजह से शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। नतीजतन परिजन को बैरंग लौटना पड़ा। जिला प्रमुख संजीवनी सेवा राघवेंद्र वर्मा ने बताया कि बेमेतरा जिला अस्पताल की संजीवनी एंबुलेंस रेफर प्रकरण लेकर रायपुर गई थी। जिससे संबंधित कॉलर की थानखम्हरिया संजीवनी एंबुलेंस के पायलट से फोन पर बात कराई गई थी। जहां उन्होंने गाड़ी मंगाने से मना कर दिया। मृतक के ***** भुवन चक्रधारी ने बताया कि थानखम्हरिया के संजीवनी पायलट से फोन पर बात कराई गई थी। जहां फोन कटने पर संबंधित पायलट के द्वारा करीब एक घंटे बाद वाहन के लिए फोन लगाया गया। इस दरमियान मृतक संतराम को प्राइवेट वाहन से लेकर जिला अस्पताल के लिए रवाना हो चुके थे।

बताना होगा कि संतराम अपने ससुर गणेश चक्रधारी के दशगात्र कार्यक्रम में शामिल होने रविवार को ग्राम धनगांव आया हुआ था। मंगलवार को ग्राम झाल में रिश्तेदार के यहां खाना खाने के बाद संतराम की तबीयत बिगडऩे लगी। जिसे उपचार के लिए निजी साधन से जिला अस्पताल लाया गया। जहां ड्यूटीरत चिकित्सक डॉ. निधि मेश्राम ने मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर मेश्राम के अनुसार संतराम के मुंह से झाग निकल रहा था। संदिग्ध मौत की वजह से इसकी सूचना सिटी पुलिस को देने के साथ मौत के कारण को जानने शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा।