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मांगे तो पूरी हो गई, लेकिन निगरानी से बचने के लिए शिक्षकों को मिल गया नेटवर्क का बहाना

सरकारी स्कूलों के शिक्षा स्तर को उठाने के साथ-साथ व्यवस्था पर निगरानी के लिए सरकार द्वारा स्कूलों को दिया गया टेबलेट की उपयोगिता अब तक पूरी तरह से साबित नहीं हो पाई है।

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मांगे तो पूरी हो गई, लेकिन निगरानी से बचने के लिए शिक्षकों को मिल गया नेटवर्क का बहाना

बेमेतरा/दाढ़ी. सरकारी स्कूलों के शिक्षा स्तर को उठाने के साथ-साथ व्यवस्था पर निगरानी के लिए सरकार द्वारा स्कूलों को दिया गया टेबलेट की उपयोगिता अब तक पूरी तरह से साबित नहीं हो पाई है। समस्या यह है कि जिन शिक्षकों पर व्यवस्था बनाने की जवाबदारी है, वे ही किसी न किसी बहाने टेबलेट का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं।

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के मनमानी करते हुए अपने हिसाब से स्कूल आने-जाने, मध्यान्ह भोजन की पर्याप्त निगरानी नहीं करना और कागजी कार्रवाई का बहाना कर काम से अनुपस्थित रहना आम शिकायत है। इस पर नियंत्रण के लिए सरकार ने स्कूलों में टेबलेट का वितरण किया था।

जिससे शिक्षकों के आने-जाने के समय के अलावा, मध्यान्ह भोजन की मॉनिटरिंग और स्कूल के अन्य कामकाज को डिजिटल किया जा सके, और तमाम जानकारी ऑनलाइन रियलटाइम में अधिकारियों को मिल सके। लेकिन टेबलेट के किसान किसी वजह से खराब होने का बहाना कर शिक्षक इसे अनुपयोगी साबित करने में लगे हैं।

क्रियान्वयन ठीक नहीं
पूर्व जनपद सदस्य संजय तिवारी ने बताया कि सरकार ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर लगाम कसने के लिए जो व्यवस्था बनाई है, वह सराहनीय है, लेकिन इसका क्रियान्वयन ठीक ढंग से नहीं किए जाने और टेबलेट एक्सपर्ट के सतत् मॉनिटरिंग नहीं किए जाने और अनुशासन तोडऩे वाले शिक्षकों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने से टेबलेट एक खिलौना बनते जा रहा है। निश्चित ही शिक्षक अनुशासित होंगे तो विद्यार्थी स्वयं ही अनुशासित हो जाएंगे और शिक्षा गुणवत्ता निश्चित रूप से आएगी।

नेटवर्क की समस्या गंभीर
जांता संकुल समन्वयक मालिकराम साहू ने बताया कि इस संकुल में 11 प्राथमिक, 5 मिडिल व 2 हाईस्कूल हैं, इन सभी स्कूलों को टेबलेट दिया गया है। ज्यादातर स्कूलों में सिग्नल नहीं मिलने व नेटवर्क नहीं होने के कारण अपलोड नहीं होने की समस्या है, इसलिए ऑफ लाइन थंब लगाया जाता है। परंतु आज तक राज्य शासन, जिला व ब्लॉक स्तर पर ऑनलाइन डेटा प्राप्त होने के बावजूद अनुशासन तोडऩे वाले शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

व्यवस्था में आया है अपेक्षित सुधार
कई स्कूलों में टेबलेट बांटे जाने के बाद से व्यवस्था में सुधार भी आया है। बटार संकुल समन्वयक सोनलाल चंद्राकर ने बताया कि टेबलेट बांटने के बाद शिक्षकों की उपस्थिति नियमित व समय पर होने लगी है। केवल उन्हीं शालाओं में पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जो शिक्षक विहीन व एक शिक्षकीय हैं। बटार संकुल में 2 प्राथमिक शालाएं कुरदा, नेवासपुर व हेमाबंद मिडिल स्कूल शिक्षक विहीन है। वहीं प्राथमिक शाला देवगांव, नवरंगपुर व भैंसबोर्ड आज भी एक शिक्षकीय है।

दाढ़ी संकुल समन्वयक सुधीर अग्रवाल ने बताया कि संकुल के अंतर्गत 12 प्राथमिक, 4 मिडिल, 2 हायरसेकंडरी स्कूल हैं। इस प्रकार 19 शालाओं में टेबलेट उपलब्ध कराया गया है। प्राथमिक शाला गिधवा का टेबलेट खराब हो गया है, जिसकी जानकारी विकासखंड स्तर पर दे दी गई है। कई शालाओं में नेटवर्क नहीं मिलने से थंब नहीं लग पाता था।

टेबलेट एक्सपर्ट से मार्गदर्शन लेने के बाद ऑफलाइन भी थंब लगाया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान जो भी अनियमितता पाई जाती है, उसकी रिपोर्ट उच्च कार्यालय को भेजी जाती है। अनुशासनहीन शिक्षकों पर कार्रवाई उच्च अधिकारी ही करेंगे।

सिर्फ बेमेतरा में समस्या
जिला प्रोग्रामर (सर्व शिक्षा अभियान) नेहिल वर्मा ने बताया कि जिले के बेरला, नवागढ़ व साजा ब्लॉक में टेबलेट का सही उपयोग हो रहा है। केबल बेमेतरा ब्लॉक में ही टेबलेट को सही ढंग से ऑपरेट नहीं किया जा रहा है, और न ही समय पर डाटा अपलोड किया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों तक नेटवर्क वाले मोबाइल कंपनियों के सिम दिए गए हैं, फिर भी नेटवर्क नहीं होने, अपलोड नहीं होने की शिकायत मिल रही है।

बीईओ बेमेतरा अरूण खरे ने बताया कि टेबलेट आने के बाद से शिक्षकों की उपस्थिति नियमित होने लगी है। इसके बावजूद शिक्षकों द्वारा लेटलतीफी व समय से पहले चले जाने पर ऑनलाइन मॉनीटरिंग हो रही है। उच्च कार्यालय के दिशा-निर्देश पर निश्चित ही कार्रवाई होगी। अभी तक केवल हिदायत दी जा रही है। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।