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CG News: शंकराचार्य ने कहा- भगवान का विस्मरण ही विपत्ति और स्मरण ही सम्पत्ति है

CG News: विपत्ति असल में विपत्ति नहीं है और सम्पत्ति भी असल में सम्पत्ति नहीं है। भगवान का विस्मरण अर्थात उनको भूलना ही विपत्ति और उसका स्मरण ही सम्पत्ति है। हमारे ऊपर विपत्ति तभी आती है, जब हम भगवान को भूल जाते हैं। उक्त बातें जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह के पांचवे दिन के प्रवचन में कही।

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CG News: शंकराचार्य ने कहा- भगवान का विस्मरण ही विपत्ति और स्मरण ही सम्पत्ति है

CG News: जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने कुन्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि महाभारत के युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण से कुन्ती ने वरदान में विपत्ति ही मांगा। उसने कहा कि यदि विपत्ति या दु:ख रहेगा तभी हमें आपका स्मरण और सान्निध्य मिलेगा। इसलिए आपसे हम सुख-सम्पत्ति नहीं विपत्ति मांग रहे हैं। आगे कहा कि सायंकाल के समय भगवान शिव अपने गणों के साथ अपनी सूर्य, चन्द्र और अग्नि रूपी तीनों नेत्रों को खोलकर भ्रमण पर निकलते हैं। उस समय यदि कोई सत्कर्म करता हुआ दिखे तो उसे उनका आशीर्वाद मिलता है और जो निषिद्ध कर्म करता है उसकी दुर्गति होती है। इसलिए कहा जाता है कि सायंकाल के समय हमें निषिद्ध कर्मों से बचना चाहिए।

शंकराचार्य अस्पताल में इलाज पर मिलेगी 25% की छूट
भिलाई शंकराचार्य ग्रुप चेयरमैन आईपी मिश्र रविवार को शंकराचार्य जी का दर्शन करने बेमेतरा पहुंचे। उन्होंने दर्शन व श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने के बाद मंच से घोषणा करते हुए कहा कि भगवान ना करें किसी को अस्पताल आना पड़े। यदि कोई मरीज इलाज के लिए शंकराचार्य अस्पताल आता है और शंकराचार्य द्वारा अधिकृत कार्ड दिखाता हैं, तो उन्हें किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य इलाज पर 25 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी।

शंकराचार्य का दर्शन हमारा सौभाग्य
कथा के पांचवे दिन छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे बेमेतरा पहुंचे और शंकराचार्य जी का आशीर्वाद लेकर भागवत कथा का श्रवण किया। इस दौरान मंत्री चौबे ने कहा कि हम भाग्यशाली हैं, जो बार-बार शंकराचार्य यहां दर्शन देने के लिए प्रकट होते हैं। उनके मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा को सुनकर हम पुण्य कमा रहे हैं। ब्रज के समान ही छत्तीसगढ़ की धरती में भी भक्ति व भाव समाहित है। हमारा सौभाग्य है कि ज्योतिष पीठाधीश्वर के पद में विराजमान होने के बाद शंकराचार्य भगवान के द्वारा यहां पहला भागवत हो रहा है। सनातन धर्म में शंकराचार्य भगवान का मतलब साक्षात शिव शंकर भगवान है, जिनके अवतार का आशीर्वाद लेने का सौभाग्य बेमेतरा को मिला।