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चना, मसूर, राहर की भी नहीं मिल रही किसानों को सही कीमत

दिल्ली व इंदौर की थोक मंडी में मांग कम होने का असर, पिछले साल की अपेक्षा 30 से 40 फीसदी कम दर में उपज बेचना पड़ रहा

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Bemetara Public Opinion, Chhattisgarh Public Opinion, Market Research

बेमेतरा. सूखे की मार झेल रहे जिले के किसानों को ओन्हारी फसल (नगद फसल) में भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारी मशक्कत के बाद उपजे फसल को बाजार बेचने पहुंच रहे किसानों को बीते वर्ष की अपेक्षा 30 से 40 फीसदी कम दर में उपज बेचना पड़ रहा है। कारोबारी चना व मसूल सहित अन्य ओन्हारी की मांग कम होने की वजह से कीमत कम होने की बात कह रहे हैं।
400 से 900 रुपए कम दर पर बेच रहे उपज
जानकारों के अनुसार, दिल्ली व इंदौर के थोक मंडी में मांग कम होने के कारण अभी चना का बाजार भाव 3100 से लेेकर 3450 तक है, जबकि बीते वर्ष फसल आने के दौरान 4000 से लेकर 4400 रुपए प्रति क्विंटल था। मसूर का भाव 3200 रुपए क्विंटल है, जबकि बीते वर्ष 3800 रुपए क्विंटल की दर से किसानों ने बिक्री की थी। इसके अलावा राहर का बाजार भाव 4100 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि बीते साल 5000 रुपए क्विंटल की दर से बिका था।
मंडी में भी आई दाम में गिरावट
कृषि उपज मंडी दर में भी पिछले वर्ष की तुलना में दलहन-तिलहन फसलों की दाम में इस बार गिरावट आई है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए प्रति क्विंटल 1 से 2 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी में तिवरा वर्तमान में 1600 से लेकर 1650 रुपए बिक रहा है, जबकि पिछले साल यह 2200 से लेकर 2650 रुपए तक बिका था। यही स्थिति मसूर और राहर को लेकर भी देखने को मिल रही है।
मजदूरों का खर्च निकालना मुश्किल
कीमत कम होने के कारण किसानों के मंडी नहीं पहुंचने से वहां काम करने वाले मजदूरों की रोटी-रोटी संकट में आ गई है। पार्वती वर्मा ने बताया कि सुबह 8 बजे से मंडी पहुंच जाते हैं, लेकिन गिनती के किसानों के पहुंचने से एक दिन में महज 50-60 रुपए ही मजदूरी मिल पा रही है। सरोजनी धु्रव ने बताया कि मजदूरी राशि से घर का खर्च नहीं चल पा रहा है। मजदूरों ने बताया कि मंडी में काम करने 10 मजदूर पहुंचते हैं।

सोयाबीन का मिल रहा अधिक दाम
किसानों को इस बार सोयाबीन का अच्छा दाम मिल रहा है। सोयाबीन 3500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है, जो बीते साल की तुलना में 500 से 700 रुपए अधिक है। इसके अलावा घान का भाव भी बाजार में इन दिनों चढ़ा हुआ है। बीते वर्ष धान जहां 1350 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिका था, वहीं इस बार 1550 रुपए क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है।
भाव कम होने से दाम नहीं मिल रहा
किसान मेधु राम, विश्राम सतनामी, सोहन साहू ने बताया कि कटाई-मिंजाई के बाद दलहन-तिलहन फसल को बेचने के लिए खुले बाजार व कृषि उपज मंडी पहुंच तो रहे हैं, लेकिन भाव कम होने से सही दाम नहीं मिल रहा है। दाम कम होने की वजह से बेहतर दिनों की आस में किसान बेचने के लिए न तो बाजार आ रहा है, और न ही मंडी।हालात यह है कि एक दिन में केवल 3-4 किसान ही अपनी उपज बेचने के लिए मंडी में पहुंच रहे हैं। कई बार तो स्थिति ऐसी रहती है कि बोहनी भी नहीं हो पाती है।
ऊपर बाजार में दाम कम होने का असर
अनाज व्यापारी राहुल अग्रवाल ने बताया कि ओन्हारी का दाम इस बार ऊपर बाजार मे मांग कम होने के कारण कम आ रहा है। यही वजह है कि बीते वर्ष से कम दर ही चना, मसूर व अन्य फसल बिक रहे हैं। केवल धान व सोयाबीन की मांग अधिक होने के कारण किसानों को दाम अधिक मिल रहा है।