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फंड के अभाव में दम तोड़ रहा जिले का एकमात्र राष्ट्रीय गो अभयारण्य

अभयारण्य में क्षमता से अधिक मवेशी, पकड़कर लाए गए मवेशियों को किया जा रहा वापस

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फंड के अभाव में दम तोड़ रहा जिले का एकमात्र राष्ट्रीय गो अभयारण्य

बेमेतरा. राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत संचालित झालम गो अभयारण्य फंड के अभाव में बदहाली की स्थिति में पहुंच चुका है। अभयारण्य संचालन के लिए केंद्र सरकार से आज तक 6 करोड़ 57 लाख के बजट को मंजूरी नहीं मिलने से जिले के गांवों व शहरों में पकड़े गए मवेशियों को वापस लौटाने की नौबत आ रही है।
अनुमोदन के बावजूद प्रोजेक्ट के लिए नहीं मिला फंड
बताना होगा कि ग्राम झालम में प्रदेश का पहला गो अभयारण खोला जाना था, जिसके लिए वर्ष 2014 के दौरान 65 एकड़ रकबा पशुधन विकास विभाग को आबंटित किया गया था। साथ ही राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत खेाले जाने वाले गो अभयारण्य को राज्य शासन ने स्वीकृत किया था। इसके बाद केंद्र स्तर पर प्रोजेक्ट को सेविंग कमेटी ने अनुमोदित भी कर दिया था, लेकिन अब तक प्रोजेक्ट के लिए परियोजना राशि का आबंटन नहीं किया गया है।
साढ़े छह करोड़ का पूरा खाका तैयार
जानकारी के अनुसार, अभयारण्य के लिए 6 करोड़ 57 लाख की योजना तैयार की गई है, जिससे प्रशासनिक भवन, पशु आवास, बाड़, गोदाम, औषधालय, दूध संग्रहण इकाइ, गो मूत्र, फिनाइल उत्पादन केन्द व विक्रय केन्द्र, वर्मी कम्पोस्ट खाद, पेयजल, चारा कटर कक्ष, अधिकारी, कर्मचारी, चिकित्सक आवास कक्ष, विद्युत व्यवस्था, सड़क सहित अन्य व्यय को शामिल किया गया था। इसके बाद से जून 2015 से अभयारण्य का संचालन गो सेवा आयेाग द्वारा किया जा रहा है।
50 की क्षमता में 72 मवेशी रखे
वर्तमान में झालम गो अभयारण्य में 50 मवेशियों को रखने की क्षमता वाले टीन शेड का निर्माण किया गया है, जिसमे अभी करीब 72 मवेशियों को रखा गया है। इसके अलावा अस्थाई व्यवस्था कर 26 गायों को अलग से रखा गया है। इसके बाद अब गांवों व शहरों में पकड़े गए आवारा मवेशी को किसान व गो सेवक लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन समस्याओं को देखते हुए मवेशियों को लौटाया जा रहा है।
मवेशियों का वापस लाना पड़ रहा
प्रवीण नीलु राजपूत, यादव राम, श्याम वर्मा, कन्हैया वर्मा, बाहरन सिंह वर्मा ने बताया कि किसानों द्वारा शहर में घुमते मवेशियों को पकड़े जाने के बाद झालम गये थे, लेकिन वहां से वापस लौटा दिया गया है। गो अभयारण्य में पर्याप्त शेड निर्माण नहीं होने के कारण गायों को रखने में असर्थतता जाहिर की गई है। समस्या से हमने कलक्टर को अवगत कराते हुए निराकरण करने का अनुरेाध किया है।
फसल नुकसान की वजह से धरपकड़ शुरू
खेतों में लगाए गए फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए किसान गायों को पकड़ रहे हैं। लेकिन पकड़े गए मवेशियों को सुरक्षित रखने की भी समस्या उत्पनन्न होने लगी है। ग्राम बीजाभाट, सिंघौरी में दिक्कत सामने आई है, वहीं इसी तरह की स्थिति अन्य गांवों में भी नजर आने लगी है।
सड़क पर बैठे मवेशी खतरनाक
फसल नुकसान के अलावा बारिश के दिनों में मवेशियों को सड़कों पर बैठे देखा जा सकता है, जिससे आए दिन गायों की अकाल मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं। बीते रविवार को अलग-अलग मार्गों पर 15 गायों की मौत हुई थी। इसके अलावा एक-दो मवेशी रोजाना सड़क हादसे का शिकार हो रही हैं, जिन्हेें सुरक्षित रखने के लिए अभयारण्य का सुविधा संपन्न होना जरूरी हो चुका है।
फंड के लिए राज्य शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
इस संबंध में झालम गो अभयारण्य के प्रभारी मयंक पटेल ने कहा कि केवल एक शेड है, जिसमें 50 मवेशियों को रखा जा सकता है, पर अभी भी क्षमता से डेढ गुना मवेशी हैं। साथ ही अस्थाई व्यवस्था भी की गई है। लेकिन जिस तरह से रोजाना मवेशियों को लेकर आने की सूचना मिल रही है, उसे देखते हुए सुरक्षित रखने का स्थान नहीं है। कलक्टर महादेव कावरे ने कहा कि राज्य शासन से अभयारण्य के लिए फंड का प्रस्ताव केन्द्र शासन को प्रस्तुत किया गया था, जिसके बाद की प्रकिया का इंतजार किया जा रहा है। आयेाग से इस मामले पर चर्चा की जाएगी।

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