25 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बच्चों को साहित्य से जोडऩे जिले के 34 स्कूलों में बाल कवि तैयार कर रहे साहित्यकार

गांवों के स्कूली बच्चों को कविता लिखने, पढऩे एवं मंच संचालन के सात साहित्यिक गतिविधियों में पारंगत किया जा रहा है। यह कार्य कवियों की संस्था राष्ट्रीय कवि संगम तीन साल से कर रही है।
2 min read
Google source verification
बच्चों को साहित्य से जोडऩे जिले के 34 स्कूलों में बाल कवि तैयार कर रहे साहित्यकार

बच्चों को साहित्य से जोडऩे जिले के 34 स्कूलों में बाल कवि तैयार कर रहे साहित्यकार

बेमेतरा. गांवों के स्कूली बच्चों को कविता लिखने, पढऩे एवं मंच संचालन के सात साहित्यिक गतिविधियों में पारंगत किया जा रहा है। यह कार्य कवियों की संस्था राष्ट्रीय कवि संगम तीन साल से कर रही है। संस्था ने अब तक 34 स्कूलों में 10 वर्ष के बाल कवियों को बारीकियां सिखाई हैं। बच्चे अपनी स्वरचित रचना तैयार कर गोष्ठी में वरिष्ठ रचनाकारों के सामने मंच पर पाठ करें तो आने वाले समय पर और निपुण हो सकेंगे। संस्था राष्ट्रीय कवि संगम की ओर से अवकाश के दिनों में गोष्ठी आयोजित कर राष्ट्रीय चेतना एवं समसामयिक विषयों पर सार्थक चर्चा की जाती है। संस्था जिले के स्कूलों एवं कॉलेजों में भी साहित्यिक आयोजन कर विद्यार्थियों को पठन-पाठन के प्रति अभिरुचि जागृत करने एवं साहित्य सृजन की क्षमता विकसित करने कार्यशाला आयोजित करती है। बाल कवियों के साथ नवोदित रचनाकार भी अपनी रचनाओं का पाठ करते हैं। इससे बच्चे निपुण हो रहे हैं। बच्चों को पुरस्कृत भी किया जाता है।

इन स्कूलों में मिलेंगे बाल रचनाकार कवि
बाल संगोष्ठी जिले के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेमेतरा, शासकीय कन्या उमावि साजा, शासकीय उमावि अंधियारखोर, शासकीय प्राथमिक शाला बिलाई, शासकीय उमावि बालसमुन्द, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय थानखम्हरिया, शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला बेरला, शासकीय हाईस्कूल फरसबोड़ स्कूलो ंमें आयोजित की जा चुकी है। नवोदित रचनाकारो को वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ साहित्यिक बारीकियों को सीखने का अवसर मिला है। इस दौरान बच्चे अपनी रचनाएं छत्तीसगढ़ी भाषा में भी तैयार करने प्रेरित किए जाते हैं। जिससे स्थानीय भाषा के माध्यम से बच्चे जल्दी व बेहतर रूप से जुड़ सकेंगे।

भावी पीढ़ी को सक्रिय करने में जुटे
राष्ट्रीय कवि संगम में जिले के महेन्द्र सिंह विरदी, कमल शर्मा, ईश्वरलाल साहू, सुनील कुमार झा, सचिव निराकार पाण्डेय, कोषाध्यक्ष सुरेश निर्मलकर, ईश्वर कुमार साहू, रमेश चौहान, श्रवण साहू, प्रमोद तिवारी, हरीश पटेल, नारायण वर्मा, कमलेश वर्मा, रामकुमार साहू, मैना अनंत, पीलेश्वरी साहू, डॉ राजेन्द्र पाटकर, जगदीश सोनी, पोषण वर्मा, पंकज शर्मा, मनोज श्रीवास्तव, सत्यधर बान्धे, दिलीप टिकरिहा आदि हैं, जो स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रचनाएं पेश कर चुके हैं। वे आने वाली पीढ़ी को सक्रिय करने में जुटे हुए हैं। वही नशामुक्ति, स्वच्छता, जल संरक्षण, संस्कृति संरक्षण एवं मानवीय नैतिक मूल्यों के विकास के लिए भी सदैव सक्रिय रहकर लोगों को प्रेरित करते हैं।

बच्चे भी रुचि ले रहे
संस्था के कमल शर्मा ने बताया कि जिस तरह से बच्चे के केवल आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं, उनको रचनात्मकता की बारीकियां कम आयु से सिखाई जाएं तो और बेहतर हो सकता है। इसी पर पहल कर हम जिले मे बालकवियों का नई पौध तैयार करने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं। बच्चे भी रुचि लेकर सीख रहे हैं।