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आखिर किसान क्यों ताक रहे आसमान की ओर, आप भी जानिए

जिले में बारिश का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। जिले के पांचों तहसील में सबसे ज्यादा विकराल स्थिति नवागढ़ तहसील में नजर आ रही है।
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बेमेतरा

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Rajkumar Bhatt

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Updated: 3 Jul 2018, 5:00 AM IST

drought

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बेमेतरा. जिले में वर्ष 2014 के बाद से लगातार बारिश का ग्राफ गिरते जा रहा है। जिले में सबसे कम बारिश नवागढ़ क्षेत्र में हो रही है, जहां तीन सालों के दौरान औसत बारिश घटकर आधी रह गई है। वहीं जिले के अन्य क्षेत्रों की भी स्थिति बारिश के मामले में बिगड़ती जा रही है।

2013 तक ठीक था उसके बाद...

बताना होगा कि जिले में सभी तहसीलों में दर्ज बारिश के आंकड़े 2013 तक तो ठीक नजर आ रहे हैं, लेकिन वर्ष 2014 से बारिश की मात्रा में आ रही गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। इसका परिणाम जिले के अधिकांश हिस्सों के सूखे की चपेट में आना है। आंकड़ों के मुताबिक, जिले के तहसीलों में वर्ष 2011 में दर्ज किए गए बारिश के आंकड़ों के हिसाब से बेमेतरा तहसील में 1447 मिलीमीटर बारिश हुई थी, वहीं सन् 2012 में 1058 मिमी और 2013 में 1987 मिमी दर्ज की गई। इसके बाद वर्ष 2014 के दैारान 1466 मिमी, 2015 में 1187 मिमी, 2016 मे 1057 मिमी और 2017 में 1124 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

बेरला, साजा, खम्हरिया में भी कम हुई बारिश

बेरला तहसील में वर्ष 2011 के दैारान 1122 मिमी, 2012 में 905 मिमी, 2013 में 1310 मिमी, 2014 में 1179 मिमी, 2015 में 1005 मिमी, 2016 में 905 मिमी व 2017 में 603 मिमी बारिश हुई। साजा में वर्ष 2011 मेें 1308 मिमी, 2012 में 1122 मिमी, 2013 में 1466 मिमी बारिश हुई। इसके बाद 2014 में 1075 मिमी, 2015 में 902 मिमी, 2016 में 938 मिमी और बीते वर्ष 2017 में 592 मिमी बारिश हुई है। थानखम्हरिया तहसील में वर्ष 2011 के दैारान 928 मिमी, 2012 में 948 मिमी, 2013 में 1097 मिमी, 2014 में 1148 मिमी, 2015 में 857 मिमी, 2016 में 921 मिमी व 2017 में 895 मिमी बारिश हुई।

कम बारिश से बिगड़ गई नवागढ़ की तस्वीर

जिले में सबसे कम बारिश नवागढ़ तहसील में हो रही है। तहसील में वर्ष 2011 के दौरान 1040 मिमी, 2012 में 937 मिमी और 2013 में 1160 मिमी बारिश का रिकार्ड दर्ज किया गया। इसके बाद वर्ष 2014 और 2015 में 857 मिमी बारिश हुई। 2016 में 110 मिमी बारिश कम होते हुए 547 मिमी पर आंकड़ा पहुंच गया। वर्ष 2017 में सबसे तक की सबसे कम 495 मिमी बारिश दर्ज की गई। कम बारिश के कारण नवागढ़ तहसीलवासियों को न केवल फसल की पैदावारी का नुकसान हुआ है, बल्कि पेयजल व निस्तारी का संकट लगातार बना हुआ है।

कम नहीं हुआ वन विहीन जिले में पेड़ों का कटना

जानकार मानते है कि जिले में ज्यादातर पेड़ छेाटे व मझोले किस्म के हैं, जिसके कारण मानसूनी हवाएं बिना बारिश के गुजर जाती है। इसके अलावा जिले में बीते कुछ वर्षों में पेड़ों की कटाई पर अंकुश लगाने का प्रयास नहीं किया गया, जिसकी वजह से पेड़ों की संख्या भी कम हुई है। पेड़ों की संख्या कम होने का सीधा असर बारिश पर माना जा रहा है

फसल उत्पादन के साथ गुणवत्ता भी हुई कम

कृषि उपंसचालक शंशाक शिंदे बताते हैं कि जिले में बीते 3 वर्षों में कम ही बारिश हुई है, जो सामान्य औसत से कम है। कम बारिश के कारण जिले में न केवल अनाज का उत्पादन कम हुआ है, बल्कि उपज की किस्म की कमजोर हुई है। कम बारिश का नुकसान सीधे-सीधे किसानों को उठाना पड़ रहा है।