यहां मरने के बाद भी लोगों को नहीं मिलता चैन, आखिर क्यों आप भी जानें

पोस्टमार्टम के लिए ग्रामीणों को करना पड़ रहा 4 से 6 घंटे का इंतजार, समस्या दूर करने में अधिकारी नहीं ले रहे रुचि

By: Laxmi Narayan Dewangan

Published: 06 Jun 2018, 06:30 AM IST

बेमेतरा. जिले के शासकीय अस्पतालों में पोस्टमार्टम के लिए जरूरी कक्ष, सुविधाएं, स्टाप व आवश्यक संसाधनों की कमी है। शाासकीय अस्पतालों में संदिग्ध मौत या दुर्धटना के दौरान हुए मौत के बाद शवों का पोस्टमार्टम अनिवार्य तौर पर किया जाना है। पर जिस तरह की स्थिति जिले के शासकीय अस्पतालों की है उसे देखते हुए स्वास्थ विभाग मरच्यूरी में सुविधा मुहैया कराने में रुचि लेते नहीं नजर नहीं आ रहा है। जिले में साजा, बेरला, नवागढ़, थानखम्हरिया व जिला अस्पताल सहित 5 शासकीय अस्पतालों में संबधित क्षेत्र के थानों से आए हुए प्रकरण में शवों का पीएम किया जाना है। जिले में जिला अस्पताल को कुछ हद तक सुविधा वाला मान लिया जाए, तो दीगर अस्पतालों में पूरी तरह अव्यवस्था का आलम है।
युवक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, पोस्टमार्टम के लिए परेशान हुए परिजन
थान खम्हरिया नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड 15 में इतवारी पिता सीताराम निषाद (20) ने मंगलवार को दोपहर में अज्ञात कारणों से अपने घर पर ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक युवक का तीन माह पहले ही विवाह हुआ था। मृतक इतवारी बढई का काम करता था। सुबह ही अपने मालिक को बताने गया था कि आज मैं काम पर नहीं आऊंगा। वापस आकर उसने फांसी लगाकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम थानखम्हरिया में नहीं होने के कारण शव को साजा अस्पताल भेजा गया था, जहां पर स्वीपर के नहीं होने के कारण शव का पोस्टमार्टम घंटेभर तक नहीं किया गया था।
थानखम्हरिया अस्पताल में मरच्यूरी की सुविधा नहीं
इस संबंध में बीएमओ डॉ. एके वर्मा ने बताया कि साजा में एक ही स्वीपर होने के कारण ऐसी स्थिति बन जाती है। जिले में सबसे नवीनतम अस्पताल भवन वाले थानखम्हरिया शासकीय अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए मरच्यूरी की भी सुविधा नहीं है। करोड़ों की लागत से बने अस्पताल का लोकार्पण करीब 2 साल पहले हुआ है और इन दो सालों में पोस्टर्माटम के लिए आने वाले प्रकरण को थानखम्हरिया से 20 किमी दूर साजा शासकीय अस्पताल भेज दिया जाता है। प्रभारी डॉ. कमलकांत मेश्राम ने बताया कि पूरे परिसर में कहीं पर मरच्यूरी ही नहीं बनाया गया है, जिसके कारण प्रकरण को साजा भेज दिया जाता है।
साजा अस्पताल में बिजली नहीं
शासकीय हास्पिटल परिसर से एक किलोमीटर दूर तालाब किनारे 15 साल पहले बने मरच्यूरी में पोस्टमार्टम किया जाता है। डॉ. अश्वनी वर्मा ने बताया कि मरच्यूरी में मीटर नहीं होने के कारण रात में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कक्ष में लाइट है न दीगर सुविधा। लाइट, पानी व मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर उच्च कार्यालय को भेजा गया है। साजा अस्पताल में परपोड़ी, साजा, देवकर थाना क्षेत्र के लोग पोस्टमार्टम के लिए शवों को लेकर आते हैं।

बेरला में स्वीपर नहीं, कक्ष जर्जर
बेरला शासकीय अस्पताल के डॉ. जितेन्द्र कुजाम के अनुसार बेरला में मरच्यूरी भवन करीब 20 साल पुराना है। जिसके कारण वह पूरी तरह जर्जर हो चुका है। जानकार बताते हैं कि बिजली तो दूर भवन का दरवाजा ही गायब हो चुका है। स्थिति को देखकर लगता है कि यहां पर नया मरच्यूरी भवन बनाना जरूरी है। बेरला अस्पताल परिसर से मरच्यूरी एक किमी दूर है। जहां शव ले जाने के बाद डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल में सहयोगी स्वीपर का पद भी रिक्त है।
25 साल से महिला डॉक्टर नहीं है
जिले के नवागढ़ अस्पताल को डेढ साल पहले ही एक नया मरच्यूरी कक्ष मिला है। जिसके कारण पूर्व की तरह खुले में पोस्टमार्टम करने की स्थिति से प्रबंधन को छुटकारा मिल गया है। बीएमओ डॉ. टीएन महिंग्लेेश्वर ने बताया कि नवागढ़ अस्पताल में 25 साल से महिला डॉक्टर का पद रिक्त है। जिसके कारण जब शव के पोस्टमार्टम के लिए महिला डॉक्टर की जरुरत पड़ती है तो बेमेतरा से बुलाते हैं या फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज देते हैं।
बजट बढ़ जाने से हुआ निरस्त
बेमेतरा सीएचएमओ डॉ. एसके शर्मा ने कहा कि जिले में साजा में एक मरच्यूरी के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। नवागढ़ में अभी-अभी बना है पर महिला चिकित्सक नहीं है। थानखम्हरिया की जानकारी लेनी होगी। बेरला से रिपोर्ट मंगाकर प्रस्ताव बनवाएंगे। जिला अस्पताल में 30 लाख का बजट होने के कारण एसीयुक्त मरच्यूरी बनाने का प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया है।

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