
water logging in basic school
बेमेतरा. नवीन शिक्षा सत्र शुरू हुए लगभग एक माह बीतने को है, लेकिन वर्षों से पुराने जर्जर हो चुके स्कूल भवन आज भी मुंह चिढ़ाते खड़े हैं, जिससे कभी भी अनहोनी होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे जिले में 79 स्कूल भवन हैं, जिन्हें अत्यंत जर्जर की श्रेणी में रखा गया है, और उसी परिसर के अतिरिक्त कमरों व कहीं-कहीं पर जर्जर भवनों में कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
प्रायमरी के साथ मिडिल स्कूल जर्जर
बताना होगा कि जिले के बेमेतरा विकासखंड में 16 प्राथमिक शाला भवन व 2 मिडिल स्कूल भवन, बेरला विकासखंड में 16 प्राथमिक शाला भवन, साजा विकासखंड में 17 प्राथमिक शाला भवन और नवागढ़ विकासखंड के 23 प्राथमिक शाला भवन व 5 मिडिल स्कूल भवन जर्जर है। इन भवनों को तोडऩे के लिए शिक्षा विभाग की रिपोर्ट पर कलक्टर ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को जांच कर तोडऩे का आदेश भी जारी कर दिया है, लेकिन पीडब्लूडी अधिकारियों के सुस्त रवैया के चलते कंडम हो चुके भवनों का न ही परीक्षा किया गया है, और न ही तोडऩे की कार्रवाई की गई है।
भवन मरम्मत के प्रस्ताव पर भी नहीं किया अमल
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले के चारों विकासखंडों के प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक व हाई स्कूल भवनों में फ्लोरिंग उखडऩे, प्लास्टर, खिडक़ी, दरवाजा, फर्नीचर की मरम्मत कर दुरुस्त करने के लिए दिसम्बर 2017 से लगभग 39 लाख 50 हजार रुपये राशि की स्वीकृति शिक्षा विभाग द्वारा की जा चुकी है। यह राशि जिला पंचायत के पास जमा है, लेकिन जिला पंचायत कार्रवाई करने की बजाए पैसे को दबाकर बैठ गया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से जिला पंचायत से पत्र व्यवहार भी किया गया है, लेकिन जिला पंचायत ने अब तक जवाब नहीं दिया गया है, न ही किसी स्कूल भवन की मरम्मत करने की रिपोर्ट मिली है।
पीडब्ल्यूडी करेगा काम
जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार भार्गव ने बताया कि कंडम भवनों की सूची लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई है। जिनके द्वारा भवन गिराने का कार्य किया जाएगा। जिले में 79 स्कूलों में कंडम भवन हैं।
Published on:
14 Jul 2018 01:15 am
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