इलाज के लिए खटिया पर लेटाकर तीन किमी तक महिला को बुंडाला तक लाने और फिर मुलताई पहुंचने पर उसे यहां पर भी इलाज नहीं मिल सका। महिला के परिजनों ने मुलताई में ही इसका प्राइवेट इलाज कराया है। उसके बाद शुक्रवार को भोपाल के लिए रवाना हुए। पीडि़त महिला विमला परते के बेटे राहुल ने बताया कि गुरुवार को दोपहर में एक बजे के लगभग मुलताई अस्पताल पहुंचे थे। परते ने बताया कि अस्पताल में ही लगभग एक घंटे तक बैठे रहे। कर्मचारियों ने कहा कि डॉक्टर आ रहे हैं,लेकिन जब डॉक्टर नहीं आया तो प्राइवेट में इलाज के लिए लेकर चले गए। रात भर प्राइवेट अस्पताल में ही भर्ती रखा। इसके बाद शुक्रवार को फिर भोपाल में इलाज के लिए निकले हैं। इस संबंध में मुलताई बीएमओ डॉ मनोज खन्ना ने बताया कि मुलताई अस्पताल में विमला नाम से कोई मरीज नहीं आया है। इधर 108 के नहीं पहुंचने को लेकर सीएमएचओ डॉ प्रदीप मोजेस ने बताया कि ग्राम सालईढाना निवासी विमला परते को लेने 108 क्यों नहीं पहुंची इसे दिखवाया जाएगा। गांव में पथरीला रास्ता होने से 108 को कम से कम ग्राम बुंडाला तक पहुंचना चाहिए था। यहां पर भी वाहन नहीं पहुंचा है। इसकी जांच कराएंगे और जो भी दोषी होगा उन पर कार्रवाई की जाएगी। बताया गया कि शुक्रवार को आमला तहसीलदार दिनेश सालवे भी ग्राम सालईढाना पहुंचे थे। सालवे ने बताया कि जामुनझिरी से गांव पहुंचे थे। गांव में जाने के लिए सड़क नहीं होने से उन्हें भी तीन किमी तक पैदल चलना पड़ा। गांव में बिजली-पानी की भी कोई सुविधा नहीं है। उल्लेखनीय है कि ग्राम सालईढाना में सड़क नहीं होने से मजबूरी में ग्रामीणों को गुरुवार एक महिला मरीज को तीन किमी खटिया पर लेटकार ग्राम बुंडाला तक पहुंचना पड़ा था,फिर यहां से बस से मुलताई ले गए थे।