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बच्चों ने कागज से बनाए शंख और बांसुरी

- रक्कू बाल गतिविधि शिविर में १८५ विद्यार्थियों ने लिया भाग

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Children's conch shells and flutes made from paper

बच्चों ने कागज से बनाए शंख और बांसुरी

हरदा. आदिवासी लोक कला परिषद के द्वारा प्रोत्साहन एजुकेशन सोसायटी के सहयोग से रक्कू बाल गतिविधि शिविर के तीसरे दिन शनिवार को कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। संयोजन टीम की महिला शिक्षिका रेखा चौबे ने बताया कि रचनात्मक गतिविधियों में ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों के 18 5 बच्चों ने हिस्सा लिया। इनमें शासकीय नवीन माध्यमिक शाला कनारदा, शासकीय नवीन माध्यमिक शाला कुकरावद, शासकीय नवीन बैरागढ़, शासकीय माध्यमिक शाला उड़ा, शासकीय हाईस्कूल उड़ा के बच्चे शामिल हुए। कार्यशाला में भोपाल से आए प्रशिक्षक कार्तिक शर्मा द्वारा ओरिगेमी में कागज के कई प्रकार खिलौने बनाने सिखाए, प्रेमलता पंडित पिपरिया के द्वारा मिट्टी को अद्भुत आकार में ढाला गया। इनमें कई तरह के शंख, बांसुरी बनाए, जिनसे अलग-अलग ध्वनि निकालकर मुंह से बजाया भी जा सकता है। केंद्रीय विद्यालय की शिक्षिका प्रेमलता शर्मा द्वारा बच्चों को डॉट पेंटिंग सिखाई गई। कार्यक्रम के समन्वयक ने बच्चों का कामन सत्र लिया।उन्हें गीत एवं खेल के द्वारा बच्चों को शिक्षा से जोड़ा।बच्चों के उत्साह एवं रूचि को देखते हुए बच्चों की अधिक संख्या को देखते हुए तीन की बजाय चार कॉर्नर बनाना पड़ा, जिनमें ओरिगेमी, क्रॉफ्ट में डमरु, भारत जोड़ो, ग्रीटिंग कार्ड बनाना, रंगों की कलाकारी, मॉस्क बनाना एवं मिट्टी के खिलौने इत्यादि रखे गए।

रासलीला में दिखाया मीरा का चरित्र मंचन
हरदा. शहर के मिडिल स्कूल पर चल रहे जनरंजन कार्यक्रम में शनिवार को श्री राधाकृपा रासलीला संस्थान वृंदावन द्वारा प्रसिद्ध रासाचार्य और संगीतज्ञ स्वामी फतेहकृष्ण शर्मा के निर्देशन में मीरा चरित्र का मंचन किया गया। इसमें मीरा अपने दादा राग डोडाजी के साथ तीर्थ भ्रमण के लिए जाती है, वहां सत्संग के दौरान उन्हें याद आता है कि वे पूर्व जन्म में गोपी थीं। विवाह के बाद भगवान कृष्ण को मुंह दिखाने के लिए मना कर देती हैं। गिरिराज लीला के दौरान वह भगवान के दर्शन के लिए पश्चाताप करती हैं। कृष्ण उनसे कहते हैं कि अगले जन्म में वे मीरा होंगी और गिरधर गोपाल के रुप में वे उसे प्राप्त होंगे। वह विवाह के लिए इंकार करती हैं, पर लोक लाज के लिए विवाह करती हैं। पति की मृत्यु देवर द्वारा प्रताडऩा पर गिरधर के रूप में कृष्ण को पति रूप में स्वीकार्य करती है। कलाकारों ने मीरा चरित्र, लीला के माध्यम से लोक चेतना के समर्पण और भक्ति का महत्व सुगठित अभिनय और संवाद के माध्यम से प्रभावित किया।