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पुराने कचरे का निपटान अधूरा, 10 टन नए कचरे का लगा ढेर

-ट्रेंचिंग ग्राउंड में बढ़ी समस्या, दुर्गंध से परेशान रहवासी, एमआरएफ सेंटर योजना भी ठंडे बस्ते में। बैतूल। शहर के गौठाना स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरा प्रबंधन की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। पुराने कचरे का निपटान अब तक पूरा नहीं हो पाया है, वहीं दूसरी ओर प्रतिदिन आने वाले फ्रेश कचरे की प्रोसेसिंग नहीं […]

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-ट्रेंचिंग ग्राउंड में बढ़ी समस्या, दुर्गंध से परेशान रहवासी, एमआरएफ सेंटर योजना भी ठंडे बस्ते में।

बैतूल। शहर के गौठाना स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरा प्रबंधन की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। पुराने कचरे का निपटान अब तक पूरा नहीं हो पाया है, वहीं दूसरी ओर प्रतिदिन आने वाले फ्रेश कचरे की प्रोसेसिंग नहीं होने से करीब 10 टन कचरे का नया ढेर जमा हो गया है। इससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रेंचिंग ग्राउंड में पुराने कचरे के निष्पादन के लिए ठेकेदार द्वारा बेलेस्टिक प्लांट और ट्रोमल मशीन के माध्यम से काम किया जा रहा है, लेकिन इसकी गति धीमी बनी हुई है। इसी के चलते नए कचरे की प्रोसेसिंग समय पर नहीं हो पा रही है। सबसे अधिक समस्या फ्रेश कचरे से हो रही है, जिससे आसपास के इलाकों में तेज दुर्गंध फैल रही है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि रोजाना डंप हो रहे कचरे के कारण जीना मुश्किल हो गया है। हालांकि नगरपालिका का दावा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद फ्रेश कचरे की प्रोसेसिंग की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। धीमी प्रक्रिया के कारण कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
आठ टन पुराने कचरे का ढेर लगा
पुराने कचरे के निष्पादन का कार्य नोएडा ईको स्टैंड कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी के अनुसार, टेंडर शर्तों के तहत 134 टन कचरे का निपटान पहले ही किया जा चुका है। इसके अलावा दबाव के चलते 11 टन कचरे का पुन: निष्पादन किया जा रहा है, जिसमें से 3 टन कचरा प्रोसेस किया जा चुका है, जबकि शेष 8 टन कचरा अभी ग्राउंड में पड़ा हुआ है। कंपनी का दावा है कि इसे 15 से 20 दिनों के भीतर पूरी तरह निपटा दिया जाएगा।
कचरा परिवहन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी
ट्रेंचिंग ग्राउंड से निकलने वाले वेस्ट कचरे का परिवहन भी जारी है, लेकिन इसमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। कचरे को बिना ढके ट्रकों में भरकर ले जाया जा रहा है, जिससे रास्ते में कचरा फैल रहा है। इससे न केवल गंदगी बढ़ रही है, बल्कि प्रदूषण का खतरा भी उत्पन्न हो रहा है। जबकि नियमानुसार कचरे से भरे ट्रकों को ग्रीन नेट से कवर्ड कर निकालना जरूरी है, लेनिक ऐसा नहीं किया जा रहा है।
एमआरएफ सेंटर अधर में लटका
शहर में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए 1.77 करोड़ रुपए की लागत से मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर स्थापित किए जाने की योजना अधर में लटक गई है। इस योजना के तहत सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग कर वैज्ञानिक तरीके से रिसाइक्लिंग की जानी थी। नगर पालिका द्वारा इसका ले-आउट भी तैयार किया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते यह योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है। रहवासी ट्रेंचिंग ग्राउंड को आबादी क्षेत्र से बाहर शिफ्ट करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
शहर से प्रतिदिन 40 टन कचरा निकल रहा
बैतूल शहर के 33 वार्डों से प्रतिदिन लगभग 40 से 45 टन कचरा एकत्रित किया जाता है, जिसे ट्रेंचिंग ग्राउंड में डंप किया जाता है। ऐसे में पुराने कचरे के साथ-साथ नए कचरे का ढेर भी बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में हालात और खराब हो सकते हैं।लोगों का कहना है कचरा प्रबंधन की धीमी प्रक्रिया और योजनाओं के अधर में लटकने के कारण ट्रेंचिंग ग्राउंड बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
इनका कहना

  • पुराने कचरे का निष्पादन चल रहा है। पंद्रह से बीस दिनों में पुराने कचरे का ढेर खत्म हो जाएंगा। फ्रेश कचरे को लेकर प्रोसेसिंग नहीं हो पा रही है। एमआरएफ प्लांट का काम भी शुरू नहीं हो सका है। इसलिए दिक्कतें बनी हुई है।
  • पंकज धुर्वे, सब इंजीनियर नगरपालिका बैतूल।