
gwalior betul national highway mp project update wildlife clearance (demo pic)
Gwalior-Betul National Highway: मध्यप्रदेश के ग्वालियर से बैतूल को जोड़ने वाले 634 किमी लंबे नेशनल हाईवे का काम अब जल्द पूरा हो सकेगा। चार साल से इस नेशनल हाईवे का काम हाईकोर्ट के आदेश के बाद से रुका पड़ा था। हाईकोर्ट ने चार साल पहले इसे वन्यजीवों के लिए असुरक्षित बताते हुए काम पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद वाइल्डलाइफ बोर्ड और केन्द्र सरकार ने भी जरूरी अनुमति मिलने के बाद ही काम शुरु करने के आदेश दिए थे और अब हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने वाइल्डलाइफ बोर्ड व केन्द्र सरकार से सभी जरुरी मंजूरियां प्राप्त कर ली हैं। इन अनुमतियों के साथ ही हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की जाएगी और हाईकोर्ट का आदेश मिलते ही काम शुरु कर दिया जाएगा।
ग्वालियर-बैतूल नेशनल हाईवे के अंतर्गत बैतूल के बरेठा घाट सेक्शन में करीब 21 किमी सड़क निर्माण का कार्य होना है। ये क्षेत्र वन्यजीवों के मूवमेंट खासतौर पर टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर के चलते बेहद संवेदनशील है। ये मार्ग भोपाल-नागपुर कॉरिडोर का भी एक हिस्सा है जो कि बैतूल से होकर गुजरता है। बैतूल के वैसे तो अधिकांश खंडों में हाईवे का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है लेकिन केसला रेंज, भौरा रेंज और बरेठा घाट के तीन खंड में काम हाईकोर्ट के आदेश के बाद रुका हुआ था।
बरेठा घाट सेक्शन पर वर्तमान में टू-लेन रोड है, रोड काफी घुमावदार भी है जिसके कारण यहां यातायात में कठिनाई होती है। कई बार ट्रैफिक के दबाव के कारण यहां लंबा जाम भी लगता है जिससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रोड की चौड़ाई कम होने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। इस मार्ग पर दो प्रमुख ब्लैक स्पॉट भी चिन्हित किए गए हैं, जहां बार-बार दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है। इस क्षेत्र में वन्यजीवों का मूवमेंट भी रहता है और इसके कारण भी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
ग्वालियर-बैतूल नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए अब NHAI ने हाईकोर्ट और वाइल्डलाइफ बोर्ड के निर्देशानुसार बरेठा घाट सेक्शन और अन्य संवेदनशील वन क्षेत्र खंडों में वन्यजीव और प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता दी है। जिससे की सड़क से गुजरने वाले यात्रियों के साथ ही वन्यजीवों के जीवन को भी सुरक्षित रखा जा सके। NHAI ने इस सेक्शन में कुल 10 एनिमल अंडरपास और 1 एनिमल ओवरपास बनाने की योजना बनाई है। इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि वाहनों की गति और आवाज से वन्यजीवों को कोई नुकसान या परेशानी न हो।
Updated on:
20 Mar 2026, 7:27 PM IST
Published on:
20 Mar 2026, 7:27 PM IST
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