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यहां फ्री में खिलाए जाते हैं रसीले आम, दूर दूर से स्वाद लेने आते हैं आम के शौकीन

मध्य प्रदेश में एक ऐसा गांव भी है, जहां इतनी महंगाई के बावजूद अलग अलग वैरायटी के रसीले और लज़ीज़ आम फ्री में खिलाए जाते हैं।

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यहां फ्री में खिलाए जाते हैं रसीले आम, दूर दूर से स्वाद लेने आते हैं आम के शौकीन

बेतूलः गर्मी से राहत पाने के लिए लोग तरह तरह के जतन करते हैं। वैसे तो गर्मी का मौसम बहुत कम ही लोगों को पसंद होता है और जिन्हें पसंद होता है उसके पीछे बड़ा कारण आम होता है। क्योंकि, गर्मियां आएं और आम ( Mangoes ) की बात न की जाए ये तो संभव ही नहीं है। आम फल ( benefits of mango ) ही ऐसा है जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। आज के इस दौर में महंगाई के चलते ये लज़ीज़ फल आम ( sweet mango ) आदमी के बजट से बाहर होता जा रहा है। पर मध्य प्रदेश में एक ऐसा गांव भी है, जहां इतनी महंगाई के बावजूद अलग अलग वैरायटी ( Varities of Mango ) के रसीले और लज़ीज़ आम फ्री ( free Mango ) में खिलाए जाते हैं। लोगों को फ्री में रसीले आम खिलाने के पीछे इस गांव की एक खास परंपरा ( Mango Festival ) है। तो आइये जानते हैं इ अनोखे गांव की खास परंपरा के बारे में...।

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एमपी का अनोखा गांव

ऐसा कह सकते हैं कि, बेतूल जिले के चूड़ियां गांव में आम ( mango farm ) के पूरे सीज़न मैंगो पार्टी ( Mango party ) आयोजित की जाती है। इस पार्टी का उद्देश्य लोगों को फ्री में रसीले और लज़ीज़ आम खिलाना होता है। गांव में आने वाले किसी भी व्यक्ति को एक-दो नहीं बल्कि पेट भर आम ( Mango news ) खाने की अनुमति रहती है। इन स्वादिष्ट आमों में आमों का राजा दशहरी, लंगड़ा, गाजरिया, चौसा और तोतापरी ( Desi Mango ) जैसे स्वादिष्ट आमों की वेरायटी रहती है। अनुमान लगाया जाए तो यहां आम के पूरे सीज़न में ग्रामीण लाखों रुपये के आम फ्री में लोगों को खिला देते हैं। आपके मन में ख्याल आ रहा होगा कि, आखिर यहां के ग्रामीण ऐसा क्यों करते हैं, इन्हें अपना लाखों रुपये का नुकसान करने में क्या मज़ा आता है? तो इसका जवाब है इस गांव से जुड़ी अनोखी और खास परंपरा। दरअसल, यहां रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि, कई सालों पहले इस गांव से एक संत का गुज़र हुआ था। इस दौरान उन्होंने यहां के लोगों को इकट्ठा करके कहा था कि, इस गांव के लोग अगर खुशहाल रहना चाहते हैं तो वो कभी भी आम और दूध का व्यापार नहीं करेंगे। गांव वालों ने संत के आदेश का पालन करते हुए आज तक आम या दूध का व्यापार नहीं किया।

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यहां होती है आम की 'पार्टी'

गांव के ही रहने वाले एक किसान रामकिशन के अनुसार, उनके परिवार और गांव के लोग मिलकर आम के इ सीज़न में बाहरी लोगों को जितने आम लोगों को मुफ्त में खिलाते हैं उनकी बाज़ार में लाखों रुपये कीमत होती है। अकेले रामकिशन यादव के ही 150 निजी पेड़ों से करीब 100 क्विंटल से ज़्यादा अलग अलग वेरायटी के आम निकालकर हर साल यहां आने वाले लोगों को इन खास आमों के स्वाद से रूबरू कराया जाता है। ये खास परंपरा लोगों में इतनी लोकप्रीय है कि, अब इससे गांव के दूसरे लोग भी उनके साथ हो गए हैं। गांव के अन्य लोगों का कहना है कि, जिस काम से गांव की पहचान बन सकती है, उसे करना लोगों की खुशी के लिए ज़रूरी है।

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दुर-दूर से लगता है लोगों का जमावड़ा

फ्री में लोगों को स्वादिष्ट आम खिलाने से बेतूल के इस छोटे से गांव को प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में पहचान दिलाई है। चूडिया गांव में होने वाली मैंगों पार्टी में कई आम के शौकीन इसका लुत्फ उठाने दूर-दूर से आते हैं और पेट भरकर आम का स्वाद यहां से लेकर जाते हैं। गांव के लोग भले ही इसे एक परंपरा के रूप में मानते हैं, लेकिन वास्तविकता में तो ये लोगों पर एक तरह के परोपकार के समान है। वरना आज के इस जमाने में कई लोगों को तो फ्री में पानी पिलाना भी पसंद नहीं होता, लेकिन इस गांव के लोगों को फ्री में यहां आने वाले लोगों पर फ्री में आम लुटा देने में कोई मलाल नहीं होता।