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महंगाई : लोहा-सीमेंट और रेत के दाम बढ़े

हितग्राहियों ने आवास बनाने से हाथ किए खड़े

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हितग्राहियों ने आवास बनाने से हाथ किए खड़े

हितग्राहियों ने आवास बनाने से हाथ किए खड़े

बैतूल. महंगाई की बढ़ती मार की वजह से गरीबों के लिए मकान बनाने का सपना मुश्किल होता नजर आ रहा है। यही नहीं नौकरीपेशा आम आदमी भी इस महंगाई में मकान बनाने से कतरा रहा है। कई हितग्राहियों ने तो प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि सरेंडर कर आवास बनाने से हाथ खड़े कर दिए हैं, क्योंकि महंगाई के दौर में योजना की निर्धारित राशि भी कम पड़ रही है। विगत दो से तीन महीनों में ही निर्माण सामग्री से लेकर लेबर चार्ज के दाम बढ़ गए हैं। वहीं जो हितग्राही आवास योजना के तहत मकान बना रहे हैं उनके आवास भी महीनों से अधूरे पड़े हैं, क्योंकि बढ़ती महंगाई के चलते हिग्राहियों के लिए छत डालना मुश्किल हो रहा है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए बैतूल नगरपालिका और बैतूलबाजार नगरपरिषद क्षेत्र में 17 हितग्राहियों ने आवास योजना स्वीकृत होने के बाद राशि सरेंडर कर दी है। बताया गया कि बैतूल आठवें चरण में 142 हितग्राहियों के आवेदन आवास योजना के लिए स्वीकृत किए गए थे। इनमें से पहली किस्त 131 हितग्राहियों के खाते में डाल दी गई, जबकि 10 हितग्राहियों ने मकान बनाने से मना करते हुए राशि सरेंडर कर दी। इसी प्रकार बैतूलबाजार नगर परिषद में तृतीय चरण में 250 हितग्राहियों को राशि जारी की गई थी, लेकिन इनमें से 7 हितग्राहियों ने राशि सरेंडर कर दी। वहीं 25 हितग्राहियों ने राशि मिलने के दो महीने बाद भी भवन निर्माण का काम शुरू नहीं किए जाने पर उन्हें नोटिस जारी किया गया है। नोटिस मिलने के बाद भवन निर्माण को लेकर पसोपेश में है।
ग्रामीण क्षेत्रों में योजना की हालत और भी खराब
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में आवास निर्माण के लिए हितग्राहियों को एक लाख २० हजार रुपए मिलते हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में आवास निर्माण के लिए 2.50 लाख रुपए दिए जाते हैं। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में राशि के इस अंतर को लेकर भी हितग्राहियों में नाराजगी देखी जा सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में अधूरे आवासों की संख्या ज्यादा है। महंगाई का असर तो शहर व गांव में एक सामान ही है, बल्कि ग्रामीणों को शहर से सामग्री लाने के लिए परिवहन में अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
लोहा-सीमेंट, रेत, ईंट के दाम बढ़े
पेट्रोल-डीजल में हुई वृद्धि का असर अब हर तरफ नजर आ रहा है। पेट्रोल-डीजल में हुई वृद्धि ने सभी चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं। सीमेंट 335 रुपए प्रति बोरी से बढक़र 400 रुपए बोरी पर पहुंच गई है। ६०० घनफीट रेत का डंपर 26 से 27 हजार रुपए में आ रहा है। ईंट के दाम भी 10 से 11 हजार रुपए प्रति ट्राली पर पहुंच गए हैं। 400 घन फीट गिट्टी का डंपर भी ११ हजार से अधिक में मिल रहा है। इनमें सबसे तेजी से लोहे के रेट बढ़ रहे हैं। दिन में तीन वक्त लोहे के रेट बदलते हैं। वर्तमान में लोहा 7700 से 8000 रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल तक पहुंच गए हैं।

ठेकेदरों ने मजदूरी की दरें भी बढ़ी
महंगाई की मार सामग्री क्रय करने तक ही सिमित नहीं है। बल्कि मजदूरी पर भी पड़ रही है। ठेकेदारों ने निर्माण की दरें बढ़ा दी है। लेबर चार्ज में भी दस फीसदी की बढ़ोत्तरी हो गई है। बताया गया कि ठेकेदार 150 से 180 रुपए प्रति स्क्वेयर फीट का चार्ज वसूल रहे हैं। जिसके कारण आवास बनाने का सपना गरीबों के लिए महंगा साबित हो रहा है। आवास योजना के चक्कर में कई हितग्राही तो कर्जदार तक बन चुके हैं, क्योंकि योजना के तहत तीन चरणों में राशि जारी होती है। जब तक स्ट्रेक्चर निर्धारित मापदंड के अनुसार पूरा नहीं हो जाता है राशि जारी नहीं की जाती है।
निर्माण सामग्री की कीमतें बढ़ी
रेत 600 घनफीट 23000, 26000
गिट्टी 400 घनफीट 7000, 10000
सीमेंट एक बोरी 335-400
लोहा प्रति ङ्क्षक्वटल 6500-8000
ठेकेदार प्रति स्क्वेयर मी. 130-150-180