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कंडम बसों में जान-जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर यात्री

- खरगोन की घटना के बाद भी अधिकारी नहीं ले रहे हैं सबक, जिले में चल रही खटारा बसों पर नहीं लग रही रोक

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कंडम बसों में जान-जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर यात्री

हरदा. स्थानीय बस स्टैंड पर खड़ी पुरानी बस।

हरदा. प्रदेश के खरगोन जिले में हुए बस हादसे में 25 लोगों की मौत के बाद भी प्रशासन अथवा जिला परिवहन विभाग नहीं जागा है। शहर में आज भी कंडम बसों का संचालन बदस्तूर जारी है, जिनमें नियमों के तहत सुविधाएं नहीं हैं, वहीं यात्रियों के बैठने के लिए ठीक ढंग की कुर्सियां तक नहीं हैं। इसके अलावा बसों के अव्यवस्थित स्टेयरिंग एवं दरवाजे सड़ गए हैं। बसों की इमरजेंसी खिड़की भी टूटी-फूटी हालत में हें। ऐसी खटारा बसों में लोग जान-जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हो रहे हैं। पत्रिका ने शहर के बस स्टैंड पर कुछ बसों का स्कैन किया, जिनमें कई खामियां मिली।
दृश्य एक - अग्निशमन यंत्र गायब मिला, इमरजेंसी खिड़की टूटी
फोटो कैप्शन : एचआर 1222 हरदा. बस के गैर को सीट कवर से ढककर रखा गया।
शहर के सुभाषचंद्र बोस बस स्टैंड से प्रतिदिन 150 से अधिक बसें इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, खंडवा, बैतूल, देवास, नसरुल्लागंज, सीहोर सहित अन्य शहरों में आना-जाना करती हैं। इसके अलावा स्थानीय तहसील मुख्यालयों और गांवों तक बसों का आवागमन होता है। दोपहर 1.45 बजे देड़तलाई से हरदा चलने वाली बस का जायजा लिया। इसका स्टेयरिंग तो ठीक मिला, लेकिन गैर लगाने वाली जगह पर तार और रस्सी बंधी मिली। इसके अलावा ड्राइवर सीट के ऊपर वायरिंग खुली पड़ी हुई थी। फर्स्ट एड बॉक्स लगा था, लेकिन आग बुझाने का अग्निशमन यंत्र गायब मिला। यात्रियों की सीट के ऊपर भी वायर लटके हुए थे। कुर्सी की गद्दी भी फटी हुई थी। बस का इमरजेंसी खिड़की का हैंडल टूटा हुआ था और उसे पतली वाली रस्सी से बांधकर रखा गया था। अगर कोई हादसा हो जाए तो यात्रियों को रस्सी खोलना पड़ेगी तब जाकर इमरजेंसी गेट खुल पाएगा।
दृश्य दो - काम चलाऊ स्टेयरिंग से चल रही बस
फोटो कैप्शन : एचआर 1223 हरदा. बस में इस तरह से लगाए गए स्टेयरिंग से चल रही बस।
दोपहर 2.07 बजे इंदौर से सिराली जाने वाली बस जहां जगह-जगह से जर्जर हो गई है। वहीं इसका स्टेयरिंग भी काम चलाऊ लगा हुआ है। क्षतिग्रस्त हालत में लगे इस स्टेयरिंग के टूटे हिस्सों को टेप से चिपकाया गया, गैर को भी सीट से कवर कर बैठने के लिए जगह बनाई गई। किसी को चोंट लग जाए तो बस में प्राथमिक उपचार वाला फर्स्ट एड बॉक्स का भी नदारद मिला। वहीं आग बुझाने के संसाधन भी उपलब्ध नहीं मिले। बस में लगी टीन की बॉडी भी क्षतिग्रस्त होकर टूट गई है। बस के आगे और पीछे लगे दरवाजे के टीन के पतरे भी बाहर निकले हुए हैं, जिनसे लोगों के पैरों में चोंट लगने की आशंका है। बस में लगी खिड़कियां के कांच भी खराब हालत में हैं। यात्रियों के लगी कुर्सियां भी जगह-जगह से फट चुकी हैं। यात्रियों को जान-जोखिम में डालकर यात्रा करना पड़ रहा है।
इनका कहना है
मेरे द्वारा बसों की प्रतिदिन जांच की जा रही है, जिनमें कमियां मिल रही हैं, उनके चालान काटे जा रहे हैं। गुरुवार को भी बसों पर जुर्माने की कार्रवाई की गई हैं। मैं शुक्रवार को फिर से बस स्टैंड पर जाकर बसों की सघन जांच की जाएगी।
निशा चौहान, आरटीओ, हरदा