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दूसरे दिन खंगाले रिकार्ड, देखा नक्शा, माइंस पुरानी होने से नहीं मिल रही सही जानकारी

बाघिनकुंड खदान के मुहाने का स्लैब धंसने का मामला, रिजेक्ट कोल से लेबल किया मैदान

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बेतुल

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Pradeep Sahu

Jul 21, 2018

sarni mines latest news

दूसरे दिन खंगाले रिकार्ड, देखा नक्शा, माइंस पुरानी होने से नहीं मिल रही सही जानकारी

सारनी. पाथाखेड़ा की बंद बाघिनकुंड खदान के मुहाने का स्लैब धंसने का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा। शुक्रवार अलसुबह उसी स्थान पर जमीन का कुछ हिस्सा धंस गया। वेकोलि प्रबंधन ने समय रहते धंसने वाले हिस्से को रिजेक्टर कोल और मिट्टी से लेबल कर दिया। संभावित क्षेत्र में फेसिंग कर सुरक्षा गार्ड तैनात किया है ताकि स्कूली बच्चे और आसपास के लोग जमीन धंसने वाले स्थान तक नहीं पहुंच सके। वेकोलि के आलाअफसर यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि बाघिनकुंड खदान पाथाखेड़ा में कब खुली थी। मुहाने से खदान की लंबाई कितनी है। कहां से कोयला निकाला गया। मुहाने का स्लैब सीमेंट-कांक्रीट का है या पत्थर का। यह सब जानने संबंधित विभाग के अधिकारी नक्शा देखकर रिकार्ड खंगाल रहे हैं। शुक्रवार को वेकोलि अधिकारियों द्वारा बंद खदान के मुहाने से लेकर समीपस्थ पहाड़ी क्षेत्र का निरीक्षण कर खदान की जानकारी जुटाई गई।
स्कूल है चिंता का कारण - जिस स्थान पर वर्षों पुरानी खदान का हिस्सा धंस रहा है। वह आजाक शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक शाला का प्रांगण है। यहां प्राइमरी में 120 और मीडिल में 206 छात्र, छात्राएं अध्ययनरत है। इसको लेकर स्कूल और वेकोलि प्रबंधन चिंतित है। फिलहाल कक्षाएं तो वहीं लग रही है। लेकिन जांच में स्थिति चिंताजनक साबित होती है तो स्थान बदलने से इंकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि वेकोलि महाप्रबंधक उदय कावले द्वारा शुक्रवार को इसी मुददे को लेकर जेसीसी की बैठक ली गई।

1998 में धंसा था एक हिस्सा - बाघिनकुंड खदान अब बाघिनकुंड स्कूल के नाम से जानी जाती है। यहां के शिक्षक निर्भय सिंह शिवड़े बताते हैं कि वर्ष 1998 में माध्यमिक शाला भवन के पिछला हिस्सा 10 फीट गहराई तक धंस गया था। जिसे भी रिजेक्ट कोल, पत्थर और मिट्टी से भरा गया है। 20 साल बाद खदान के मुहाने का स्लैब धंसा है। हालांकि दोनों घटनाओं में कोई हताहत नहीं हुई। बार-बार जमीन धंसने की घटनाओं से वेकोलि प्रबंधन चिंतित है और स्थान को सुरक्षित करने में जुटी है।

पहले भी धंस चुकी जमीन - डब्ल्यूसीएल क्षेत्र में जमीन धंसना कोई नई बात नहीं है। भूमिगत खदान से कोयला निकालने के चलते जमीन खोखली हो गई है। बरसात के दिनों में कंपन्न और बादल गरजने के दौरान जमीन धंसने की खबर सामने आती है। छतरपुर, शोभापुर पंचायत के गांवों, जंगलों और पाथाखेड़ा के आसपास जमीन धंसने, दरारे पडऩे से वेकोलि प्रबंधन भलीभांति अवगत है।