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दो भाइयों पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपियों को सात वर्ष का कारावास

- प्रकरण में शामिल दो आरोपियों को एक-एक साल की सजा सुनाई

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दो भाइयों पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपियों को सात वर्ष का कारावास

न्यायालय ने मंगलवार को एक-एक साल की सजा सुनाई।

हरदा. दो भाइयों के सिर में हथोड़ा और लोहे की टामी से जानलेवा हमला करने वाले दो आरोपियों को सात वर्ष का कारावास तथा दो आरोपियों को न्यायालय ने मंगलवार को एक-एक साल की सजा सुनाई। साथ ही हजारों रुपए का अर्थदंड भी अधिरोपित किया। जिला लोक अभियोजन अधिकारी आशाराम रोहित एवं अतिरिक्त लोक अभियोजक विपिन सोनकर ने बताया कि रहटगांव थाना अंतर्गत आने वाले मगरधा गांव में 12 जून 2020 की दोपहर करीब 3 बजे रमेशचंद्र मीणा का छोटा भाई अखिलेश गांव के अनवर की दुकान पर गया था। जहां उसने अल्ताफ से कहा कि उसके भाई रमेश मीणा 11 जून को उसके पिता अनवर से बोला था कि तुम रोड पर ट्रैक्टर खड़ा करके पंचर जोड़ते हो, जिससे जाम लगता है। इस बात पर अल्ताफ ने बहस की थी। जिस पर अखिलेश ने अल्ताफ से कहा कि पिताजी से बहस क्यों की थी। इसी दौरान अल्ताफ का चाचा रफीक आ गया। वह अखिलेश को गालियां देने लगा, तभी अल्ताफ ने उसकी दुकान से लोहे का हथोड़ा उठाकर अखिलेश के सिर में मार दिया। वह अखिलेश को बचाने के लिए गए तो रफीक ने उनके भी सिर पर हथोड़ा मारा। फिर घर में से कादिर व अनवर आ गए। जिन्होंने भी लात-घूसों से मारपीट की। इस दौरान उन्हें बचाने के लिए महेश मीणा आया तो उसे भी आमीन एवं अल्ताफ के जीजा ने लोहे की टामी से सिर में मारा, जिससे उनके सिर में गंभीर चोंटे आईं। फरियादी की रिपोर्ट पर रहटगांव पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रयास सहित अन्य धाराओं में मामला कायम कर चालान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। अभियोजन कार्यवाही में एडीपीओ विनोद अहिरवार एवं साक्षी सहायता केंद्र प्रभारी दुर्गाप्रसाद धुर्वे ने सहयोग किया। अभियोजन के तर्कों से सहमत होकर न्यायालय ने आरोपी रफीक शाह पिता नजीर शाह (42 वर्ष), अल्ताफ उर्फ आफताब पिता अनवर शाह (19 वर्ष) को धारा 307, 34 में दोषी पाते हुए 7 वर्ष का सश्रम कारावास व दो-दो हजार रुपए का अर्थदंड तथा धारा 323 में एक वर्ष का सश्रम कारावास व एक-एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं आरोपी आमीन पिता मुजफ्फर शाह (29 वर्ष), गफ्फार पिता खैराती शाह (29 वर्ष) को धारा 323 में एक-एक वर्ष का साधारण कारावास व एक-एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया।