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आधार कार्ड से दिल्ली में सिम लेकर ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग में किया उपयोग

The cyber fraudsters claimed that he had an account with Canara Bank in Bombay, with 3 crore rupees in it. An ATM card was found with Sadakatha Khan.

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बैतूल। आधार कार्ड से दिल्ली में एक सिम लेकर ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग में इसका उपयोग किया है। दिल्ली में आपके खिलाफ क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज है। गिरफ्तारी से बचाने व खातों की जांच के नाम पर रिटायर्ड बैंककर्मी से साइबर ठगों ने 23.50 लाख रुपए की ठगी की। दिल्ली पुलिस बनकर साइबर ठगों ने किया वाट्सएप कॉल किया और रिटायर्ड बैंककर्मी को चार दिन रखा डिजिटल अरेस्ट भी रखा। मामला सामने आने पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों पर केस दर्ज किया है।
पुलिस के मुताबिक फरियादी बसंत कुमार मैदमवार(80) निवासी विनायक रेसिडेंसी, ऑयल मिल के पास बैतूल जो कि एसबीआई बैंक से हेड कैशियर पद से सेवानिवृत्त है। बसंत कुमार ने बताया 27 नवंबर 2025 को उनके मोबाइल पर एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया, जिसकी स्क्रीन पर दिल्ली पुलिस लिखा हुआ था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि फरियादी के आधार कार्ड से दिल्ली में एक सिम कार्ड लिया गया है, जिसका उपयोग ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। साथ ही यह भी बताया गया कि उनके विरुद्ध दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज है। उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया गया है। साइबर ठगों द्वारा लगातार व्हाट्सएप कॉल कर फरियादी को मानसिक रूप से भयभीत किया गया और गिरफ्तारी से बचाने व खातों की जांच के नाम पर राशि ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। डर के कारण फरियादी ने 1 दिसंबर 2025 को अपने एसबीआई खाते से 13.50 लाख यस बैंक के खाते में और 10 लाख फिनो बैंक के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से 23.50 लाख ट्रांसफर कर दिए।
साइबर ठगों ने मांगे थे 30 लाख
साइबर ठगों ने ने कहा कि बॉम्बे की केनरा बैंक में आपका एकाउंट है,उसमें तीन करोड़ रुपए हैं। सदाकथा खान के पास से एटीएम कार्ड मिला है। उसने बताया कि दस प्रतिशत राशि 30 लाख आपको दी है। इस राशि को वेरीफाय करना है। ये उसके है कि नहीं इसकी जांच के लिए आपको 30 लाख रुपए देना होगा। मुंबई और दिल्ली के खाते में राशि डालनी होगी। तीन दिन बाद राशि वापस की जाएगी। राशि कम होने पर गोल्ड लोन लेने के लिए कहा।
चार दिन रखा डिजिटल अरेस्ट
गंज थाना प्रभारी सैफा हाशमी ने बताया कि बसंत कुमार नागपुर में अपना इलाज करा रहे थे। इस दौरान ही साइबर ठगों का फोन आया था। उन्होंने बसंत कुमार को तीन से चार दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा। पीडि़त ने परिवार में किसी को नहीं बताया।
16 लाख देने गोल्ड लोन लेने पहुंचे बैंक
ठगों द्वारा पीडि़त से 16 लाख रुपए मांग की जा रही थी। जिसके लिए बसंत कुमार 02 दिसंबर 2025 को गोल्ड लोन लेने एसबीआई बैंक पहुंचे। इस दौरान भी साइबर ठगों की कॉल चल रही थी। जिससे बंैंक प्रबंधक को साइबर ठगी का अहसास हुआ। प्रबंधक के पूछने पर पीडि़त ने पूरी कहानी बता दी। प्रबंधक ने ही पुलिस को सूचना दी। इसके पश्चात पुलिस ने फरियादी से साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई। जिससे खाता होल्ड होने पर 4.50 लाख रुपए बच गए।
पुलिस कर रही आरोपियों की तलाश
जांच के बाद थाना गंज में धारा 318(4), 308 बीएनएस के तहत अज्ञात आरोपी पर केस दर्ज कर जांच शुरू की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना गंज पुलिस द्वारा साइबर अपराध से संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।
सारनी में वृद्ध को 75 लाख की ठगी से बचाया
थाना सारनी पुलिस द्वारा विगत माह 3 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहे वृद्ध को 75 लाख रुपए की साइबर ठगी होने से बचाया गया था। पुलिस के मुताबिक विगत वर्ष देशभर में लगभग 20 लाख से अधिक साइबर ठगी के प्रकरण दर्ज हुए हैं, जिनमें करीब 33,000 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी हुई है।