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बैतूल।कृषि विभाग ने जिले भर
में पीला मोजेक से प्रभावित फसलों के सर्वे के बाद प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी
है। इस रिपोर्ट में फसलों की तबाही का मंजर साफ नजर आ रहा है। जिले में 1 लाख 84
हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पीला मोजेक से सोयाबीन फसल बर्बाद होना सामने
आया है।
प्रभावित गांवों की संख्या 1149 के करीब बताई जाती है। वैसे
विभाग द्वारा क्षति का जो अनुमानित मूल्य आंकलन किया गया है वह 516 करोड़ बताया
जाता है। जबकि आरबीसी 6-4 के मापदंडों के अनुरूप सहायता राशि वितरण के लिए 102
करोड़ रूपए की मांग की गई है।
मुलताई ब्लॉक सर्वाधिक
प्रभावित
फसल पर पीला मोजेक बीमारी की सबसे ज्यादा मार मुलताई ब्लॉक में
पड़ी है। यहां 260 गांव इस बीमारी की चपेट में बताए जाते हैं। वहीं बैतूल जिले के
180 गांव, भैंसदेही के 178, शाहपुर के 107, आमला के 155, घोड़ाडोंगरी के 86, आठनेर
के 102 और चिचोली ब्लॉक के 81 गांव प्रभावित है।
पौने दो लाख हेक्टेयर में
नुकसान
जिले में पीला मोजेक से 1 लाख 84 हजार 632 हेक्टेयर क्षेत्र में
फसल प्रभावित होना बताया गया है। जबकि खरीफ सीजन में जिले में कुल बोवनी 3 लाख 48
हजार 775 हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है। इस हिसाब से जिले की आधी फसल पीला मोजेक
रोग की भेंट चढ़ गई है। 25 से 33 प्रतिशत की श्रेणी में 1 लाख 18 हजार 36 किसानों
की 87 हजार 97 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। 33 प्रतिशत से अधिक की श्रेणी में
25 हजार 496 किसानों की 23 हजार 942 हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है।
यह
लघु एवं सीमांत किसानों के फसलों की स्थिति है। अन्य किसानों में 25 से 33 प्रतिशत
की श्रेणी में प्रभावित कृषकों की संख्या 35 हजार 816 है जिनकी 58 हजार 609
हेक्टेयर में फसल नुकसान हुई है। इसी प्रकार 33 प्रतिशत से अधिक की श्रेणी में
कृषकों की संख्या 13 हजार 75 बताई जाती है जिनकी प्रभावित फसल का रकबा 14 हजार
984हेक्टेयर है।
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