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भदोही नाम विवाद पर मायावती का हमला: बोलीं- नाम बदलना नहीं, नीयत बदलना जरूरी; भाजपा-सपा पर साधा निशाना

BJP SP Political Attack: बसपा सुप्रीमो मायावती ने भदोही का नाम दोबारा संत रविदास नगर न किए जाने पर भाजपा और सपा पर तीखा हमला किया है।

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भदोही

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Mohd Danish

Feb 01, 2026

mayawati attack bjp sp bhadohi name issue

भदोही नाम विवाद पर मायावती का हमला | Image - X/@Mayawati

Mayawati Bhadohi Name Controversy: बसपा सुप्रीमो मायावती ने भदोही जिले का नाम दोबारा संत रविदास नगर नहीं किए जाने को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दोनों दलों पर जातिवादी सोच और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित होकर फैसले लेने का आरोप लगाया है।

संत रविदास जयंती के मौके पर जारी अपने बयान में मायावती ने कहा कि यह मुद्दा केवल नाम परिवर्तन का नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और दलित-पिछड़े वर्गों की अस्मिता से जुड़ा हुआ है।

जयंती पर दिखावा या सच्ची श्रद्धा?

मायावती ने कहा कि भाजपा और सपा जैसी पार्टियां संत रविदास जैसे महापुरुषों के नाम पर केवल दिखावटी आयोजन करती हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर उनके अनुयायियों की समस्याओं और सम्मान को लेकर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने इन दलों के कार्यक्रमों को “नाटकबाजी” करार देते हुए कहा कि यह सब सिर्फ वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है।

उपेक्षा के इतिहास पर सीधा आरोप

अपने बयान में बसपा प्रमुख ने कांग्रेस और भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों का इतिहास दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के संतों, गुरुओं और महापुरुषों की उपेक्षा और तिरस्कार से भरा रहा है। उनके अनुसार, जब बसपा का उदय नहीं हुआ था, तब तक इन वर्गों की आवाज़ को सत्ता के गलियारों में गंभीरता से नहीं सुना जाता था।

वोट की राजनीति बनाम सामाजिक न्याय

मायावती ने यह भी कहा कि बसपा की स्थापना के बाद से ही अन्य राजनीतिक दल इन वर्गों के वोटों को साधने के लिए संतों और महापुरुषों की जयंती मनाने लगे हैं। लेकिन उनके अनुयायियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि दिखावे और असल नीति के बीच फर्क को समझना जरूरी है।

सरकार बदली, सोच नहीं बदली

भदोही जिले के नाम परिवर्तन के मुद्दे पर बोलते हुए मायावती ने बताया कि बसपा सरकार के दौरान बिना किसी विशेष मांग के भदोही को जिला मुख्यालय का दर्जा सुरक्षित रखते हुए नया संत रविदास जिला बनाया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में सपा सरकार ने इसे राजनीतिक द्वेष और जातिवादी सोच के कारण बदल दिया। वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा नाम बहाल न किए जाने को उन्होंने “दुखद” और “निराशाजनक” करार दिया।

विकास के काम, केवल घोषणाएं नहीं

बसपा प्रमुख ने अपनी सरकार के दौरान किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वाराणसी में संत रविदास की जन्मभूमि पर उनकी प्रतिमा की स्थापना, उनके नाम पर पार्क और घाट का निर्माण, फैजाबाद में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना, संत रविदास सम्मान पुरस्कार की शुरुआत, पॉलिटेक्निक और एससी-एसटी प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना जैसे कई कार्य बिना किसी दबाव या मांग के किए गए थे।

संत के संदेश पर राजनीति नहीं, प्रतिबद्धता चाहिए

मायावती ने अंत में कहा कि संत रविदास की शिक्षाएं सामाजिक समानता और भाईचारे का संदेश देती हैं और राजनीतिक दलों को उनके नाम का इस्तेमाल केवल चुनावी लाभ के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक बदलाव के लिए करना चाहिए। उन्होंने जनता से अपील की कि वे नेताओं के वादों और कार्यों के बीच अंतर को पहचानें और सोच-समझकर अपना निर्णय लें।

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