
New Parliament of India
New Parliament of India : कालीन नगरी के नाम से पूरे विश्व में विख्यात भदोही जनपद की हस्तनिर्मित कालीन आज उद्घाटित होने वाले नए संसद भवन की शोभा बढ़ाएंगी। देश की एकता और अंखण्डता का प्रतिक सेन्ट्रल विस्टा (नया संसद भवन) प्रधानमंत्री आज देश को समर्पित करेंगे। ऐसे में भदोही की कालीन भी भारत के इतिहास में एक बार फिर अमर हो जाएगी। गोपीगंज की कालीन कंपनी ने 348 पीस हैंड नॉटेड कारपेट सेन्ट्रल विस्टा के लिए भेजी है जिन्हे गोल आकार में लगाया गया है।
सेन्ट्रल विस्टा में चार-चांद लगाएगी हैंडमेड कार्पेट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब से कुछ देर बाद देश की अखंडता और एकता के प्रतिक सेन्ट्रल विस्टा यानी नए संसद भवन को देश को समर्पित करेंगे। इस सेन्ट्रल विस्टा की चमक में चार-चांद लगाएगी भदोही की हस्तनिर्मित कालीन। यह भदोही की परम्परागत कालीन है और इसे जीआई टैग भी प्राप्त है। इस कालीन की इसमें सभी काम हाथ से होता है। इसमें किसी भी प्रकार की मशीन का इस्तेमाल नहीं होता। इसलिए यह काफी महंगी और लाजवाब होती है।
1400 कालीन बुनकरों ने किया है तैयार
गोपीगंज की ओबीटी कालीन कंपनी के अध्यक्ष आईबी सिंह ने बताया कि कालीन के लिए हमें अक्टूबर 2021 में ऑर्डर मिला था। इसके बाद 1400 पारंपरिक कालीन बुनकरों ने 6 महीने में 348 कालीन तैयार की है जिन्हे नए संसद भवन में लगाया गया है। इसके लिए भदोही से 25 दक्ष कारीगर भेजे गए हैं, जिन्होंने इसे संसद भवन में सेट किया है।
एक इंच में 120 गांठ, चलेगी 100 साल
इसे पूरे काम को अपने सुपरविजन में करवाने वाले कंपनी के प्रोडक्शन मैनेजर सुधीर राय के अनुसार कालीन के एक इंच में 120 गांठें लगी हुई हैं। यह कालीन हाई क्वालिटी से तैयार किया गया है। इसकी उम्र 100 वर्ष है जो कि एक अनुमान यही यह उससे जयदा भी चल सकती है।उन्होंने बताया कि इन कालीनों की मांग सबसे अधिक अमेरिका में होती है।
मई 2022 में ही दिल्ली पहुंच गई थीं कार्पेट
ओबीटी कालीन कंपनी के अध्यक्ष आईबी सिंह के अनुसार हमसे सात महीने के अंदर 6 हजार मीटर कवर करने के लिए कालीन की मांग की गई थी। यह कुल 348 पीस कालीन से संभव हुआ है। हमने मई 2022 में ही कालीन को दिल्ली भेज दिया था। सेंट्रल विस्टा के लोक सभा और राज्य सभा दोनों सदनों में कालीन की फीडिंग के लिए यहां से श्रमिकों को भेजा गया था। यह काम भी पूरा हो गया है।
क्या है हैंड नॉटेड कालीन
हैंड नाटेड (हस्त निर्मित) परंपरागत कालीन है। कच्चे माल से लेकर इसकी बुनाई तक की कारीगरी बुनकरों के हाथों से होती है। केवल हाथ से बने होने के कारण यह सामान्य कालीनों के मुकाबले महंगे होते हैं। इसकी गुणवत्ता बेहतर होती है। इसे दूर से देखकर ही पहचाना जा सकता है। देश भर के कालीन उत्पादन का लगभग चालीस प्रतिशत कालीन अकेले भदोही जिले में ही होता है।
Published on:
28 May 2023 09:19 am
बड़ी खबरें
View Allभदोही
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
