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सपा जिलाध्यक्ष आरिफ सिद्दीकी बोले, मुझे चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है

सपा जिलाध्यक्ष आरिफ सिद्दीकी ने भदोही नगर पालिका आरक्षण को बताया गलत, कहा आंकड़ों में हेराफेरी कर मुझे चुनाव लड़ने से रोकना चाहती है योगी सरकार।
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Arif Siddiqui

आरिफ सिद्दीकी

भदोही. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा भदोही नगर पालिका सीट को आरक्षित किये जाने के बाद समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष आरिफ सिद्दीकी ने इस आरक्षण को गलत ठहराते हुए पूर्व की तरह सीट को सामान्य किये जाने की मांग की है। उनका आरोप है कि भाजपा नही चाहती थी कि आरिफ सिद्दीकी चुनाव लड़े इसलिए प्रशासन द्वारा रैपिड सर्वे के आंकड़ो में बड़े पैमाने पर हेरा-फेरी की गई है। उन्होंने राज्यपाल व मुख्यमंत्री को सम्बोधित आपत्ति से सम्बंधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।

गौरतलब हो कि जिलाध्यक्ष आरिफ सिद्दीकी की पत्नी महलका सिद्दीकी भदोही नगर पालिका की अध्यक्ष हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निकाय चुनावों को लेकर जारी की गई आरक्षण सूची के बाद तमाम दिग्गजों को झटका लगा है वहीं अब जारी की गई आरक्षण सूची पर दिग्गजों द्वारा सवाल भी खड़ा किया जाने लगा है। ऐसा ही मामला भदोही नगर पालिका को लेकर सामने आया है जहां पिछले चुनाव में यह सीट सामान्य महिला की थी जिसे इस बार पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है। यहां से सपा जिलाध्यक्ष आरिफ सिद्दीकी की पत्नी महलका सिद्दीकी अध्यक्ष है जो सीट पिछड़ी होने के बाद चुनाव नही लड़ सकेंगी। अब इसे लेकर जिलाध्यक्ष आरिफ सिद्दीकी ने आरक्षण पर सवाल खड़ा कर दिया है।

उनका आरोप है कि विपक्षी नही चाहते कि हम चुनाव लड़कर जीत जाय इसलिए आंकड़ो में हेराफेरी कर सीट को सामान्य से आरक्षित कर दिया गया। पत्रकार वार्ता में उन्होंने एक आंकड़ा पेश करते हुए दावा किया कि अप्रैल 2017 में प्रशासन द्वारा किये गए रैपिड सर्वे में पिछड़ों की जनसंख्या 57 फीसदी दर्ज की गई जबकि जून 2017 में किये सर्वे में यह संख्या बढ़कर 68.30 फीसदी हो गयी। एक माह में ही दस हजार से अधिक संख्या बढ़ जाना यह बताता है कि आंकड़ो में जमकर हेराफेरी की गई है। जबकि जिले के अन्य निकायों में मामूली बढोत्तरी और घटोत्तरी हुई है। आरोप है कि 2001 से 2017 तक के बीच पालिका की जनसंख्या 20 हजार बढ़ी तो पिछड़ो की संख्या 36 हजार कैसे बढ गयी।

इन्ही सब आपत्तियों के साथ जिलाध्यक्ष आरिफ सिद्दीकी ने जिलाधिकारी को पत्रक सौंप कर सही आंकड़ो के मुताबिक सीट की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। वार्ता के दौरान पूछे गए सवाल कि आप आश्वस्त थे कि आपको आपको या आपके पत्नी को ही टिकट मिलेगा तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि टिकट देना पार्टी का फैसला है। अगर पार्टी चुनाव लड़ने के लिए कहती तो उनकी तैयारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी सीटों पर पार्टी से चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन जमा कर सकते हैं जिसपर अंतिम फैसला पार्टी का होगा।

by MAHESH JAISWAL