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सीतामढ़ी: त्रेतायुग का साक्षी है यह स्थल, मां सीता धरती में हुई थी समाहित

यही वो जगह है जहां मान्यता के अनुसार आदिकवि महर्षि वाल्मिकी का आश्रम था और लव-कुश का जन्म भी यहीं हुआ था।

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Sitamadhi bhadohi

सीतामढ़ी भदोही

उत्तर प्रदेश के जिलो में अनेक प्राचीन मंदिर और पौराणिक धार्मिक स्थल मौजूद हैं। यूपी में कई ऐसे पौराणिक धार्मिक स्थल हैं जिनका अपना महत्व है। भदोही जिले के सीतामढ़ी में पड़ने वाला सीता समाहित स्थल ऐसा ही एक प्राचीन और पौराणिक स्थल है। यही वो जगह है जहां मान्यता के अनुसार आदिकवि महर्षि वाल्मिकी का आश्रम था और लव-कुश का जन्म भी यहीं हुआ था।


ऐसी मान्यता है कि काशी और प्रयाग के मध्य सीतामढ़ी में ही महर्षि वाल्मिकी की तपोस्थली और माता सीता का समाहित स्थल है। इसी जगह पर महर्षि वाल्मिकी आश्रम बनाकर रहते थे। भगवान राम ने जब माता सीता का परित्याग कर दिया तो माता सीता भी यहीं आकर महर्षि वाल्मिकी के आश्रम में रहा करती थीं। अषाढ़ की अष्टमी के दिन लव और कुश का जन्म भी यहीं हुआ था, ऐसी मान्यता है। इसके अलावा जब भगवान राम ने अश्वमेघ यज्ञ किया था तो यज्ञ के घोड़े को लव-कश ने यहीं पकड़कर बांध लिया था। बजरंग बली को लव और कुश ने यहीं बंधक बनाया था। इसी जगह माता सीता धरती में समा गयी थीं।

सीतामढ़ी में सीता समाहित स्थल पर माता सीता का भव्य मंदिर बना है। गंगा किनारे जहां लव-कुश की प्रतिमा स्थापित है, कहा जाता है कि वहीं महर्षि वाल्मिकी का आश्रम है। सीतामढ़ी में बजरंगबली की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा लगवायी गयी है। ऐसी मान्यता है कि इसी जगह पर लव-कुश ने बजरंगबली को बंधक बनाया था। सीतामढ़ी में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं माता सीता के दर्शन और पूजन के साथ यहां भजन-कीर्तन करते हैं।

कैसे पहुंचे :
यह मंदिर इलाहाबाद और वाराणसी के मध्य स्थित जंगीगंज बाज़ार से 11 किलोमीटर गंगा के किनारे स्थित है । वाराणसी इलाहाबाद एनएच- 2 पर जंगीगंज बाजार के रास्ते यहां पहुंच सकते हैं । वाराणसी से इस जगह की दूरी 75 किलोमीटर जबकि इलाहाबाद से दूरी 70 किलोमीटर है । नजदीकी रेलवे स्टेशन भदोही का ज्ञानपुर रोड है, जो वाराणसी-प्रयागराज रूट पर पड़ता है, इस रूट की कई महत्वपूर्ण गाड़ियों का यहां ठहराव भी है, जबकि नजदीकी हवाई अड्डा भी वाराणसी और इलाहाबाद में है ।

कहां रूकें:
सीतामढ़ी जाकर दर्शन करने के बाद वहां ठहरने के लिये मंदिर ट्रस्ट की ओर से वहीं एक आलीशान होटल भी बनाया गया है, जहां सामान्य दर पर एसी कमरे भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा भदोही शहर में कई होटल हैं जहां ठहरा जा सकता है। वाराणसी या प्रयागराज में रुककर भी निजी वाहन या बस से दर्शन कर वापस लौटा जा सकता है।