अफगानिस्तान में भारत ने एक मानवीय पहल के तहत “जयपुर फुट” शिविर आयोजित किया। इस अभियान का मकसद था उन लोगों की मदद करना, जिन्होंने युद्ध, पोलियो या गरीबी की वजह से अपने हाथ-पैर खो दिए। यह शिविर काबुल में लगाया गया, जहां भारत की तरफ से भेजे गए डॉक्टरों ने लगभग 75 लोगों को कृत्रिम अंग लगाए।
यह पहल “इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी” कार्यक्रम के तहत की गई, जिसे भारत सरकार ने शुरू किया है। इस कार्यक्रम को जयपुर के भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति यानी BMVSS ने आगे बढ़ाया। BMVSS वही संस्था है जो दुनियाभर में “जयपुर फुट” के लिए जानी जाती है।
पांच दिन तक चले इस शिविर में स्थानीय लोगों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली। जिन लोगों को कृत्रिम पैर या हाथ लगाए गए, उनके चेहरे पर राहत और उम्मीद साफ नजर आई। दसकों से चले आ रहे युद्ध और बारूदी सुरंगों की वजह से अफगानिस्तान में विकलांगता एक गंभीर समस्या बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान के पुनर्वास केंद्रों में करीब 1.47 लाख मरीज पंजीकृत हैं, और हर साल करीब 9,000 नए मामले सामने आते हैं।
भारत की इस मदद को तालिबान ने भी सराहा है। तालिबान की ओर से बताया गया कि डॉक्टर साहिब अहरार और अन्य अधिकारियों की मदद से भारतीय डॉक्टरों ने काबुल में 100 विकलांग लोगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए। हालांकि, तालिबान ने यह भी कहा कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग हैं जिन्हें इस तरह की सहायता की जरूरत है। इसलिए इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
इस पूरी पहल का उद्देश्य न केवल शारीरिक स्वतंत्रता देना है, बल्कि आत्मसम्मान और बेहतर जीवन की ओर एक कदम बढ़ाना भी है। भारत की यह मानवीय कोशिश अफगान जनता के साथ एकजुटता का प्रतीक बन गई है।