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खुद का घर नहीं बसा सकते, पर 100 जोड़ों का बसाया परिवार

-शादी में अर्चन बनी आर्थिक तंगी ने ली एक ही समाज की तीन बेटियों की जान तो नीतू मौसी ने उठाया महादान का बीड़ा- 10वां सामूहिक विवाह सम्मेलन 23 को

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खुद का घर नहीं बसा सकते, पर 100 जोड़ों का बसाया परिवार

खुद का घर नहीं बसा सकते, पर 100 जोड़ों का बसाया परिवार

भरतपुर. हिंदू शास्त्रों में कन्यादान को महादान बताया गया है। मगर वर्तमान में दहेज प्रथा को बढ़ावा मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोग कन्या भ्रूण जैसा महापाप करने पर मजबूर हो गए। जिसे गौ हत्या से भी बड़ा पाप माना गया है। समाज में कन्या भ्रूण हत्या के मामले बढ़ते जा रहे है। इसके फलस्वरूप हमारा समाज पुरुष प्रधान बनकर रह गया है लेकिन इसमें एक समाज ऐसा भी है जो समाज में रहते हुए भी समाज से अलग ही जीवन जीता है, वह है किन्नर समाज। शहर के किन्नर समाज की मुखिया हैं नीतू मौसी जो हर वर्ष सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन कर सर्व समाज की 10 कन्याओं का विवाह कराती है। इस बार भी 23 नवम्बर को नीतू मौसी 10वां सामूहिक विवाह सम्मेलन पाई बाग स्थित अभिनंदन मैरिज में आयोजित करने जा रही हैं। इस वर्ष के सम्मेलन में आर्थिक तंगी से जूझ रहीं सौ बेटियों के विवाह कराने का उनका संकल्प जिजमानों के सहयोग से पूरा हो जाएगा। हर वर्ष विवाह सम्मेलन में नीतू मौसी सभी जोड़ों को पूरा वैवाहिक सामान दान के रूप में देती है जिसमें सोने-चांदी के आभूषण से लेकर फर्नीचर और कपड़ें होते हैं।

शादी के बाद भी रखती है ख्याल

पत्रिका की खास बातचीत में नीतू मौसी ने बताया कि उनका जन्म वर्ष 1957 में मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। किन्नर होने के चलते उन्हें कोटा भेजा गया। मगर कोटा उन्हें रास नहीं आया। तत्कालीन समय में कोटा में गद्दी की मालकिन की सहेली नर्मदा बाई भरतपुर रहती थीं। इस पर उन्हें वर्ष 1974 में मात्र 17 वर्ष की आयु में भरतपुर नर्मदा बाई के पास भेज दिया गया। इसके बाद वे नर्मदा बाई के सानिध्य में पली बढ़ी और अंत में उन्होंने भरतपुर की गद्दी पर नीतू मौसी को बिठाया।

तीन बेटियों ने की आत्महत्या, मौसी ने ली महादान की प्रेरणा

कोटा से भरतपुर आने के कुछ साल बाद घटित हुई एक घटना से नीतू मौसी की आत्मा को झकझोर दिया। दरअसल, उस समय आर्थिक तंगी से जूझ रहीं बेटियों की शादियां दहेज की मांग को लेकर नहीं हो पा रही थीं।इसके चलते एक ही समाज की तीन बेटियों ने आत्महत्या कर ली। इसकी जानकारी जब नीतू मौसी हो हुई तो उन्होंने संकल्प लिया कि ईश्वर उन्हें इस काबिल बनाए कि वे आर्थिक तंगी से जूझ रही बेटी में शादी में सहयोग कर सके।इसके बाद वे लगातार अपनी सामथ्र्य अनुसार शादियों में सहयोग करने लगीं। इसके बाद वर्ष 2011 से उन्होंने हर वर्ष सामूहिक सम्मेलन आयोजित कर 10 गरीब बेटियों की शादी कराने का बीड़ा उठाया जो आज तक जारी है।

सावन में होता जोड़ों का चयन

सामूहिक विवाह सम्मेलन के लिए सावन के महीने में ही ऐसे परिवार की बेटियों को चिह्नित कर उनका चयन किया जाता है जो आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। इस सम्मेलन में सभी समाज की 10 बेटियां होती है। सम्मेलन के दौरान हिन्दू बेटियों की शादी हिंदू रीति-रिवाज और मुस्लिम समाज की बेटियों की शादी कुरान की आयतें पढऩे के साथ सम्पन्न होती है। इसमें हिन्दू-मुस्लिम एकता देखने को मिलती है।

किसी से नहीं लिया जाता चंदा

नीतू मौसी ने बताया कि इसके लिए शहर से कोई चंदा एकत्रित नहीं किया जाता है। बिना मांगे ही क्षमता के अनुसार भागाशाह भी इसमें अपना सहयोग करते हैं। इस बार सम्मेलन में सात हिंदू और तीन मुस्लिम समाज की बेटियों का विवाह सम्पन्न होगा। 23 नवम्बर को होने वाले विवाह सम्मेलन में सुबह 10 बजे कुम्हेर गेट स्थित उनके निज निवास से ही निकासी निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि इस पुनीत कार्य में हिना, मोहिनी, पप्पू, सिमरन, मीठी और पायल का पूरा सहयोग मिलता है।