आयुक्त ने जांच को भेजी फाइल, एसीबी का बगैर परिवाद दर्ज हुए जांच से इंकार

-विवाद के बीच नियम की उलझन, मेयर बोले: मैंने तो बैठक में प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को भेजने के लिए कहा था

By: Meghshyam Parashar

Published: 28 Oct 2020, 01:51 PM IST

भरतपुर. नगर निगम में मेयर व आयुक्त के बीच चल रहे विवाद के बीच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से जांच का मामला भी नियमों में उलझ कर रह गया है। चूंकि एसीबी ने कहा है कि जब उनके यहां कोई परिवाद दर्ज नहीं होता है तो उसकी जांच नहीं की जा सकती है। परिवाद दर्ज होने के बाद से ही किसी प्रकरण की जांच की जा सकती है। ऐसे में अब भी दोनों के बीच विवाद की स्थिति जस की तस बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि इस विवाद के बीच जहां मेयर अभिजीत कुमार ने 14 प्रकरणों में गड़बड़ी की आशंका जाहिर करते हुए यू-नोट बनाकर आयुक्त के पास भेजा था तो वहीं आयुक्त ने कहा था कि वह अगले सप्ताह तक इन सभी प्रकरणों की फाइल भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास भेज देंगे।
नगर निगम आयुक्त नीलिमा तक्षक ने मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधीक्षक के नाम पत्र के साथ संबंधित फाइलों का बस्ता बनाकर भेजा। जहां कर्मचारी जब बस्ता लेकर पहुंचा तो एसीबी के अधिकारियों ने उसे लेने से इंकार कर दिया। ऐसे में इस प्रकरण की जानकारी एसीबी के उच्च अधिकारियों को भी दी गई, लेकिन बस्ता लेने पर सहमति नहीं बन सकी। कुछ देर तक बातचीत के बाद भी कोई सहमति नहीं बनी तो कर्मचारी बस्ता वापस लेकर नगर निगम आ गया। पत्र में आयुक्त ने लिखा है कि मेयर ने कुछ पत्रावलियों में गड़बड़ी की आशंका जताई थी, इसके संबंध में संलग्र सूची अनुसार संबंधित पत्रावलियों की प्रमाणित प्रतियां संलग्न कर निवेदन है कि उक्त पत्रावलियों में गड़बड़ी की जांच किए जाने का श्रम करें। वहीं नगर निगम के मेयर अभिजीत कुमार ने कहा कि मेरी ओर से सीधे एसीबी को प्रकरणों को बस्ता के साथ भेजने के लिए नहीं कहा गया था। क्योंकि नियम मैं भी जानता हूं। बैठक में प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार के पास जांच की स्वीकृति के लिए भेजने के लिए कहा गया था।

आयुक्त ने पत्र के साथ भेजी इन प्रकरणों की फाइलें

मेयर ने 22 अक्टूबर को 14 प्रकरणों का जिक्र करते हुए आयुक्त के पास पत्र भेजकर उनकी जांच एसीबी से कराने का निर्देश दिया था। उन्हीं प्रकरणों को आयुक्त ने एसीबी के पास भेजा है। इसमें कम्प्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध कराए जाने की आमंत्रित ई-निविदा प्रक्रिया लागत राशि 12.63 लाख, निगम शहरी क्षेत्र में बंदर पकडऩे के लिए आमंत्रित ई-निविदा लागत राशि 20 लाख, निगम क्षेत्र में स्थित गौशाला में भूसा, चारा, दाना सप्लाई कार्य लागत राशि पांच लाख, आवारा पशुओं को पकड़ कर परिवहन कर गौशलाओं में पहुंचाने का कार्य लागत राशि पांच लाख, आवारा पशुओं को गौवंश आश्रय स्थल में टैग लगाकर पहुंचाने का कार्य लागत राशि पांच लाख, नंदी गौशाला में चारा, भूसा, दाना सप्लाई कार्य की पत्रावली राशि 1.79 करोड़, वाहनों के संधारण व रख-रखाव, मरम्मत कार्य की पत्रावली राशि 2.78 करोड़, मिथलेश शर्मा पत्नी नरेश लवानिया की 14 फरवरी 2020 को राजकीय भूमि पर जारी आवासीय भवन निर्माण स्वीकृति की पत्रावली, 18 सितंबर 2020 को कुम्हेर गेट बाहर, एलोरा पेट्रोल पंप के पीछे परकोटे की भूमि आदि पर बिना पट्टे के आवासीय निर्माण की मंजूरी की पत्रावली, अपने पद व अधिकारों का दुरुपयोग कर बोर्ड को गुमराह करते हुए कचरा परिवहन ठेका की वर्ष 2019-20 की न्यूनतम दर राशि 540 रुपए प्रति चक्कर की प्राप्त निविदा को नियम विरुद्ध निरस्त कराकर संवेदक की पूर्ववती वर्ष 2018-19 की उच्च दर राशि 555 रुपए प्रति चक्कर के कार्य आदेश की बढ़ाई गई, बीट सफाई कार्य की निविदा के कार्य आदेश जारी नहीं कर निविदा को निरस्त कर अनुचित कार्यवाई की गई। सनातन धर्म स्कूल रणजीत नगर को जारी फायर एनओसी की जांच, गत नौ माह से जारी भवन निर्माण मंजूरी की पत्रावलियों की जांच व ठेके पर कार्यरत सफाई श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी तथा देय पीएफ की जांच का प्रस्ताव शामिल है।

इधर, आयुक्त के निलंबन की मांग को लेकर दिया ज्ञापन

नगर निगम के कुछ पार्षदों ने पार्षद से अभद्रता व जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के मामले में आयुक्त के निलंबन की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर नथमल डिडेल को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में उल्लेख किया है कि आयुक्त की ओर से हठधर्मिता के चलते आए दिन पार्षदों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। 21 अक्टूबर को पार्षद नरेश जाटव के साथ अभद्रता कर उन्हें अपमानित किया गया। इसका मामला भी आयुक्त के खिलाफ मथुरा गेट थाने में दर्ज हो चुका है। ज्ञापन पर पार्षद दिलकेश किशनपाल, बबीता, सुरेंद्र कुमार, किशोर सैनी, चतरसिंह, रिंकी, मोतीसिंह, मुकेश कुमार पप्पू, भूपेंद्र चंदा पंडा आदि के हस्ताक्षर हैं।

इधर, शहर में बंदर पकडऩे व श्वानों की नसबंदी का कार्य आदेश जारी

शहर में पिछले लंबे समय से बंदरों के आतंक व श्वान व सूअरों की समस्या को लेकर मामला उठने के बाद अब मंगलवार को कार्य आदेश जारी कर दिया गया है। चूंकि इस मामले को लेकर एक दिन पहले ही पार्षद कपिल फौजदार के नेतृत्व में प्रदर्शन भी किया गया था। साथ ही विभिन्न संगठनों की ओर से बंदर पकडऩे की मांग उठाई जा रही थी। निगम प्रशासन का कहना है कि जल्द ही ठेकेदार की ओर से कार्य शुरू कर दिया जाएगा। ताकि शहर की जनता की परेशानी का निराकरण किया जा सके।

-22 अक्टूबर को जो पत्र प्रकरणों की सूची के साथ मैंने आयुक्त को भेजा था। उसमें साफ तौर पर लिखा है कि पत्रावलियों की जांच का प्रस्ताव नगर निगम की साधारण सभा की बैठक में रखकर प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार के पास जांच के लिए भिजवाया जाए। ताकि वहां से प्रकरण एसीबी को जाता है। ऐसे प्रकरण में राज्य सरकार से एनओसी आने के बाद ही जांच एसीबी के पास जाती है। यह तो मुझे भी मालूम है कि बस्ता भेजने से सीधे एसीबी उसे थोड़े ले लेगी। नियम के अनुसार ही जांच होती है। मैंने पत्र में साफ लिखा था।

अभिजीत कुमार, मेयर नगर निगम

-नगर निगम से कर्मचारी बस्ता लेकर आया था। बगैर परिवाद दर्ज किए हम किसी भी प्रकरण की जांच नहीं कर सकते हैं। पहले परिवाद आने के बाद मुख्यालय भेजा जाता है। इसके बाद जांच की जाती है। हमने बस्ता लेने से इंकार कर दिया। इस बारे में अधिकारियों को भी अवगत करा दिया है।

महेश मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो

-मेयर की ओर से जिन प्रकरणों की जांच एसीबी से कराने का प्रस्ताव भेजा गया था। वो सभी प्रकरण मय फाइलों के साथ एसीबी भेजे थे, लेकिन उन्होंने लेने से ही इंकार कर दिया। हम तो जांच कराने के लिए तैयार हैं।

नीलिमा तक्षक, आयुक्त नगर निगम

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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