
जो आश्वासन चार दिन पहले था, उसी आश्वासन पर पांच दिन बाद माने आंदोलनकारी
भरतपुर. माली, सैनी, कुशवाहा, शाक्य, मौर्य समाज के आंदोलनकारियों को जो आश्वासन आज से पांच दिन पहले दिया गया था, वही आश्वासन गुरुवार को दुबारा से कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने दिया है, लेकिन इस बार आंदोलनकारी मान गए और आगरा-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग से जाम हटा लिया है। हालांकि लगातार आंदोलनकारियों की ओर से कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह को महापड़ाव स्थल पर ही बुलाने की मांग की जा रही थी, वह मांग गुरुवार को ही पूरी हुई। क्योंकि कैबिनेट मंत्री सिंह पांच दिन के अंदर पहली बार महापड़ाव स्थल पर पहुंचे। तीन दिन से राज्य सरकार से अधिकृत कैबिनेट मंत्री व आंदोलनकारियों के बीच कभी वार्ता स्थल तो कभी प्रतिनिधिमंडल में आंदोलन के संयोजक नहीं आने को लेकर गतिरोध बना हुआ था। अब दो मिनट की घोषणा में ही पांच दिन का आंदोलन समाप्त हो गया। इससे पहले सुबह से ही जिला कलक्टर आलोक रंजन, संभागीय आयुक्त सांवरमल वर्मा समेत अन्य अधिकारियों की ओर से लगातार आंदोलनकारियों से वार्ता की जा रही थी। ऐसे में जैसे ही बात बनी तो तुरंत कैबिनेट मंत्री को बुलाकर मामला शांत कराया गया। पिछले पांच दिन से आरक्षण आंदोलन जिला प्रशासन व पुलिस के लिए भी गले की फांस बना हुआ था।
12 जून से आगरा-बीकानेर हाईवे पर गांव अरौंदा के पास महापड़ाव डाला गया था। इसके कारण वाहनों को डायवर्ट कर निकाला जा रहा था। इससे यात्रियों को परेशानी भी उठानी पड़ रही थी। 14 जून की शाम को कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह आंदोलनकारियों से वार्ता करने के लिए पहुंचे, जहां कुछ देर बाद ही आंदोलनकारियों का प्रतिनिधिमंडल भी पहुंच गया, लेकिन प्रतिनिधिमंडल में आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारीलाल सैनी नहीं आए। वार्ता में आंदोलनकारियों की ओर से तीन मांग रखी गई। इनमें मुख्यमंत्री से यथाशीघ्र मुलाकात कराने, 12 प्रतिशत आरक्षण दिलाने व हाईवे जाम करने का मुकदमा वापस कराने की मांग रखी गई। इस पर कैबिनेट मंत्री ने कहा था कि 12 प्रतिशत आरक्षण राज्य सरकार का निर्णय है, मुकदमे मेरे ऊपर ही दर्ज हैं और मुख्यमंत्री से मुलाकात कराना मेरा दायित्व है, मैं जल्द ही करा दूंगा। बाकी मांगों को सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद जब आंदोलनकारियों ने भी लिखित में समझौता करने की बात कही। इस पर कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि पहले आप जाम खोलिए, कल यहां आकर ही वार्ता की जाएगी। इसके बाद अब गुरुवार सुबह करीब 10 बजे कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और सीएम से मुलाकात कराने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
पांच दिन का आंदोलन और मिला क्या ?
आरक्षण आंदोलन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आंदोलनकारियों को मिला क्या है। चूंकि आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगी थी कि 12 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए, इस पर कैबिनेट मंत्री ने आश्वासन दिया है कि आरक्षण देना सरकार का निर्णय है, उनकी मांगों को पहुंचा दिया जाएगा। दूसरी मांग थी कि दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए, इस पर कैबिनेट मंत्री सिंह ने कहा कि मुकदमे मेरे ऊपर भी दर्ज हैं, फिर भी निर्णय लिया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात करा दी जाएगी। आंदोलन के संयोजक के पुत्र व परिजनों के मामले में तबादले संबंधी समस्या का मामला अब भी रहस्य बना हुआ है।
अब तक कब क्या हुआ
-12 जून को सुबह साढ़े 10 बजे गांव अरौंदा के पास चक्काजाम किया गया। जिला कलक्टर ने वार्ता की कोशिश की।
-13 जून को राज्य सरकार ने वार्ता के लिए संभागीय आयुक्त व कैबिनेट मंत्री को अधिकृत किया। आंदोलनकारियों को बुलाया, लेकिन वे मौके पर आने पर अड़े रहे। वार्ता का प्रस्ताव आया, लेकिन संयोजक ने खुद आने से इंकार कर दिया।
-14 जून को दो बार प्रयास के बाद आंदोलनकारी आईजी ऑफिस वार्ता को पहुंचे, लेकिन कैबिनेट मंत्री ने पहले जाम खोलने को कहा।
-15 जून को वार्ता हुई, लेकिन निष्कर्ष अधिकारियों के बीच छिपा हुआ है।
-16 जून को पहले अधिकारियों ने माहौल तैयार किया। इसके बाद आनन-फानन में कैबिनेट मंत्री को बुलाकर मामला शांत कराया गया।
Published on:
16 Jun 2022 11:16 am
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