22 मार्च 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

45 घंटे चलाया एयर लिफ्ट ऑपरेशन, 46 लोगों की बचाई जिंदगी

- भरतपुर के जांबांज सैनिक रहे शामिल

2 min read
Google source verification
45 घंटे चलाया एयर लिफ्ट ऑपरेशन, 46 लोगों की बचाई जिंदगी

45 घंटे चलाया एयर लिफ्ट ऑपरेशन, 46 लोगों की बचाई जिंदगी

भरतपुर . हादसा हद से गुजर रहा था। ऊंचाई देखकर ही लोगों के हाथ-पैर फूल रहे थे। रेस्क्यू भी कतई आसान नहीं था। अंधेरा बाधा बन रहा था, लेकिन सेना की हिम्मत, हौसला और जुनून का नतीजा था कि जोखिम के बीच जद्दोजहद कर रहीं 46 जिंदगी फिर से मुस्कुरा उठी। झारखंड के देव घर में 10 अप्रेल को हुए रोपवे हादसे में एनडीएफआईटी बीपी एवं एयरफोर्स की मदद से इन लोगों को बचाया गया। यहां शाम करीब 4.30 बजे रोपवे की दो केबल कारों के आपस में टकरा जाने से करीब 80 फंस गए थे।
चीख-पुकार के बीच एनडीआरएफ एवं स्थानीय लोगों की मदद से 15 से 20 लोग जो नीचे की ट्रॉली में फेसे थे, उन्हें तो निकाल लिया गया, लेकिन अधिक ऊंचाई पर फंसे लोगों को मदद नहीं मिल सकी। इस पर देवघर के डीसी मंजू नाथ ने केन्द्र सरकार से मदद मांगी। इस पर केन्द्र सरकार ने तुरंत भारतीय वायुसेना को रेस्क्यू करने का आदेश दिया। भारतीय वायु सेना का एमआई-17-वीएस हेलीकॉप्टर तड़के 4 बजे घटनास्थल पर पहुंच गया और प्लानिंग के तहत 11.30 बजे से रोपवे में फंसे लोगों को रेस्क्यू करना शुरू कर कर दिया। शाम 6 बजे तक 30 लोगों को हेलीकॉप्टर से लिफ्ट कर सुरक्षित निकाल लिया गया। इसके बाद अंधेरा होने से रेस्क्यू ऑपरेशन बंद करना पड़ा। अगले दिन तड़के 6 बजे से ही रेस्क्यू मिशन फिर से आरंभ किया गया और बाकी बचे 16 लोगों को भी दोपहर 12 बजे तक सकुशल बाहर निकाला गया। कुल 45 घंटे चले इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय वायु सेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 46 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

मुश्किलें अपार, फिर हौसला बना मददगार

रेस्क्यू मिशन में सबसे पहली मुश्किल यह थी कि जिस जगह लोग फंसे थे, वह भूतल से करीब 2 से ढाई हजार फीट की ऊंचाई पर थी, जिनको ग्राउंड लेवल से रेस्क्यू करना असंभव था। ऐसे में वायुसेना ने हेलीकॉप्टर से एअर लिफ्ट कर ऑपरेशन को संचालित किया। हेलीकॉप्टर की रेस्क्यू केबल से लोगों को केबल कार से लिफ्ट कर बचाया जा रहा था। इस समय रोपवे के तार बाधा बन रहे थे। उनके बीच से लोगों निकालना मुश्किल था। इसके अलावा हेलीकॉप्टर की तीव्र हवा तार हिल रहे थे। ऐसे में हेलीकॉप्टर को भी नुकसान की आशंका थी। हेलीकॉप्टर की रेस्क्यू केवल से कमांडो नीचे उतर के ट्रॉली में जाता था तो ट्रॉली के गेट को खोलना और उस छोटी सी केबल कार में रेस्क्यू करने वाले व्यक्ति को रेस्क्यू हार्नेस पहनाना और उन लोगों को रेस्क्यू करना जो प्रशिक्षित नहीं थे। ऐसे में रेस्क्यू के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार कर बाहर निकाला गया।

भरतपुर के सैनिक ने निभाई भूमिका

देवघर हादसे में चले रेस्क्यू ऑपरेशन में भरतपुर के जाबांज सैनिक महेश शर्मा के हौंसले व अदम्य साहस ने भरतपुर ही नहीं, बल्कि उच्चैन के अपने गांव पिचूना का भी नाम रोशन किया। भारतीय वायुसेना के वायु सेना स्टेशन बैरकपुर में तकनीकी विभाग में कार्यरत भरतपुर के महेश शर्मा ने हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिन-रात जी जान लगाकर योगदान दिया। भरतपुर के इस जाबांज की बहादुरी के लिए वायु सेना के एयर चीफ मार्शल की ओर से उन्हें उनकी टीम के साथ सम्मानित किया है।
भरतपुर . सैनिक महेश शर्मा।