
कांग्रेस के मेयर...और कांग्रेस की सरकार फिर भी इतने खफा क्यों?
भरतपुर. नगर निगम में पिछले तीन महीने से चल रहे विवाद के बीच सोमवार को एक नया मामला सामने आया है। इसमें खुद मेयर अभिजीत कुमार ने भी कांग्रेस का बोर्ड होने पर भी मेयर के पद के साथ न्याय नहीं कर पाने की बात को स्वीकार कर लिया है। साथ इस पत्र के साथ ही नगर निगम में अब सियासी हलचल भी तेज हो गई है। चूंकि पिछले दिनों भाजपा के ही कुछ पार्षदों की ओर से नगर निगम की साधारण सभा की बैठक बुलाने के लिए भी आयुक्त को ज्ञापन दिया जा चुका है। मेयर को बैठक बुलाने के लिए मांग की जा चुकी है। अब अगर आगामी बैठक होती है तो इस विवाद के कारण बैठक भी हंगामेदार हो सकती है। मेयर की चिट्ठी वाटसअप पर वायरल होने के बाद पार्षदों में भी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में यह चिट्ठी पार्टी हाइकमान के पास भी भेज दी गई। ताकि समय पर विवाद का निस्तारण कराया जा सके।
मेयर ने सीएम को लिखे पत्र में कहा है कि आपके कारण मुझे भरतपुर नगर निगम का महापौर बनने तथा भरतपुर की जनता एवं कांग्रेस की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। नगर निगम में 1994 से पिछले बोर्ड तक भाजपा तथा भाजपा समर्थित बोर्ड का कार्यकाल रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत व कुशल नेतृत्व के कारण भाजपा के 22पार्षदों के मुकाबले कांग्रेस के 18 पार्षदों ने भाजपा के 25 साल पुराने गढ़ को ध्वस्त किया। भाजपा के पिछले 25 वर्षों के शासन की रंगत प्रशासन पर साफ दिखाई दे रही है। इसकी वजह से एक ओर से मेयर होने के नाते कांग्रेस की किसान, युवा बेरोजगार, वृद्धजन, महिला, दलित व गरीब हितैषी नीतियों को धरातल पर नहीं उतार पा रहा हूं तथा दूसरी ओर नगर निगम में भ्रष्टाचार चरम पर है। कई मामलों की रिपोर्ट निदेशक स्वायत्त शासन विभाग को प्रेषित कर चुका हूं। नगर निगम प्रशासन भरतपुर की जनता को आवश्यक सुविधा मुहैया कराने में कम लेकिन राजनैतिक खेल खेलने में अधिक रुचि लेता है। पार्षद तथा कर्मचारियों को जाति के नाम पर बांटा जा रहा है। मेरी ही उपस्थिति में निगम परिसर में कुछ चुनिंदा पार्षदों के साथ सभा की जाती है। बोर्ड को तोडऩे के प्रयास किए जा रहे हैं। समय रहते अगर प्रशासन में मेजर बदलाव नहीं किए गए तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है। मैं अपराध बोध से ग्रसित हूं कि कांग्रेस का बोर्ड होते हुए भी मेयर पद के साथ न्याय नहीं कर पा रहा हूं। मैं पिछले तीन महीनों से व्यथित हूं। इसलिए यह पत्र लिख रहा हूं।
इस विवाद के पीछे छिपा हुआ है बड़ा राज
अगर नगर निगम में पिछले कुछ घटनाक्रमों पर नजर डालें तो सामने आता है कि इस विवाद की असल वजह आपसी खींचतान व चंद लोगों का नगर निगम के कार्यों में दखल देना है। यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और फाइलों तक पहुंच गया। इसका नुकसान और प्रभाव शहर के विकास पर पड़ रहा है। जहां एक फाइल पर एक अधिकारी हस्ताक्षर कर भुगतान की स्वीकृति देता है तो मेयर उसकी जांच कराने के लिए लिखते हैं। अगर मेयर किसी कार्य की स्वीकृति देते हैं तो उसे कार्य आदेश देने में आनाकानी की जाती है। इससे नगर निगम में कुछ ठेकेदारों के भुगतान अटक चुके हैं। परेशान ठेकेदार कभी मेयर तो कभी आयुक्त तो कभी मंत्रियों के पास चक्कर काट रहे हैं। अभी तक इस विवाद का निस्तारण कराने की दिशा में किसी ने भी कोई कदम नहीं उठाया है। हालांकि यह तक जानने की कोशिश नहीं की गई है कि आखिर यह विवाद किसके कारण और क्यों इतना बढ़ चुका है। जबकि होना यह चाहिए था कि जहां विकास की राह में विवाद रोड़ा बनता है तो जिम्मेदारों को उसे समय पर सुलझा देना चाहिए।
इधर, भाजपा जिलाध्यक्ष बोले: मेयर ने ही की भ्रष्टाचार की शुरुआत
मेयर की चिट्ठी वायरल होने के बाद यह मामला भाजपा नेताओं के पास भी पहुंच गया। ऐसे में वहां भी खलबली मच गई। चूंकि नगर निगम में भाजपा के 22 पार्षद हैं। मामला प्रकाश में आने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. शैलेष सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार की शुरुआत खुद नगर निगम के मेयर ने नगर निगम के चुनाव में ही कर दी थी। क्योंकि पार्षदों को पैसा देकर मेयर बनाया गया था। इसलिए अब नगर निगम में भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा है। बाकी हमारे भाजपा पार्षदों की ओर से हर बैठक में कांग्रेस के बोर्ड की गलत नीतियों का विरोध किया जाता रहा है। कांग्रेस में अगर व्यथित होने की बात की जाती है तो यह कोई बड़ी बात नहीं है। चूंकि पिछले दिनों कांग्रेस सरकार में जो इतना बड़ा घटनाक्रम हुआ है, उससे स्पष्ट है कि वहां कांग्रेस के मेयर ही नहीं बल्कि बड़े-बड़े नेता भी व्यथित हैं। इतना ही नहीं अब तो कांग्रेस की सरकार से आमजन भी व्यथित है।
हकीकत ये भी...छिटपुट विवाद में नहीं बिगड़े शहर की सूरत
अब बड़ी बात यह भी है कि जिम्मेदारों को सोचने की जरुरत है कि छिटपुट विवाद में शहर के विकास की राह नहीं रुकनी चाहिए। बात चाहे मेयर की हो या नगर निगम प्रशासन की, दोनों को ही इस विवाद को सुलझाना चाहिए। आमजन का भी तर्क है कि कोरोना संक्रमण के चलते बजट आदि में कमी आ चुकी है। ऐसे में शहर में नीतिगत निर्णय लेकर विकास की राह को आसान बनाने में ताकत लगानी चाहिए।
-यह नगर निगम व पार्टी का आंतरिक मामला है। नगर निगम में पिछले कुछ माह से जो कुछ भी चल रहा है। उसके बारे में जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित मंत्रियों को अवगत कराया जाता रहा है। बाकी नगर निगम एक परिवार है। यहां कुछ भी होता है तो हम खुद ही उसका निस्तारण कर सकते हैं।
अभिजीत कुमार
मेयर नगर निगम
-जिस पत्र के संबंध में जानकारी चाही गई है। उसके संबंध में आज की तारीख तक मेयर के कोई पत्र की जानकारी नहीं है। इस पत्र की सत्यता मेरी समझ से परे है। भ्रष्टाचार के संबंध में नगर निगम प्रशासन की अधिकारी एवं जिम्मेदार अधिकारी होने के कारण प्रत्येक सेक्शन की मॉनीटरिंग की जाती रही है। मेरे कार्यकाल में किसी भी भ्रष्टाचार के संबंध में कोई भी शिकायत किसी भी जनप्रतिनिधि एवं आमजन की ओर से नहीं की गई है। निगम में भ्रष्टाचार होने का आरोप निराधार है।
नीलिमा तक्षक
आयुक्त नगर निगम
Published on:
25 Aug 2020 03:27 pm
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