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डॉक्टर बनने के अरमानों पर सरकार का कुठाराघात, भरतपुर के आयुर्वेद कॉलेज में बिना शिक्षकों के पढ़ रहे विद्यार्थी

सरकार की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा विभाग, अधूरे संसाधन और शिक्षकों से शिक्षा भी अधूरी, छात्र-छात्राएं हो रहे परेशान  

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डॉक्टर बनने के अरमानों पर सरकार का कुठाराघात, भरतपुर के आयुर्वेद कॉलेज में बिना शिक्षकों के पढ़ रहे विद्यार्थी

डॉक्टर बनने के अरमानों पर सरकार का कुठाराघात, भरतपुर के आयुर्वेद कॉलेज में बिना शिक्षकों के पढ़ रहे विद्यार्थी

भरतपुर. आयुर्वेद को बढ़ावा देने के नाम पर सरकार के दिखावे की पोल अब खुलने लगी है। पिछले बजट में सरकार ने आयुर्वेद में उच्च शिक्षा के लिए युवाओं को ख्वाब दिखाते हुए भरतपुर में एक आयुर्वेद कॉलेज की स्थापना की, लेकिन अधूरे संसाधन और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय में युवाओं का भविष्य संवरने की बजाय बिगडऩे में लगा है।
भरतपुर में सेवर से मथुरा जाने वाले बाइपास पर संचालित राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय में वर्तमान में प्रथम वर्ष की कक्षाएं चल रही हैं। लेकिन इन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए आधे-अधूरे शिक्षक ही मौजूद है। यहां तक कि कॉलेज की प्राचार्य की भी आयुर्वेदिक अस्पताल में ड्यूटी होने के कारण वे भी अपना पूरा समय कॉलेज को नहीं दे पाती।
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संसाधन भी अधूरे
कॉलेज में संसाधन की बात करें तो कॉलेज में लाइब्रेरी पर अधिकतर समय ताला लगा रहता है। छात्रों के अनुसार लाइब्रेरी में विद्यार्थियों के लिए उपयोग में आने वाली पुस्तकें तक मौजूद नहीं है। इसके अलावा पंचकर्म विभाग, रचना शरीर संग्रहालय आदि विभागों पर भी हर समय ताला लगा रहता है। वहीं छात्रों के लिए यहां कैंटीन तो बनी है, लेकिन पीने के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं होता।
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इन विषयों के नहीं है शिक्षक
आयुर्वेद कॉलेज में बैचलर इन नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस के विद्यार्थी अध्ययनरत है, लेकिन इन विद्यार्थियों के लिए बायो केमिस्ट्री, संस्कृत सहित अन्य विषय को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। इसके चलते विद्यार्थियों को पढ़ाई का नुकसान हो रहा है साथ ही डॉक्टर बनने के अरमानों पर पानी फिर रहा है।