
13 साल से मानमंदिर से जुड़े हुए थे बाबा विजयदास, बरसाना में होगी अंत्येष्टि
भरतपुर. चार दिन से जिंदगी की जंग लड़ रहे पसोपा के मंदिर के महंत बाबा विजयदास आखिर हार गए। तड़के करीब ढाई बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। इसकी सूचना तुरंत राज्य सरकार को दी गई। इसके बाद अधिकृत अधिकारी दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल पहुंचे। जहां से बाबा का शव उत्तरप्रदेश के बरसाना स्थित माताजी गौशाला पहुंचाया जा रहा है। उत्तरप्रदेश सरकार ने मथुरा जिला कलक्टर को अंतिम संस्कार को लेकर निर्देशित किया है। इसमें राजस्थान व उत्तरप्रदेश के प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के अलावा मंत्रियों के पहुंचने की बात सामने आ रही है।
उल्लेखनीय है कि आदिबद्री व कनकांचल पर्वत को खनन मुक्त कराने की मांग को लेकर 551 दिन से गांव पसोपा में चल रहे धरने में बाबा विजयदास ने शरीर पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया था। जहां भरतपुर से उन्हें जयपुर रैफर किया गया था। दूसरे दिन उन्हें जयपुर से दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उन्होंने शनिवार तड़के अंतिम सांस ली। मानमंदिर सेवा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने बताया कि गांव पसोपा में ग्रामीणों के साथ साधु-संतों व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच वार्ता हुई। इसमें पहले सहमति बनी कि अंतिम संस्कार गांव पसोपा में ही किया जाएगा, लेकिन अंत में निर्णय हुआ कि अंतिम संस्कार उत्तरप्रदेश के बरसाना स्थित माताजी गौशाला में किया जाएगा।
आंदोलन के दौरान बने पसोपा के मंदिर के महंत
मूलत: हरियाणा के रहने वाले बाबा विजयदास बरसाना के मान मंदिर से जुड़े हैं। करीब 12-13 वर्ष पहले बाबा विजयदास मानमंदिर पहुंचे। उनके परिवार को लेकर खास जानकारी तो नहीं मिली, लेकिन उनकी एक दुर्गा नाम की 14 वर्षीय पौत्री मान मंदिर में ब्रज की आस्था से जुड़कर भजन कर रही है। उसके दस्तावेजों में भी मूल पता मान मंदिर का है। अवैध खनन के विरोध में पसोपा में 16 जनवरी 2021 से शुरू हुए धरने के दौरान बाबा विजय दास पसोपा पहुंचे थे। उससे पहले पसोपा के पहाड़ पर बने वीर बाबा राधा-कृष्ण मंदिर के महंत रहे बाबा श्यामदास के निधन होने से मंदिर पर कोई महंत नहीं था। धरने के दौरान बाबा विजय दास का गांव के मंदिर पर आना-जाना हुआ। इस दौरान बाबा विजय दास ग्रामीणों से भी घुल-मिल गए। ग्रामीणों ने आपसी सहमति के बाद बाबा विजय दास को गांव के वीर बाबा मंदिर का महंत बना दिया। तब से बाबा गांव के मंदिर की सेवा में जुटे हैं।
तीन वर्ष की पोती का पालन पोषण किया
पसोपा में आंदोलन के दौरान विजय बाबा गांव के पहाड़ पर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में भजन पूजन करने लगे। करीब डेढ़ वर्ष पहले मंदिर के महंत का निधन हो जाने पर गांव के लोगों ने सर्वसम्मति से विजय बाबा को पशुपतिनाथ मंदिर का महंत घोषित कर मंदिर की पूरी जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी। मान मंदिर से जुड़े संतों की ओर से पूर्व में 2017 में जब नागल और बुआपुर गढ़ी में खनन बंद कराने को लेकर जो मान मंदिर के संतोष ने 45 दिन आंदोलन किया था तब विजय बाबा ने भी उसमें भाग लिया था। 16 जनवरी 2021 में जब पसोपा में मान मंदिर बरसाना के तत्ववधान में आदि बद्री और कनका चल पर्वत पर्वत पर चल रहे अंधाधुंध खनन को बंद कराने तथा इस संपूर्ण 749.44 हेक्टेयर भूमि को वन संरक्षित क्षेत्र में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया तो बाबा विजय दास गांव पसोपा आकर इस धरना प्रदर्शन आंदोलन में शामिल हो गए।
हादसे में बेटे-बहुत की मौत, पोती का किया पालन-पोषण
बाबा विजयदास का मूल नाम मधुसूदन था। मानमंदिर से जुडऩे के बाद उनका नाम विजयदास हो गया। उन्होंने जीवन में बहुत संकट देखे। फरीदाबाद में कपड़ा फैक्ट्री की नौकरी करने के दौरान उन्होंने अपने पुत्र का विवाह कर दिया। इसके एक पुत्री भी हो गईं। इसी दौरान किसी हादसे में उनके युवा पुत्र और पुत्रवधु की मौत हो गई। जो अपने पीछे दो-तीन साल की पुत्री को उसके बाबा मधुसूदन के भरोसे छोड़ गए। बेटे और पुत्रवधु की मौत ने उन्हें तोड़ दिया और उनका सांसारिक जीवन से मन उचट गया साथ ही उनके सामने दो-तीन वर्ष की पोती के लालन पालन की समस्या भी खड़ी हो गई।
Published on:
23 Jul 2022 10:27 am
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