
मिट्टी की सेहत खराब...नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, गंधक छोड़ रहे साथ!
भरतपुर. जिले में बुवाई युक्त जमीन में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं गंधक की कमी के कारण फसलों का बढ़ाव कम होता है और शाखाएं कम आती है। इसके अलावा दाने का आकार भी छोटा होता है और चमक नहीं आती है। जमीन में पोशक तत्वों की कमी का कारण फसल चक्र माना जा रहा है, क्योंकि एक ही फसल को बार-बार बोने से पोशक तत्वों की कमी आ जाती है। यह जानकारी मिट्टी (मृदा) जांच में सामने आया है। कृषि विभाग की प्रयोगशाला में खरीफ एवं रबी सीजन में 25 हजार से अधिक मिट्टी के नमूने की जांच की गई, जिसमें ज्यादातर इलाकों में पोटाश पर्याप्त मात्रा मिली, नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं गंधक की कमी मिली है। जिंक एवं लोहा की मात्रा भी कम मिली है।
कमी से नुकसान
पोषक तत्वों में शामिल नाइट्रोजन की कमी के कारण जहां पौधों को बढ़ावा कम मिलता है, वहीं शाखाएं भी कम छंटती हैं और पौध पीली पडऩे लगती है। इसी प्रकार फॉस्फोरस की कमी के कारण गेहूं आदि का दाना आकार में छोटा रहता है और चमक भी कम रहती है। बीज का विकास इतना नहीं हो पाता है, जितना होना चाहिए। ङ्क्षजक और लोहा की कमी के कारण पौधे पीले पड़ जाते हैं।
ऐसे होती है पूर्ति
नाइट्रोजन के स्त्रोत यूरिया, नैनो यूरिया, किसान खाद (सीएएन), अमोनिया सल्फेट, सुफला खाद। फॉस्फोरस के स्त्रोत डीएपी, एसएसपी, एनपीके खाद आदि हैं। इसी प्रकार ङ्क्षजक के स्त्रोत ङ्क्षजक सल्फेट और लोहा मिरता है फेरस सल्फेट से।
पोषक तत्व गायब
कृषि विभाग के अनुसार लगातार एक जैसी फसलों के कारण पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इसलिए फसलों में फसल चक्र अपनाएं। अर्थात फसलों को बदल-बदलकर बोना चाहिए। जैसे कभी तिलहन तो कभी दलहन बोना चाहिए, जिससे जमीन में पोषण तत्व बने रहें। इसके अलावा, खारे पानी से भी जमीन में पोषक तत्व कम हो जाते हैं।
यह हैं पोषण तत्व
फसल के लिए 16 पोषण तत्वों की जरुरत होती है। इनमें नाइट्रोजन, कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, फॉस्फोरस, पोटाश, कैल्सिमय, मैग्नीशियम, गंधक, लोहा, मैग्नीज, ङ्क्षजक, तांबा, बोरोन, मोलिबडनम एवं क्लोरीन शामिल हैं।
गंधक से बढ़ती है तेल की मात्रा
गंधक तत्व को द्वितीय पोषक तत्व कहते हैं। इसकी की पर्याप्त मात्रा से तिलहन फसलों में तेल की मात्रा बढ़ती है और दाना मोटा होता है। साथ ही दाने में चमक होती है। इसका स्त्रोत शुद्ध गंधक व जिप्सम में मिलता है।
पहले नाइट्रोजन के अलावा अन्य पोषक तत्वों को फसल की बुवाई के समय ही उपयोग में लेते हैं, लेकिन अब जल में घुलने वाले उर्वरकों का चलन होने के कारण खड़ी फसल में भी इनका उपयोग किया जा सकता है। मिट्टी की जांच के आधार पर किसानों को उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। इससे पैसे की बचत होती है और फसल एवं मिट्टी को भी नुकसान नहीं होता है।
देशराज सिंह, संयुक्त निदेशक, कृषि, संभाग भरतपुर
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Published on:
19 Dec 2022 11:49 am
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