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भरतपुर की सियासत में BSP की एंट्री, क्या BJP—कांग्रेस को उठाना पड़ेगा खामियाजा..?

क्या है भरतपुर लोकसभा क्षेत्र का सियासी गणित...!

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Bahujan Samaj Party in Bharatpur Lok Sabha Election 2019

Bahujan Samaj Party in Bharatpur Lok Sabha Election 2019

भरतपुर/ जयपुर। लोकसभा चुनाव 2019 ( Loksabha Election 2019) के तहत राजस्थान में दूसरे चरण के मतदान आगामी 6 मई को होने हैं। बची हुई 12 सीटों में भरतपुर लोकसभा क्षेत्र में भी दूसरे चरण में मतदान होंगे। प्रदेश में विधानसभा चुनावों ( Vidhansabha election 2018 ) में कांग्रेस की जीत के बाद अब आम चुनावों में भी सियासी पारा ऊंचाई पर बरकरार है।


जाहिर है कि इन विधानसभा चुनावों के नतीजों और राजस्थान में बदले समीकरणों का असर बेशक लोकसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। हालांकि कांग्रेस ने प्रदेश में वापसी जरूर की है, लेकिन बीजेपी और कांग्रेस के वोट प्रतिशत में केवल .5 फीसदी का ही अतंर है। इस लिहाज से अब लोकसभा चुनाव काफी रोचक हो रहे हैं।


ऐसे में भरतपुर का सियासी गणित भी काफी दिलचस्प रहेगा। खास बात ये है कि भरतपुर संसदीय क्षेत्र उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है। इस वजह से यहां बीएसपी भी एक अहम फैक्टर साबित हो सकता है। चूंकि विधानसभा चुनावों की बात करें तो पार्टी ने प्रदेश में कुछ सीटें हासिल की थीं, जिसकी वजह से उनका मनोबल बढ़ा हुआ है और बीएसपी ने अब राजस्थान से प्रत्याशी भी घोषित किए हैं। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने चुनावी सभाएं कर के अपना मंतव्य भी जाहिर कर दिया है।


भरतपुर संसदीय क्षेत्र का इतिहास
कांग्रेस ने साल 1957, 1962, 1971, 1980, 1984, 1998, 2009 में इस सीट पर कब्जा किया। वहीं जनता पार्टी ने 1977, 1989 में जीत दर्ज की। साल 1991, 1996, 1999, 2004 और 2014 में बीजेपी के खाते में ये सीट गई। यानी 7 बार कांग्रेस और 5 बार बीजेपी यहां काबिज हुई। वर्तमान में बीजेपी के बहादुर सिंह कोली यहां के सांसद हैं।


राजघरानों का रहा दबदबा
आपको बता दें कि भरतपुर लोकसभा सीट पर राजघरानों का दबदबा रहा है। हालांकि तब ये सीट आरक्षित नहीं थी। यहां से विश्वेंद्र सिंह तीन बार जो कि सर्वाधिक है, एक बार उनकी पत्नी दिव्या सिंह चुनाव जीते। इसके बाद दो बार नटवर सिंह और एक बार कृष्णेंद्र कौर दीपा सांसद चुने गए। कृष्णेन्द्र कौर और नटवर सिंह के पुत्र जगत सिंह भाजपा से विधायक रह चुके हैं। फिलहाल विश्वेंद्र सिंह कांग्रेस पार्टी में हैं, लेकिन उन्होंने दो बार बीजेपी और एक बार जनता दल के टिकट से जीत दर्ज की और सांसद बने। वर्तमान में विश्वेंद्र सिंह भरतपुर की डीग कुम्हेर सीट से विधायक और मंत्री हैं।

जो बेहद खास बात है वो ये कि इस ससंदीय क्षेत्र की सीमाएं उत्तर प्रदेश से लगती हैं। इसलिए यहां के कुछ इलाकों में यूपी के क्षेत्रीय दलों, खासकर बहुजन समाज पार्टी का खासा प्रभाव है। भरतपुर लोकसभा क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें शामिल हैं। इनमें से कामां, डीग-कुम्हेर, वैर, बयाना-रुपवास सीट पर कांग्रेस, जबकि नगर और नदबई सीट पर बहुजन समाज पार्टी का कब्जा है। वहीं भरतपुर सीट पर राष्ट्रीय लोकदल का कब्जा है।

2014 का जनादेश
2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के बहादुर सिंह कोली ने कांग्रेस के डॉ सुरेश जाटव को 2,45,468 मतों से पराजित किया था। कोली को 5,79,825 और जाटव को 3,34,357 वोट मिले थेे।

सांसद रिपोर्ट कार्ड

बहादुर सिंह कोली 2014 से पहले 1999 में भी सांसद रहे हैं। साथ ही वैर सीट से दो बार विधायक भी रहे। उनके खिलाफ हाल ही में एक निजी न्यूज चैनल की ओर से स्टिंग किया गया था, जिनमें सांसद कहते नजर आ रहे हैं कि चुनाव के दौरान हवाला के जरिए लाखों रूपए खर्च किए जाते हैं। ये कालाधन लाने ले जाने में एंबुलेंस का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में संभवत: इसी वीडियो की वजह से उनका टिकट काट कर यहां से रंजीता कोली को प्रत्याशी बनाया गया है। रंजीता कोली के सामने कांग्रेस के अभिजीत कुमार जाटव प्रत्याशी हैं।