
राजस्थान पत्रिका ने किया सम्मान (फोटो- पत्रिका)
Shahadat Ko Salam: भरतपुर जिले में गांव तुहिया के शहीद सूबेदार खिलौना सिंह की कहानी भी किसी फिल्मी हीरो से कम नहीं है। शहादत के बाद जब उनकी पार्थिव देह गांव आई तो सैन्य अधिकारियों ने बताया था कि ऑपरेशन पराक्रम के दौरान जब सूबेदार खिलौना सिंह आतंकवादियों के बीच घिर गए थे तो उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए पांच आतंकवादियों को अकेले ही मार गिराया था।
इसके बाद वे जख्मी होने के बाद शहीद हो गए थे। शहादत के समय उनके छोटे बेटे ने देश सेवा के लिए आर्मी में जाने का संकल्प लिया था और उसे पूरा भी किया। शहीद सूबेदार खिलौना सिंह का जन्म 10 मई 1959 को गांव तुहिया में हुआ था। इनके पिता किसान थे। वे सेना में 21 मार्च 1979 को गोवर्धन गेट भरतपुर से भर्ती हुए थे।
शहीद खिलौना सिंह ने जाट बरेली सेंटर (उत्तर प्रदेश) में ट्रेनिंग की थी। ट्रेनिंग के बाद जाट रेजीमेंट में सैनिक के पद पर भर्ती हुए थे। 24 साल की सर्विस में सेना मेडल और प्रशंसा पत्रों से सम्मानित किए गए। शहीद सूबेदार खिलौना सिंह ने जम्मू के राजौरी सेक्टर में 19 सितंबर 2003 को आतंकवादियों से लोहा लेते हुए ऑपरेशन पराक्रम में पांच आतंकियों को मार गिराया था। इसमें वे शहीद हो गए थे।
शहादत से पहले उन्होंने तमाम ऑपरेशंस में दर्जनों आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा था। मरणोपरांत भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की ओर से पत्नी सुशीला देवी को शौर्य चक्र देकर सम्मानित किया गया। शहीद खिलौना सिंह के तीन पुत्र हैं। बड़ा पुत्र समरवीर सिंह जिला कलेक्ट्रेट भरतपुर में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर है।
दूसरा पुत्र छोटा बेटा रिपुसूदन सिंह आर्मी में है। सबसे छोटा पुत्र पवन सिंह जो चिकित्सक है। शहीद के तीनों पुत्र सरकारी नौकरी में हैं। पुत्र समरवीर सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से सभी लाभ मिल चुके हैं। स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर हो चुका है। हालांकि, उस समय जो पेट्रोल पंप की मांग की गई थी, वह अब तक अधूरी है।
शौर्य चक्र से सम्मानित जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में 19 सितंबर 2003 को आतंकवादियों से लोहा लेते समय शहीद हुए तुहिया निवासी सूबेदार खिलौना सिंह का परिवार विषम विपदा की घड़ी से उभरकर वर्तमान में खुशहाल है। उनकी शहादत के महज दो साल बाद ही वर्ष 2005 में उनका बेटा रिपुसूदन सिंह देश सेवा एवं पिता का सपना पूरा के लिए आर्मी में भर्ती हो गया।
रिपुसूदन का कहना है कि शहादत के बाद परिवार से फौज में नहीं भेजना अपमान है। परिवार को चाहिए कि परिवार की परंपरा को बनाए रखने व देश सेवा के लिए एक बेटे को फौज में जरूर भेजा जाए।
वीरांगना सुशीला देवी ने बताया कि पिछले लंबे समय से भरतपुर में सैनिक स्कूल खोलने की मांग की जा रही है। उस समय जनप्रतिनिधियों की ओर से आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो सकी। भले ही धौलपुर में आर्मी स्कूल है, लेकिन जनसंख्या व आवश्यकता के हिसाब से अब भरतपुर संभाग मुख्यालय पर भी आर्मी स्कूल की बड़ी आवश्यकता है।
शहीद सूबेदार खिलौना सिंह की पत्नी सुशीला देवी का राजस्थान पत्रिका कार्यालय में सम्मान समारोह किया गया। इसमें वीरांगना का माल्यार्पण कर व शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। कार्यक्रम में भरतपुर साइकिल क्लब के अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष व पूर्व पार्षद पंकज गोयल, सदस्य सोनू सक्सैना, नवीन पाराशर उपस्थित रहे।
Updated on:
25 Jan 2026, 12:37 PM IST
Published on:
25 Jan 2026, 12:37 PM IST
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