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बैकुंठ चतुर्दशी व्रतः सांवरी सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया…

महिलाओं ने भजन-कीर्तन के साथ किया दीपदान, डीग के लक्ष्मण मंदिर में मनाया पर्व, पूजन कर की खुशहाली की कामना

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बैकुंठ चतुर्दशी व्रतः सांवरी सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया...

बैकुंठ चतुर्दशी व्रतः सांवरी सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया...

डीग. शहर सहित ग्रामीण अंचल में रविवार को कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी बैकुंठ चतुर्दशी पर महिलाओं ने पूजन कर खुशहाली की कामना की। कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व है। इस मौके पर महिलाओं ने अनेकों भजनों ‘सांवरी सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया, ‘राधे तेरे चरणों की प्रेम, ‘सब मिलकर बोले लक्ष्मण जी महाराज, ‘मीठे रस से भरो, की सुंदर प्रस्तुतियों के बीच नृत्य किया।

शहर के मुख्य बाजार स्थित लक्ष्मण मंदिर परिसर में रविवार को बैकुंठ चतुर्दशी के पावन पर्व पर प्रातःकाल कार्तिक स्नान करने वाली महिला मंडल की ओर से भजन संध्या एवं दीपदान किया गया। महिलाओं ने कार्यक्रम का आयोजन मंदिर महंत पंडित मुरारीलाल पाराशर के सानिध्य में किया। इस अवसर पर महिला भक्तों ने भजनों की प्रस्तुतियों के साथ बड़े ही भक्ति भाव के बीच प्रज्ज्वलित दीपों के साथ दीपदान किया। संध्या आरती के समय मंदिर को भव्य स्वरूप दीपकों के साथ देखा गया।

मंदिर महंत ज्योतिषाचार्य पं. मुरारीलाल पाराशर ने बताया कि आज ही के दिन बैकुंठ में हरी और हर का मिलन हुआ है। देव उठानी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और आज बैकुंठ चतुर्दशी के दिन महादेव शिव भगवान विष्णु को ब्रह्मांड संभालने का कार्य सौंपते हैं और वह हिमालय में तप करने चले जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और शिव की पूजा करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है। कार्तिक माह में चतुर्दशी पर भगवान विष्णु-शिव की आराधना की देव परंपरा है। मंदिरों में भगवान विष्णु स्वरूपों को पुष्प अर्पित किए जाते हैं। शिवजी को पीले फूल, गुलाब की माला, मिष्ठान चढ़ाए जाते हैं। बैकुंठ चतुर्दशी पर सोने-चांदी की खरीद शुभ मानी जाती है।

इस मौके पर बीना देवी पाराशर, बबली गांधी, श्वेता सेठी, मोनिका खंडेलवाल, स्नेहलता, बृजलता गांधी, सुनीता सोंखिया, आरती पाराशर, विमला, लक्ष्मी सोनी आदि महिलाएं मौजूद रही।