
फिर बसेगा जाट स्टेट के नाम से विख्यात भरतपुर ! नए शहर में होगी इस युग की सभी सुविधाएं
-सेक्टर-13 स्कीम: सबसे बड़ी आवासीय योजना, डेढ़ दशक बाद भी नहीं आवंटन
-सिटी के बाहर 2 लाख की आबादी बसाने का है प्लान
- एमओईएफ से एनओसी मिली, लेकिन रिवाइज होगा ले-आउटप्लान
-13.40 हैक्टेयर भूमि इकोलॉजिकल सेंसेटिव जोन
भरतपुर. भरतपुर (bharatpur) शहर की नई आबादी को बसाने के लिए बड़ी कवायद की जा रही है। करीब दो लाख लोगों के आशियाने का इंतजाम करने वाले इस नए शहर में वर्तमान युग की सभी सुविधाएं होंगी।
दरअसल शहर के सेक्टर-13 में अपने आशियाने बनाने का लोगों का सपना आज डेढ़ दशक बाद भी अधूरा है। पहले कई बार नगर सुधार न्यास की बैठकों में तकनीकी खामियों के चलते इस योजना को निरस्त किया गया तो कभी वन विभाग ने इस अपनी आपत्ति जताई। इन सभी आपत्तियों को यूआइटी ने क्लीयर किया तो अब ये योजना मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट एण्ड फॉरेस्ट (एमओईएफ) में गत करीब आठ माह से अटकी हुई है।
इस योजना को लेकर नगर सुधार न्यास का सपना था की इसे भरतपुर का उप नगर माना जाए, जहां आमजन की हर छोटी से लेकर बड़ी सभी सुविधाओं का ध्यान रखा गया। वहीं इसके लिए आसपास के आठ गांव के खातेदारों की जमीन को अवाप्त किया गया था। यूआईटी ने खातेदारों को अवाप्त भूमि के बदले 25 प्रतिशत विकसित भूमि देने का वायदा किया था। इसमें 20 प्रतिशत घरेलू और 5 प्रतिशत व्यवसायिक भूमि शामिल है।
2 लाख की आबादी वाला उपनगर
आगरा-बीकानेर राजमार्ग पर नगर सुधार न्यास की ओर से बहुप्रतिक्षित आवासीय योजना सेक्टर-13 को भरतपुर का उप नगर माना जा रहा है। यहां करीब पांच हजार आवासीय भूखंड हैं और इनमें करीब 2 लाख की आबादी को बसाने का प्लान किया गया है। वहीं भूखंडों की रिजर्व प्राइज 9 हजार रुपए वर्ग मीटर रखी गई थी। प्लानिंग 21 सितंबर 2005 को हुई थी, लेकिन 18 अगस्त 2007 को इसकी अधिसूचना जारी की गई। जबकि 1 सितंबर 2011 को सरकार से स्वीकृति मिली। इसके बाद 3 सितंबर 2014 को 2200 बीघा भूमि पर कब्जा लिया गया। इसे लेकर तमाम तरह के भू-स्वामियों से विवाद चलते रहे। इस कारण 19 नवंबर 2017 को वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से मंजूरी मिल सकी। योजना के तहत अभी तक चार करोड़ रुपए की लागत से अप्रोच रोड बनाई जा चुकी हैं। इसमें मलाह मोड से सेवर रोड तक का दांया क्षेत्र, सेवर रोड से हीरादास और काली की बगीची तिराहे तक का अंदरूनी हिस्सा शामिल है।
13.40 हैक्टेयर भूमि इकोलॉजिकल सेंसेटिव जोन में
यूआईटी ने इस योजना के लिए 346.86 हेक्टेयर भूमि अवाप्त की थी। इसमें 13.40 हेक्टेयर भूमि इकोलॉजिकल सेंसेटिव जोन में आती है। इस पर निर्माण कार्य के लिए अभी मामला विचाराधीन है। वहीं इकोलॉजिकल सेंसेटिव जोन को छोडकऱ शेष क्षेत्र में यूआईटी को आवासीय योजना विकसित करने की अनुमति मिलनी चाहिए, ताकि जिन किसानों से भूमि अवाप्त की है उन्हें भूखंडों के आरक्षण पत्र दिए जा सकें।
2838 आवेदकों की राशि यूआइटी में जमा
इस योजना के तहत प्लॉटों के आवंटन के लिए लॉटरी निकाली गई थी। मगर केंद्र सरकार से इसे हरी झण्डी न मिलने को लेकर करीब 6054 आवेदकों का पैसा वापस कर दिया गया। बताया गया है कि जिन आवेदकों ने पैसा वापस लिया है उन्हें फिर से आवेदन का मौका मिलेगा। वहीं यूआइटी में जमा राशि वाले आवेदकों को प्रक्रिया पूरी होने के बाद लॉटरी से भूखंडआवंटित हो सकेंगे।
ये मिलनी थीं सुविधाएं
- मिनी सचिवालय
- कॉलेज
- अस्पताल
- स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स
- मार्केट
- सामुदायिक भवन
- दो स्कूल
- आठ पार्क
इन 8 गांव के खातेदारों की भूमि हुई आवाप्त
- श्रीनगर
- झीलरा
- मडौली
- रामपुरा
- नगला तेरईया
- चक नंबर-1
- अनाह
- सेवर कलां
Published on:
31 Oct 2022 04:28 pm
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