ऑडिट में रिकवरी नहीं निकालने के लिए मांगी रिश्वत, ग्राम विकास अधिकारी 17 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने गुरुवार को डीग में पंचायत समिति क कार्यालय के बाहर एक ग्राम विकास अधिकारी को 17 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

By: rohit sharma

Published: 28 Jan 2021, 09:30 PM IST

भरतपुर. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने गुरुवार को डीग में पंचायत समिति क कार्यालय के बाहर एक ग्राम विकास अधिकारी को 17 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी कीर्ति कुमार जोशी ग्राम पंचायत सामई के ग्राम विकास अधिकारी पद पर कार्यरत है। उस पर ग्राम पंचायत शीशवाडा का अतिरिक्त चार्ज था। शीशवाडा के तत्कालीन सरपंच प्रतिनिधि देवी सिंह से शिकायत दी थी। आरोप था कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के विकास कार्यों की आडिट सही करवाने तथा कमी और रिकवरी नहीं निकालने की एवज ग्राम विकास अधिकारी रिश्वत की मांग कर रहा था।
एसीबी के एएसपी महेश मीणा ने बताया कि शीशवाड़ा सरपंच प्रतिनिधि देवी सिंह पुत्र रामखिलाड़ी ने भरतपुर में एसीबी कार्यालय शिकायत दी थी। इसमें बताया है कि हाल कार्यवाहक विकास अधिकारी शीशवाड़ा कीर्ति कुमार जोशी उससे 2019-20 के विकास कार्यों में ऑडिट में कमी एवं रिकवरी न निकालने की एवज में 40 हजार रुपए मांग रहा है। जिस पर सत्यापन कराया गया। इस दौरान 27 हजार रुपए में सौदा तय हो गया। इससे पहले 10 हजार रुपए एडवांस दे दिए। शेष 17 हजार रुपए गुरुवार को पंचायत समिति डीग के सामने देना तय हुआ। जिस पर एसीबी की टीम पहले से मौके पर पहुंच गई। यहां शिकायतकर्ता देवी सिंह ने ग्राम विकास अधिकारी कीर्ति कुमार जोशी ने राशि दी। जिस पर एसीबी टीम ने उसे मौके पर पकड़ लिया और राशि उसके पास से बरामद कर ली। कार्रवाई दल में रीतराम, हरभान सिंह, जीतेन्द्र, सुशील, भोजराज, दिलीप, विनोद, रितेश, परसराम, सुरेश, देवेन्द्र, विजय शामिल थे।


आदिबद्री पर्वत की तीन दिवसीय परिक्रमा यात्रा की शुरू


डीग. आदिबद्री क्षेत्र में खनन के विरोध में ग्राम पसोपा में अनिश्चतकालीन धरने के 12वे दिन गुरुवार को ब्रज के धार्मिक पर्वत आदिबद्री की तीन दिवसीय परिक्रमा का श्रीगणेश किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या ग्रामीण व साधु संत शामिल हुए।
मान मंदिर बरसाना के कार्यकारी अध्यक्ष राधा कांत शास्त्री ने बताया कि आदिबद्री पर्वत की परिक्रमा का इतिहास कई हजारों वर्ष पुराना है। अगर हमारे धार्मिक ग्रंथों व पुराणों की माने तो परिक्रमा की यह परम्परा ध्रुव महाराज जी के समय से चली आ रही जिसको कलियुग में लगभग 600 वर्ष पूर्व चैतन्य महाप्रभु, नारायण भट्ट स्वामी, सूरदास, चाचा वृन्दावनदास, हित हरिवंश आदि कई महापुरुषों ने भी आगे बढ़ाया है। इस दिव्य पर्वत की परिक्रमा की है। गुरुवार से प्रारम्भ हुई परिक्रमा में हजारों की संख्या में हिन्दू-मुस्लिम समुदाय के लोग व साधु संतों ने भाग लिया।

rohit sharma Reporting
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