
-यहां के लाल पत्थर से बना है अयोध्या का राम मंदिर
जिले के रुदावल इलाके में स्थित बंशीपहाड़पुर में लीजधारकों की ओर से पर्यावरण स्वीकृति की पालना नहीं की जा रही है। बल्कि अंधाधुंध खनन के साथ पर्यावरण प्रदूषण भी फैल रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भोपाल ने बंशी पहाड़पुर में पर्यावरण स्वीकृति की पालना नहीं होने पर खनिज विभाग, जिला कलक्टर को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। हालांकि जिन नियमों की पालना पिछले तीन साल से नहीं हो पा रही थी, अब संबंधित विभाग नियमों की पालना का दावा कर कवायद में जुटे हुए हैं। इतना ही नहीं यहां भाजपा व कांग्रेस के बड़े नेताओं की भी लीज हैं। ऐसे में विभाग ने एनजीटी के इस आदेश को भी दबाए रखा। बताते हैं कि रुदावल में खान में काम करने वाले करीब 500 लोग सिलिकोसिस बिमारी से ग्रसित होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। बंसी पहाड़पुर इलाके में 41 लीज चल रहीं हैं। लीज धारक नियमों को ताक पर रखकर अंधाधुंध खनन करने में लगे हुए हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। प्रदूषण की समस्या को लेकर कई बार राज्य सरकार और प्रशासन को शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में ग्रामीणों को एनजीटी का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब याचिका पर प्रशासन को पर्यावरण स्वीकृति की पालना की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
राममंदिर निर्माण के कारण हुआ था बदलाव
जब राम मंदिर के निर्माण में लाल पत्थर की कमी आने लगी थी तो आनन-फानन में केंद्र सरकार ने 11 जून 2021 को केंद्र सरकार ने बंशी पहाड़पुर क्षेत्र के 398 हैक्टेयर क्षेत्र में डायवर्जन की पहली अनुमति दी थी। इसके बाद डेलिमेनेशन का काम कर आक्शन के लिए ब्लाक तैयार किए गए और उन्हें ई-ऑक्शन के माध्यम से नीलाम किया गया। बंशीपहाड़पुर में 646 हैक्टेयर क्षेत्र है। इसमें से द्वितीय चरण में 248 हैक्टेयर क्षेत्र का डायवर्जन कराया जाना भी प्रस्तावित है।
पिछले साल निरीक्षण कर चुकी टीम
एनजीटी की टीम की ओर से पिछले साल बंशीपहाड़पुर में पर्यावरण प्रदूषण के साथ वन्य जीवों पर प्रभाव के कारणों को जानने के लिए निरीक्षण किया था। इसमें पर्यावरण प्रदूषण की बात सामने आई थी। साथ ही लीजधारकों की ओर से बड़े पैमाने पर खनन कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने व एनओसी के नियमों की पालना नहीं करने की बात रिपोर्ट में की थी, लेकिन इतना कुछ सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी शांत बने रहे।
इनका कहना है-सेफ्टी जॉन बनाया जा रहा है। एनजीटी ने लीजों के अंदर पालना नहीं होने की बात कही थी। डायवर्जन पिलर्स व तारबंदी के साथ वन विभाग से पौधारोपण कराना है। काम भी चालू कर दिया गया है। कुल मिलाकर डायवर्जन की शर्तों की पालना कराई जानी है।
मनोज कुमार तंवरएएमई, रूपवास
Updated on:
03 May 2024 07:11 pm
Published on:
03 May 2024 07:09 pm
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