
30-30 हजार रुपए लेकर दलाल गिरोह ने बनाए फर्जी पट्टे
भरतपुर. दलाल गिरोह ने नगर निगम के नाम से फर्जी पट्टे जारी कर निगम कोष को ही नुकसान नहीं पहुंचाया है, बल्कि बड़ी संख्या में पट्टों के लिए आवेदन करने वालों को भी ठगा है। जहां नगर निगम का कोई अधिकार ही नहीं है, वहां भी पट्टा जारी कर दिया। जिस जमीन पर हाइकोर्ट से नगर निगम के पक्ष में निर्णय हो चुका है, उस जमीन का भी पट्टा जारी कर दिया गया। जब नगर निगम के रिकॉर्ड में तलाश की तो कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। ऐसे में नगर निगम ऐसे संदिग्ध पट्टों की एक सूची भी बनाई है। इस सूची को सब रजिस्ट्रार कार्यालय भेजा जाएगा। फर्जी पट्टों के अब तक छह प्रकरण सामने आ चुके हैं।
हकीकत यह है कि नगर निगम से कोई एक-दो फर्जी पट्टे जारी नहीं हुए हैं। हर दिन इनकी संख्या बढ़ रही है। ऐसे में नगर निगम से अब तक जारी पट्टों को लेकर भी आवेदकों में हड़कंप मचा हुआ है। अब जांच में सामने आया है कि नगर निगम में फर्जी पट्टों का खेल पिछले प्रशासन शहरों के संग अभियान से ही शुरू हो गया था। उस समय फर्जी पट्टे बनाने के लिए फाइलों को लगाया गया था। दलाल गिरोह की योजना थी कि फर्जी पट्टे अब बनाए जाएंगे और आयुक्त के तबादला होने के बाद इन्हें नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा, लेकिन इसी बीच अतिक्रमण हटाओ दस्ते की कार्रवाई के दौरान दलाल गिरोह के फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।
नगर निगम की फर्जी रसीद बुक से खेला खेल
दलाल गिरोह ने नगर निगम की फर्जी रसीद बुक से लेकर हर दस्तावेज की छपाई करा रखी है। हालांकि कुछ प्रपत्रों के प्रारूप की प्रति नगर निगम कार्यालय से भी निकाली गई है, लेकिन रसीद काटने से लेकर राशि से संबंधित हरेक कार्य फर्जी रसीद बुक से ही किया गया है। गिरोह ने एक गिरोह से प्रत्येक पत्रावली के 30 से 40 हजार रुपए तक वसूले हैं। अब जब लोग नगर निगम राशि वापस करने की मांग को लेकर पहुंचे तो दलाल गिरोह का खुलासा हुआ है।
न फोन रखता है न किसी से बात करता है
अभी तक फर्जी पट्टों के खेल में नगर निगम में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से संविदा पर कार्यरत नरेश शर्मा व उसके भाई योगेंद्र कुमार का नाम आयुक्त ने एफआइआर में स्पष्ट किया था, लेकिन अब उन्होंने ही एक दलाल का नाम लेकर खुलासा कर दिया है। इसमें बताया है कि दलाल ने हर पट्टे की फाइल कराने के लिए 30 से 40 हजार रुपए लिए थे। दलाल ने करीब एक दर्जन ने ऐसे पट्टे बनवाए हैं। अब जब अधिकारियों ने दलाल को तलाश करने की कोशिश की तो वह न तो मिल रहा है और न वह फोन रखता है। पुलिस भी उसकी जांच करने में जुटी है।
बड़ा सवाल...अकेले नहीं हो सकता यह घोटाला
सबसे बड़ी बात यह है कि नगर निगम में हुए फर्जी घोटाले के बीच आयुक्त ने भले ही दो एफआइआर दर्ज कराकर इतिश्री कर दी है, लेकिन इस घोटाले का मास्टरमाइंड कोई एक नहीं हो सकता है। क्योंकि फाइल लगाने से लेकर उसे जारी करने तक की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि यह गिरोह के बगैर संभव नहीं है।
निगम बनाने में जुटा फर्जी पट्टों की सूची
नगर निगम की ओर से अब फर्जी पट्टों के मामले में एक सूची बनाई जा रही है। हालांकि ऐसे फर्जी पट्टों की संख्या में एक दर्जन या इससे अधिक भी हो सकती है। अभी ऐसे संदिग्ध पट्टों की सूची बनाने के लिए कर्मचारियों को लगाया गया है, जो कि आठ अगस्त तक सूची बनाकर देंगे। यह सूची सब रजिस्ट्रार कार्यालय को भेजी जाएगी। इसके बाद और मामलों में एफआइआर दर्ज कराई जाएंगी।
इन बिंदुओं से जानिए फर्जीवाड़े की हकीकत
1. जारी पट्टों में निगम की जमा रसीद में जो राशि बताई है, वह कोष में जमा नहीं हुई है।
2. जो पत्रावली संख्या पट्टों पर डाली गई है, उस पत्रावली क्रमांक से अन्य लोगों को पट्टे जारी किए गए हैं। फर्जी लोगों के उन पट्टों पर नाम ही अंकित नहीं है।
3. कुछ फर्जी पट्टे उन स्थानों के बनाए गए हैं, जो कि प्रतिबंधित भूमि है। इसमें नरेश शर्मा की ओर से पट्टा बनवाया गया है, वह कच्चा परकोटा का है। ईश्वरसिंह के नाम से जारी पट्टा भी कृषि भूमि का है।
4. नगर निगम के हित में न्यायालय से जिन जमीनों के निर्णय हो चुके हैं, उनके भी पट्टे जारी कर दिए गए हैं। अब लोगों में हड़कंप मचा हुआ, जिन्होंने इस गिरोह से पट्टे लिए हैं।
केस नंबर एक: जघीना गेट के पास कच्चा परकोटा में एक पट्टा जारी हुआ है। इसका भी नगर निगम के रिकॉर्ड में नाम नहीं बोल रहा है। बल्कि दस्तावेज तक नहीं मिल रहे हैं।
केस नंबर दो: हीरादास के पास प्राइवेट बस स्टैंड की भूमि पर पट्टा जारी किया गया है, उसी जमीन को लेकर नगर निगम के पक्ष में हाइकोर्ट की ओर से निर्णय दिया जा चुका है। यहां से अतिक्रमण हटाया जाना है, लेकिन अब पट्टा जारी हो गया है।
केस नंबर तीन: कुम्हेर रोड पर तीन दुकानों का पट्टा जारी किया गया है। जबकि नगर निगम में उन पट्टों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है।
केस नंबर चार: सेवर रोड स्थित गांधी नगर में कृषि भूमि का पट्टा जारी किया गया है। जो कि यूआईटी के अधिकार क्षेत्र में आती है, लेकिन पट्टा नगर निगम से जारी बताया गया है। इसका रिकॉर्ड में गड़बड़ बता रहा है।
इनका कहना है
-मैं साफ कह चुका हूं कि मेरे फर्जी हस्ताक्षर कर जो पट्टे जारी किए गए हैं। इसमें दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लगातार आयुक्त के संपर्क में हूं। इस प्रकरण में अगर नगर निगम का कोई अधिकारी-कर्मचारी भी दोषी है तो कार्रवाई की जाएगी।
अभिजीत कुमार
मेयर नगर निगम
Published on:
08 Aug 2022 12:16 pm
बड़ी खबरें
View Allभरतपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
