
घना पक्षी विहार: 1983 में 258 थे सारस अब मात्र 13
Dense Bird Sanctuary: There were 258 storks in 1983, now only 13
भरतपुर . खेतों में मकान बने तो कृषि भूमि लगातार सिकुड़ती चली गई। शेष बची खेती में कीटनाशक के उपयोग ने पक्षियों के जीवन को संकट में डाल दिया है। यही वजह रही कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में पहुंचने वाले सारस की संख्या वर्ष 1983 में 258 थी, जो घटकर वर्ष 2022 में महज 13 तक पहुंच गई। पक्षी विशेषज्ञ सारसों का जीवन बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
घना केवलादेव नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी से जुड़े कृष्ण कुमार बताते हैं कि पङ्क्षरदों का जीवन बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। ऐसा नहीं होने से मानव जीवन के अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है। कृष्ण कुमार तब से सारस गणना से जुड़े हैं, जबसे यहां साइबेरियन क्रेन आया करते थे। वह कहते हैं कि सारसों को बचाने के लिए प्रकृति को बचाना बेहद जरूरी है। खेतों के सिमटने के साथ करंट के तार भी इनकी मौतों की बड़ी वजह रहे। इनको सुरक्षित करने के लिए वेटलेंडों को बचाना जरूरी है। यदि वेटलेंड बचे रहेंगे तो सारस खुद-ब-खुद बच जाएंगे। इससे पर्यावरण में भी बेहतर सुधार होगा।
घना केवलादेव नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी भरतपुर की ओर से वन विभाग राजस्थान सरकार एवं जिले की विभिन्न संस्थाओं, शोधकर्ताओं तथा प्रकृति प्रेमियों के सहयोग से 9 अप्रेल को सारस गणना होगी। घना केवलादेव नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी भरतपुर के अध्यक्ष एवं भूतपूर्व अवैतनिक वाइल्ड लाइफ वार्डन कृष्ण कुमार एडवोकेट ने बताया कि सुबह 8 बजे से होने वाली 40वीं सारस गणना का प्रशिक्षण सत्र शुक्रवार को घना केवलादेव नेशनल पार्क के डॉ. सालिम अली व्याख्यान केन्द्र पर हुआ। इसमें साहब ङ्क्षसह सिनसिनवार, पार्क डायेक्टर पुष्पेन्द्र ङ्क्षसह कटैला, प्रो. डॉ. त्रिगुणायत एवं क्षेत्रीय अधिकारी जतिन ङ्क्षसह, भोलू, सरनाम ङ्क्षसह एवं धर्मङ्क्षसह मौजूद रहे। सोसायटी के समन्वयक युधिष्ठिर ङ्क्षसह ने बताया कि प्रशिक्षण सत्र में 40वीं सारस गणना को भरतपुर केवलादेव नेशनल पार्क एवं भरतपुर जिला एवं उत्तर प्रदेश से सटे हुए क्षेत्रों को कुल 17 जोन में विभाजित किया है। रविवार को ही सुबह 8 बजे से सालिम अली व्याख्यान केन्द्र में होने वाली सारस गणना का शुभारम्भ, पानी के अभाव में भरतपुर एवं राष्ट्रीय उद्यान का अस्तित्व खतरे में परिचर्चा होगी। डॉ. सुभाष गर्ग राज्यमंत्री, पूर्व सासंद पंडित रामकिशन, पूर्व मंत्री सम्पत ङ्क्षसह एवं रघुराज ङ्क्षसह के आतिथ्य में होगी।
Published on:
08 Apr 2023 04:58 pm
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