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बारिश के मौसम में कश्मीर की वादियों से कम सुंदर नहीं लगता धौलपुर का यह किला…

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से लगा है यह किला, जिले में अपनी आन, बान और शान के लिए प्रसिद्ध है शेरगढ़ किला

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बारिश के मौसम में कश्मीर की वादियों से कम सुंदर नहीं लगता धौलपुर का यह किला...

बारिश के मौसम में कश्मीर की वादियों से कम सुंदर नहीं लगता धौलपुर का यह किला...

धौलपुर. आगरा-ग्वालियर राजमार्ग पर चंबल नदी के पास बना धौलपुर का शेरगढ़ किला गर्मियों में कश्मीर की किसी वादी से कम नहीं है। लेकिन सरकारों की अनदेखी और संरक्षण के अभाव में यह किला धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है। धौलपुर का यह किला राजस्थान के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक आकर्षित करता हुआ किला है। शेरगढ़ किला के साथ साथ यह किला जल किला के रूप में जाना जाता है। यह किला पर्यटक प्रेमियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। बारिश के मौसम में हरियाली से घिरा होने के कारण यह सुरम्य किला कश्मीर से कम नहीं लगता है।
जाने कैसे पहुंचे किले तक
यह किला धौलपुर मुख्यालय से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं यह चम्बल नदी के पुल से पहले ही पूर्व दिशा में आगरा- मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। दिल्ली की तरफ से आने वाले पर्यटक यहां आने के लिए आगरा होकर ग्वालियर का सडक़ मार्ग पकड़ सकते हैं। इसके अलावा ग्वालियर से भी यहां सीधा आया जा सकता है। राजस्थान के भरतपुर जिले से भी धौलपुर होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है।
491 साल पुराना है किला
शिक्षाविद ओमप्रकाश लोधा ने बताया कि यह ऐतिहासिक किला 491वर्ष पुराना है। जो अब खंडहर में बदल गया है। इस किले का निर्माण जोधपुर के राठौर वंश के महाराजा मालदेव ने 1532 ईस्वी में करवाया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किले के निर्माण के समय हनुमान जी का मंदिर भी महाराजा मालदेव ने बनवाया था। जो आज भी स्थित है और पूजा आरती की जाती है। लेकिन बाद में इस किले को शेरशाह सूरी के आक्रमण का सामना करना पड़ा। शेरशाह सूरी के अधीन आते ही धौलपुर किले का नाम शेरगढ़ किला रख दिया गया। शेरशाह सूरी ने 1540 ईस्वी में इस किले का जीर्णोद्धार करवाया। शेरगढ़ किले में चार गेट, कई महल, आंगन, एक मकबरा और कई खंडहर संरचनाएं है। प्रसिद्ध पंचमुखी हनुमान जी के मंन्दिर के साथ साथ कई दर्शनीय मंदिर है। शेरशाह सूरी की ओर से करवाए गए जीर्णोद्धार से पूर्व यह किला एक धार्मिक स्थल था। जो भगवान शिव को समर्पित था। इस किले का राजस्थान के ऐतिहासिक किलों में अपना रोचक एवं महत्वपूर्ण स्थान है। शेरगढ़ किला का उपयोग 20वीं शताब्दी की शुरुआत तक किया जाता रहा है। इसके चारों ओर ऊंचे गढ़ बने हुए हैं। इस पर सैनिक तैनात रहते थे। वहाँ से सैनिक चौकसी, देखभाल और रखवाली किया करते थे।