
बदनाम...साहब पर बड़े अफसरों की मेहरबानी!
भरतपुर . काम दवा के कारोबार की देखरेख का, लेकिन नाता विवादों से। दवा के नाम पर दादागिरी ने उनकी ऑडियो वायरल करा दी। भरतपुर में रहे तो धमकाते रहे। यहां से 385 किलोमीटर दूर पहुंचे तो भी यह दौर चलता रहा। विभाग ने हरकतों को नोटिस किया तो एक बार एपीओ कर दिया। इसके बाद भी आदत नहीं छूटी तो थाने में रिपोर्ट तक दर्ज हो गई, लेकिन अब फिर से विभागीय मेहरबानी से कायदे किनारे ही नजर आ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं हाल ही जारी हुई तबादला सूची में भरतपुर लगाए गए सहायक औषधि नियंत्रक देवेन्द्र कुमार गर्ग की।
सहायक औषधि नियंत्रक पहले भरतपुर में तैनात रहे। यहां यह खूब विवादित रहे। विभाग ने एपीओ भी किया। इसके बाद तबादला झुंझुनूं जिले में कर दिया गया, लेकिन लोगों को धमकाने का काम वहां से भी जारी रहा। झुंझुनूं से इन 'साहबÓ को डिप्लोमा इन फार्मेसी जन प्रशिक्षण संस्थान जयपुर भेजा गया, लेकिन यह ठंडी पोस्टिंग इन्हें रास नहीं आई। सो, उच्च स्तरीय सिफारिश कराकर फिर से भरतपुर में कुर्सी कब्जा ली। अब इस आदेश के बाद से भरतपुर में इनका फिर से विरोध शुरू हो गया है। कुछ लोगों ने विभाग के उच्चाधिकारियों को शिकायत भी भेजी है। इसमें कहा है कि यह पहले एपीओ हो चुके हैं। इसके बाद दर्ज हुआ मुकदमा एसीजेएम नंबर दो कोर्ट में लंबित है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन सबके बाद इन्हें फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जा सकती, लेकिन मेहरबानी के चलते इन्हें फिर से भरतपुर में इस विभाग का मुखिया बना दिया है।
फरवरी में दर्ज हुआ था मामला
थाना मथुरा गेट में इस्तगासे के माध्यम से झुंझुनूं में सहायक औषधि नियंत्रक पद पर रहते हुए देवेन्द्र गर्ग व एक दवा विक्रेता के खिलाफ 19 फरवरी को मामला दर्ज हुआ था। इसमें दोनों के खिलाफ मोबाइल पर कॉल कर अभद्रता करने व झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देेकर एक लाख रुपए मांगने का आरोप लगाया था। रिपोर्ट में मनोज दुबे पुत्र रोशनलाल निवासी राजेन्द्र नगर ने बताया था कि 25 जनवरी को रात नौ बजे मोबाइल पर फोन आया। इसमें 15 जनवरी को जिला कैमिस्ट एसोसिएशन के चुनाव में परिवादी के भागीदारी करने पर पुष्पेन्द्र गुप्ता उर्फ बॉबी निवासी जिला पुस्तकालय के पास के ग्रुप की पराजय होने पर बौखला कर पुष्पेन्द्र गुप्ता ने देवेन्द्र गर्ग तत्कालीन सहायक औषधि नियंत्रक झुंझुनूं से मिलकर उसे फोन पर अपमानजनक व धमकी भरे शब्दों में गालियां दीं। इसके बाद वाट्सएप पर कॉल कर एक लाख रुपए की मांग की। साथ ही पूर्ति नहीं होने पर अंजाम भुगताने की धमकी दी।
शिकायतों पर विभाग ने किया एपीओ
राज्यपाल की आज्ञा से वर्ष 2020 में 20 अप्रेल को तत्कालीन शासन उप सचिव संजय कुमार ने आदेश जारी किए थे। इसमें देवेन्द्र कुमार गर्ग सहायक औषधि नियंत्रक भरतपुर को प्रशासनिक कारणों से एपीओ कर मुख्यालय औषधि नियंत्रक प्रथम मुख्यालय जयपुर किया था।
चिकित्सकों की सूची में आ गए औषधि नियंत्रक
हाल ही में 4 नवम्बर को संयुक्त शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (ग्रुप-2) विभाग एवं पंचायती राज चिकित्सा विभाग निमिषा गुप्ता ने चिकित्सकों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। तीस चिकित्सकों की सूची में देवेन्द्र कुमार गर्ग सहायक औषधि नियंत्रक झुंझुनूं से डिप्लोमा इन फार्मेसी जन प्रशिक्षण संस्थान जयपुर स्थानांतरणधीन को सहायक औषधि नियंत्रण भरतपुर लगाया है।
फील्ड पोस्टिंग नहीं देने की गुहार
शहर के राजेन्द्र नगर निवासी मनोज कुमार दुबे ने आयुक्त एफडीए जयपुर को पत्र लिखकर गर्ग को फील्ड पोस्टिंग नहीं देने की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया है कि यह अधिकारी अनैतिक दवाब बनाते हुए अवैध चौथ वसूली में लिप्त रहते हैं। इसके चलते यह पहले भी एपीओ हो चुके हैं। इसकी रिकॉर्डिंग दवा बाजार में वायरल है। झुंझुुनूं रहने के दौरान भी इन्होंने भरतपुर में अवैध चौथ वसूली की कोशिश की थी। दवाब बनाने के लिए इन्होंने लोगों को फोन कर धमकाया था। इसी अधिकारी को अब पुन: भरतपुर में लगाया है, जो कि अनुचित है। क्योंकि यह फिर से अवैध चौथ वसूली में लिप्त हो जाएगा। पत्र में आरोप लगाते हुए कहा है कि कैमिस्टों को अनावश्क रूप से लूटा जाएगा एवं अवैध दवा माफिया का बाजार पुन: शुरू हो जाएगा।
इनका कहना है
मुझे इस बारे में ज्यादा पता नहीं है। यह सरकार का निर्णय है। इसमें मैं भी क्या कह सकता हूं। जिन्होंने किया है, वह भी इस बारे में बता सकते हैं।
- राजाराम शर्मा, ड्रग कंट्रोलर जयपुर
सरकार ने नियमानुसार मुझे फील्ड पोस्टिंग दी है। इससे पहले भी मैं फील्ड पोस्टिंग में था। मेरी कोई शिकायत नहीं है। मुकदमा झूठा दर्ज कराया था। मेरी जानकारी में आया है कि उसमें एफआर लग चुकी है। मेरा कोई भी ऑडियो वायरल नहीं हुआ है। न ही वह मेरे फोन से है। भरतपुर में रहते समय मैंने दो नकली दवा पकड़ी और भरतपुर-धौलपुर में 100 लाइसेंस सस्पेंड किए। एपीओ होकर भी अधिकारी फील्ड पोस्टिंग में लगते हैं।
- देवेन्द्र गर्ग, सहायक औषधि नियंत्रक भरतपुर
Published on:
19 Nov 2022 02:00 pm
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